तमिलों के बारे में टिप्पणी पर अफ़सोस है: अमरीका

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Image caption अमरीकी वाणिज्य दूतावास के बयान में अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन की हाल की चिन्नई यात्रा का भी ज़िक्र है

चेन्नई स्थित अमरीकी वाणिज्य दूतावास ने एक बयान जारी कर शुक्रवार को वाइस काउंसुल के भाषण में तमिलों के बारे की गई एक आपत्तिजनक टिप्पणी पर अफ़सोस जताया है.

शुक्रवार को एसआरएम विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम में वाइस काउंसुल मॉरीन चाओ ने एक भाषण में भारत में 23 साल पहले के अपने अनुभवों का विवरण किया था.

एक रेल यात्रा की बात करते समय उन्होंने बताया था कि 24 घंटे की यात्रा जब 72 घंटे में भी पूरी न हो पाई तो उनकी त्वचा गंदी और काली हो गई. इस संदर्भ में उन्होंने तमिलों की भी ज़िक्र कर डाला और इसके बाद बवाल खड़ा हो गया.

मॉरीन माफ़ी मांगें: जयललिता

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने चेन्नई में अमरीकी वाणिज्य दूतावास की साउंसुल जनरल को एक पत्र लिखकर कड़ी आपत्ति जताई.

उन्होंने कहा, "ये टिप्पणी निंदनीय है और इससे नस्लभेद झलकता है. आप सभी मानेंगे कि वाइस काउंसुल की टिप्पणी सभी तमिलों का अपमान है." उन्होंने अनुरोध किया कि मॉरीन चाओ को समझाया जाए कि उन्हें अपनी टिप्पणी वापस लेनी चाहिए और माफ़ी मांगनी चाहिए."

वाणिज्य दूतावास ने बयान जारी कर कहा - "मॉरीन चाओ 23 साल पहले के अपने सुखद अनुभवों का ज़िक्र कर रही थीं जिस दौरान उन्होंने कुछ अनुचित टिप्पणी की थी. यदि उनकी दुर्भाग्यपूर्ण टिप्पणी से किसी को बुरा लगा है तो उन्हें अफ़सोस है क्योंकि उनकी मंशा ऐसा करने की नहीं थी."

इस बयान में अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन की हाल की चेन्नई यात्रा का भी ज़िक्र है.

वाणिज्य दूतावास ने कहा है कि क्लिंटन ने ज़ोर देकर कहा था कि भारत-अमरीका साझेदारी लोकतंत्र, उदारवादी सोच, एक दूसरी की धार्मिक और सांस्कृतिक भिन्नता के प्रति सम्मान के एक जैसे मूल्यों पर आधारित है.

बयान में इस बात पर बल दिया गया है कि चेन्नई स्थित वाणिज्य दूतावास और भारत में अमरीकी दूतावास इन मूल्यों का अनुसरण करने के बारे में प्रतिबद्ध हैं.

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