तिहाड़ जेल के बाहर प्रदर्शन जारी

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जनता के व्यापक दबाव के बाद दिल्ली पुलिस ने अन्ना हज़ारे को रात में रिहा करने का फ़ैसला किया है लेकिन अन्ना हज़ारे ने कहा है कि वो बिना शर्त रिहाई चाहते हैं वर्ना वो जेल से बाहर नहीं निकलेंगे.

अन्ना के साथ गिरफ्तार हुए मनीष सिसौदिया ने जेल से बाहर निकल कर संवाददाताओं को अन्ना के फैसले के बारे में जानकारी दी और उसके बाद जेल के ही बाहर समर्थकों के साथ अनशन पर बैठ गए.

सिसौदिया ने कहा, '' अन्ना ने कहा है कि अगर उन्हें जेपी पार्क अनशन के लिए नहीं जाने दिया गया तो वो जेल से बाहर नहीं आएंगे. अन्ना और केजरीवाल अभी भी अनशन पर हैं और जेल से बाहर नहीं आएंगे जब तक उनकी शर्त नहीं मानी जाएगी.''

अन्ना को 16 अगस्त की सुबह उनके घर से एहतियातन गिरफ्तार कर लिया गया था और सात दिन के लिए तिहाड़ जेल भेजा गया था. तिहाड़ जेल के प्रवक्ता ने अन्ना की रिहाई के फ़ैसले के बारे में जानकारी दी.

प्रवक्ता का कहना था, '' अन्ना हज़ारे और उनके साथियों को रिहा करने का फै़सला किया गया है लेकिन अन्ना ने रिहा होने से यह कहते हुए मना किया है कि वो बिना शर्त रिहाई चाहते हैं. हमने उनकी बात आला अधिकारियों तक पहुंचा दी है और जल्दी ही आपको आगे की जानकारी से अवगत कराया जाएगा.''

देर रात अन्ना से मिलने के लिए आर्ट ऑफ लिविंग के श्री श्री रविशंकर तिहाड़ जेल पहुंचे थे लेकिन उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली.

माना जाता है कि अन्ना ने साफ कर दिया है कि अगर उन्हें रिहा किया गया तो भी वो भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अनशन करेंगे लेकिन संभवत सरकार चाहती है कि अन्ना अनशन न करें.

इससे पहले तिहाड़ जेल के महानिदेशक नीरज कुमार ने बीबीसी से कहा है कि उन्हें अन्ना की रिहाई के आदेश मिल गए हैं. रिहाई के लिए कोई शर्त नहीं रखी गई है और अन्ना हज़ारे के साथ अरविंद केजरीवाल और सात अन्य लोगों को रिहा किया जा रहा है.

दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजन भगत ने अन्ना की रिहाई की पुष्टि करते हुए कहा है कि उनकी ओर से तिहाड़ जेल प्रशासन को अन्ना हज़ारे की रिहाई के आदेश भेज दिए गए हैं.

अन्ना हज़ारे सरकारी लोकपाल का विरोध कर रहे हैं और कहते रहे हैं कि जनलोकपाल विधेयक या एक सख़्त लोकपाल विधेयक ही भ्रष्टाचार को दूर कर सकता है.

गिरफ़्तारी और विरोध

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Image caption देश भर में अन्ना हज़ारे की गिरफ़्तारी के विरोध में व्यापक प्रदर्शन हुए हैं

दिल्ली पुलिस की अनुमति के बिना आमरण अनशन के लिए जा रहे अन्ना हज़ारे को अरविंद केजरीवाल और कुछ अन्य सहयोगियों के साथ मंगलवार की सुबह साढ़े सात बजे उनके निवास से गिरफ़्तार कर लिया गया था.

निजी मुचलका देने से इनकार करने के बाद शाम को अन्ना हज़ारे और उनके साथियों को एक विशेष अदालत ने सात दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया था.

अन्ना की गिरफ़्तारी के बाद भारत के विभिन्न राज्यों के बहुत से शहरों में हज़ारों लोगों ने व्यापक प्रदर्शन किए थे.

दिन में दिल्ली, मुंबई, जम्मू, पटना और जयपुर से लेकर हैदराबाद और चेन्नई तक सभी छोड़े बड़े शहरों में लोग सड़कों पर उतरे और जनलोकपाल का समर्थन करते हुए अन्ना हज़ारे की गिरफ़्तारी का विरोध किया था.

शाम को दिल्ली के इंडिया गेट और छत्रसाल स्टेडियम में सैकड़ों लोगों ने इकट्ठा होकर मोमबत्तियाँ जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.

दिल्ली की एक विशेष अदालत में आगे आंदोलन न करने और अपने समर्थकों को आंदोलन करने के लिए न कहने जैसी शर्तों वाले निजी मुचलका न देने के बाद अदालत ने अन्ना हज़ारे और उनके सहयोगियों को सात दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था.

दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजन भगत के अनुसार शाम को अदालत ने अदालत ने अपने आदेश में परिवर्तन करके उनकी रिहाई के आदेश जारी किए हैं.

समझा जाता है कि दिल्ली पुलिस की ओर से इसके लिए आवेदन किया गया था.

अभी तय नहीं है कि अन्ना हज़ारे रिहाई के बाद क्या करेंगे.

लेकिन सोमवार की शाम एक प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा था, "अनशन जारी रहेगा वो गिरफ़्तार करेंगे तो जेल में अनशन करेंगे और रिहा करेंगे तो जहाँ रिहाई होगी वहीं अनशन जारी रहेगा."

मतभेद

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Image caption अन्ना की गिरफ़्तारी के समय भी सैकड़ों लोग वहाँ एकत्रित हो गए थे

अन्ना हज़ारे और उनकी टीम जंतर मंतर में अनशन के लिए अनुमति देने के लिए आवेदन किया था. लेकिन दिल्ली पुलिस ने इससे इनकार कर दिया था.

इसके बाद दिल्ली पुलिस ने कई और स्थानों का सुझाव दिया जो अन्ना की टीम को मंज़ूर नहीं था और वे चाहते कि केंद्रीय दिल्ली में अनशन के लिए स्थान दिया जाए.

आख़िर दोनों पक्षों के बीच दिल्ली के जयप्रकाश नारायण पार्क पर सहमति बनी लेकिन अन्ना की टीम दिल्ली पुलिस की 22 शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं थी.

उनका कहना था कि वे सिर्फ़ तीन दिन में अनशन ख़त्म करने और अन्ना समर्थकों की संख्या पाँच हज़ार तक सीमित रखने जैसी छह शर्तों को स्वीकार नहीं कर सकते.

इसके बाद दिल्ली पुलिस ने जयप्रकाश नारायण पार्क के आसपास धारा 144 लागू कर दिया था.

इसी आधार पर सुबह दिल्ली पुलिस ने अन्ना हज़ारे और अरविंद केजरीवाल जैसे उनके सहयोगियों को गिरफ़्तार कर लिया था.

किरण बेदी और शांति भूषण को लगभग 1400 प्रदर्शनकारियों के साथ हिरासत में ले लिया गया था.

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