'तरक्की में सबसे बड़ी रुकावट है भ्रष्टाचार'

  • 15 अगस्त 2011
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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि भ्रष्टाचार देश की तरक्क़ी में बहुत बड़ी रूकावट है लेकिन इसे किसी एक बड़े क़दम से नहीं मिटाया जा सकता है.

स्वतंत्रता दिवस की 64वीं सालगिरह पर लाल क़िले की प्राचीर से भाषण देते हुए भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा, "दुनिया ये मानती है कि भारत में एक बहुत बड़ी आर्थिक ताक़त के रूप में उभरने की क़ाबिलियत है. लेकिन हमारी प्रगति के रास्ते में भ्रष्टाचार एक बहुत बड़ी रूकावट है."

मनमोहन सिंह ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आए है जिनमें कुछ मामलों में केंद्र सरकार के लोगों पर आरोप है जबकि कुछ अन्य मामलों में विभिन्न राज्य सरकार के लोगों पर भी आरोप लगे हैं.

उन्होंने कहा कि ये ज़रूरी है कि हम भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ाई जारी रखे. मनमोहन सिंह ने कहा, "ये ज़रूरी है कि जब इन मसलों पर विचार करें तो ऐसा माहौल पैदा न हो कि देश की प्रगति पर ही सवाल उठने लगें."

रिश्वतख़ोरी के कई तरीक़ों के बारे में बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हममें यह आत्मविश्वास होना चाहिए कि हम इन्हें सुलझा लेंगे, लेकिन साथ ही उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "मेरा ऐसा मानना है कि किसी एक बड़े क़दम से ही भ्रष्टाचार को नहीं मिटाया जा सकता है बल्कि इसके लिए हमें कई मोर्चों पर एक साथ काम करना होगा."

अपनी बात की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि न्यापालिका को मज़बूत करना होगा ताकि लोगों को जल्द न्याय मिल सके और लोगों को ग़लत काम करने से पहले सोचना पड़े.

मनमोहन सिंह ने कहा कि सरकार एक स्वतंत्र लोकपाल का गठन करना चाहती है लेकिन उन्होंने साफ़ किया कि इसका फैसला संसद ही कर सकती है कि इस मामले में कैसा क़ानून बनाया जाना चाहिए.

ये कहते हुए कि जो सहमत नहीं हैं उन्हे अपनी बात अलग-अलग माध्यम से संसद के सामने रखना चाहिए लेकिन "हमें अनशन और भूख हड़ताल का रास्ता अख़्तियार नहीं करना चाहिए."

प्रधानमंत्री ने कहा कि न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे में नहीं लाया जाएगा.

'भ्रष्टाचार के लिए कोई रामबाण नहीं'

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर दिए गए अपने भाषण में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने कहा था कि भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए कोई एक उपाय नहीं है.

प्रतिभा पाटिल ने कहा, "भ्रष्टाचार हमारे देश के राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन के लिए कैंसर के समान है." लेकिन साथ ही उन्होंने आगाह किया कि "इससे लड़ने के लिए कोई एक रामबाण नहीं है, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था क़ायम की जानी चाहिए जिसमें हर स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही हो, और जिसे सख़्ती से लागू किया जाए."

देश की पहली महिला राष्ट्रपति ने कहा कि इस समस्या का निपटारा इस तरह किया जाना चाहिए "जो व्यावहारिक हो और जिसे लागू होने के बाद लंबे समय तक क़ायम रह सके."

भाषण में उन्होंने आगे कहा कि जाने-अनजाने में कोई ऐसी कोशिश नहीं की जानी चाहिए जिससे संस्थाओं की साख और अधिकार का क्षरण हो.

जानकारों का कहना है कि प्रतिभा पाटिल और फिर सोमवार को लाल क़िले से मनमोहन सिंह का भाषण उन लोगों के लिए एक सलाह है जो संसदीय व्यवस्था और प्रक्रिया पर ही प्रश्न चिन्ह लगा रहे हैं.

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Image caption प्रतिभा पाटिल ने भ्रष्टाचार को देश के लिए कैंसर बताया.

अन्ना हज़ारे प्रधानमंत्री और उच्च न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे में लाने की अपनी मांग पर दबाव बनाने के लिए मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे हैं.

राष्ट्रपति ने ये भी कहा था कि हालांकि जनहित के मामलों पर देश भर में बहस की जा सकती है लेकिन वो निर्वाचित प्रतिनिधियों के क़ानून बनाने की प्रक्रिया में मदद के इरादे से ही की जानी चाहिए.

यानि क़ानून बनाने का अंतिम अधिकार संसद को ही है. लाल क़िले से प्रधानमंत्री ने भी यही बात दोहराई है.

कड़ी सुरक्षा

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिल्ली और देश के दूसरे शहरों में सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए गए हैं. दिल्ली में हाई अलर्ट है जबकि गृह मंत्रालय ने ताज़ा सुरक्षा अलर्ट जारी किया है.

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Image caption गृह मंत्रालय ने पुलिस को हाई अलर्ट पर रहने के आदेश दिए हैं.

दिल्ली में पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को जगह-जगह पर तैनात किया गया है और कई सड़कों और रास्तों को बंद कर दिया गया है. जगह-जगह पर वाहनों को रोककर उनकी तलाशी ली जा रही है.

भारतीय प्रशासित जम्मू-कश्मीर में हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने सोमवार के दिन आम हड़ताल का आहवान किया है जबकि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने अलगाववादियों से कहा है कि वो सभी मुद्दों के हल शांतिपूर्ण तरीके से खोजने के लिए बातचीत की प्रक्रिया में शामिल हों.

प्रधानमंत्री के भाषण के समय लाल क़िले और उसके पास के क्षेत्र में 'नो फ़्लाई ज़ोन' रहा यानी किसी भी जहाज़ को ऊपर से उड़ान नहीं भरने दिया गया.

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