अनशन पर कायम अन्ना और दिल्ली प्रशासन आमने-सामने

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Image caption अन्ना हज़ारे के सहयोगियों ने गिरफ़्तारी देने की बात कही है

भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार के लोकपाल विधेयक का विरोध कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे ने दिल्ली पुलिस के अनुमति न देने के बावजूद मंगलवार से जयप्रकाश नारायण पार्क में अपना अनिश्चितकालीन अनशन शुरु करने की घोषणा की है.

कांग्रेस के नेतृत्व वाली मनमोहन सिंह सरकार और कांग्रेस पार्टी के हाल के तीखे प्रहारों और अन्न के रवैए के कारण टीम अन्ना और उनके समर्थक प्रशासन के बीच मंगलवार को सीधे टकराव की स्थिति पैदा हो गई है.

उधर मुंबई और अन्य शहरों में अन्ना के अनेक समर्थकों ने सोमवार रात को प्रदर्शन किए और मंगलवार को भी देश में कई जगहों पर ऐसे प्रदर्शन होने की संभावना जताई जा रही है.

इलाहाबाद, अहमदाबाद, हैदराबाद और कई अन्य शहरों में सोमवार शाम और रात को अन्ना के समर्थन में लोग एकत्र हुए.

जेपी पार्क और अन्य अनेक इलाक़ों में दिल्ली प्रशासन ने धारा 144 लगा दी है और चार या से ज़्यादा लोगों के एक जगह जमा होने पर पाबंदी है. टीम अन्ना ने प्रशासन की ओर से लगाई गई 22 शर्तों में से छह को मानने से इनकार कर दिया था और इसके बाद उन्हें वहाँ अनशन की इजाज़त नहीं दी गई थी.

टीम अन्ना चाहती है कि लोकपाल के दायरे में प्रधानमत्री और न्यायपालिका के साथ-साथ सभी प्रशासनिक अधिकारियों को लाया जाए.

इससे पहले प्रधानमंत्री ने लालकिले से भाषण देते हुए भ्रष्टाचार को ख़त्म करने की ज़रूरत बताई थी लेकिन कहा था कि लोकपाल और संबंधित मसलों पर अनशन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

'मक़सद सरकार गिराना नहीं'

सोमवार को अन्ना हज़ारे अचानक दिल्ली में राजघाट पर पहुँच गए और कुछ ही देर में उनके सैकड़ों समर्थक वहाँ जमा हो गए.

सोमवार को उन्होंने स्पष्ट कहा, "मुझे ख़बर मिली है कि हमें जेपी पार्क में कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं मिली है. हम फिर भी वहाँ जाएँगे और यदि रोका जाता है तो शांतिपूर्वक तरीके से वहीं बैठ जाएँगे और गिरफ़्तारी देंगे."

उन्होंने कहा, "मुझे लाल किले से दिए प्रधानमंत्री के आज के भाषण पर अफ़सोस है. वे कपिल सिब्बल की भाषा बोल रहे हैं. हज़ारे ने कहा कि प्रभावी लोकपाल के आने से वह 100 प्रतिशत भ्रष्टाचार मिटने का दावा तो नहीं करते मगर 60 से 65 प्रतिशत भ्रष्टाचार ज़रूर मिट जाएगा. अगर ऐसा नहीं हुआ तो मैं कपिल सिब्बल के घर पानी भरने को तैयार हूँ."

हज़ारे का कहना था कि उनके इस आंदोलन का मक़सद किसी भी तरह से सरकार गिराना नहीं है लेकिन इस दौरान यदि सरकार गिर जाए तो उन्हें कोई परवाह नहीं है.

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