कब्र से निकालकर शव सौंपा

इमेज कॉपीरइट BBC World Service

आखिरकार छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा ज़िला प्रशासन ने एक हफ़्ते के बाद मडकामी मासा का शव कब्र से निकालकर उसके परिजनों को सौंप दिया है.

ग्रामीणों के आक्रोश के चलते प्रशासन को ऐसा करना पड़ा. पिछले एक सप्ताह के दौरान सुकमा के केरलापाल और आसपास के इलाकों से इकठ्ठा हुए सैकड़ों आदिवासी ग्रामीणों ने छत्तीसगढ़ को आंध्र प्रदेश से जोड़ने वाले राष्ट्रीय उच्च मार्ग को कई बार जाम किया.

ग्रामीणों का आरोप है कि चिक्पाल गांव के मुखिया मडकामी मासा को केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल और पुलिस के जवान गाँव से अपने साथ ले गए थे.

केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल के महानिरीक्षक पंकज सिंह ने एक अखबार को ये बयान दिया था, " छह अगस्त को सीआरपीएफ़ और स्थानीय पुलिस नीलावाराम में एक तलाशी अभियान में लगी हुई थी कि तभी माओवादियों की तरफ़ से गोलियां चलाई गईं. सुरक्षा बलों ने भी जवाबी गोलीबारी की. बाद में जब मुठभेड़ ख़त्म हुई तो हमारे तलाशी अभियान के दौरान (मरकाम मासा का) शव बरामद किया गया."

दंतेवाड़ा की इस घटना नें तूल पकड़ना शुरू कर दिया है. सुकमा, केरलापाल, चिक्पाल और उसके आस पास के इलाके के ग्रामीणों में काफी आक्रोश है.

विरोध प्रदर्शन

गाँववालों के आक्रोश को देखते हुए ज़िला प्रशासन ने मामले की जांच एक दंडाधिकारी से करने का निर्देश दिया है. जहाँ केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल के आला अधिकारी कहते हैं कि मडकामी मासा के मौत मुठभेड़ में हुई है वहीँ गाँव वालों कहते हैं कि पिछली पाँच अगस्त को केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल के जवान उनके गाँव 'सिविक एक्शन प्लान' के तहत आए थे.

सुरक्षा बलों के जवान चिक्पाल में कैंप लगाए हुए थे जिसमें आस पास के ग्रामीण इकठ्ठा हुए थे. इसके बाद जवानों नें दूसरे गाँव बेवापाडा में भी कैंप लगाने की बात कही. ग्रामीणों का कहना है कि वह अपने साथ उनके मुखिया मडकामी मासा को भी ले गए. बाद में पुलिस नें दावा किया कि छह अगस्त को नीलावारम के इलाके में पुलिस और नक्सालियों के बीच मुठभेड़ हुई थी जिसमें उन्होंने एक माओवादी छापामार को मार गिराया.

शव की शिनाख्त नहीं होने का हवाला देते हुए पुलिसवालों ने शव को दफना दिया जबकि मडकामी मासा के परिजन थाने का चक्कर लगाते रहे.

बाद में पुलिस द्वारा शव की खींची हुई फोटो से पता चल पाया कि पुलिस जिसे अज्ञात बताकर दफना चुकी है, दर असल वह मडकामी मासा की लाश है.

शुक्रवार को दंतेवाड़ा ज़िला प्रशासन के लिए काफ़ी मशक्कत भरा दिन रहा था. उत्तेजित ग्रामीणों ने जब आंध्र प्रदेश को जोड़ने वाले उच्च मार्ग को जाम किया तो पुलिस के बड़े अधिकारियों को उन्हें समझाने में पसीने छूट गए.

दंतेवाड़ा के अतिरिक्त कलेक्टर इमिल लकड़ा, सुकमा के अतिरिक्त एसपी डी एस मरावी और दंतेवाड़ा के अतिरिक्त एस पी राजेश कुकरेजा ने आदिवासियों को आश्वस्त किया था कि मामले की जांच की जाएगी. मगर प्रशासन के आश्वासन से विपक्षी दल कांग्रेस के विधायक कवासी लकमा संतुष्ट नहीं हैं.

उनकी मांग है कि घटना की जांच सीबीआई से कराई जाए. वहीं आदिवासी माहासभा के अध्यक्ष मनीष कुंजाम का आरोप है कि घटना नें साबित कर दिया है कि बस्तर के आदिवासियों को फर्ज़ी मुठभेड़ में मारा जा रहा है.

उन्होंने घटना में शामिल सीआरपीएफ़ और ज़िला पुलिस के जवानों के खिलाफ़ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है.

संबंधित समाचार