मंत्री को बर्खास्त करने की सिफ़ारिश

  • 16 अगस्त 2011
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Image caption अब मुख्यमंत्री मायावती को इस सिफ़ारिश पर कार्रवाई करनी है

उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त जस्टिस एनके मेहरोत्रा ने मायावती सरकार में पशुधन एवं दुग्ध विकास राज्यमंत्री अवध पाल सिंह यादव को गंभीर भ्रष्टाचार, पद के दुरूपयोग और अपने विरोधियों के उत्पीडन का दोषी पाते हुए उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की सिफ़ारिश की है.

लोकायुक्त जस्टिस मेहरोत्रा ने स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्री श्री यादव के अलावा एटा के ज़िला अधिकारी, पुलिस अधीक्षक एवं कई अन्य अधिकारियों के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई की संस्तुति की है.

जस्टिस मेहरोत्रा ने मंत्री अवध पाल सिंह यादव के ख़िलाफ़ अपनी जांच रिपोर्ट मंगलवार को मुख्यमंत्री कार्यालय भेज दी है.

मंत्री अवध पाल सिंह यादव के ख़िलाफ़ इन्ही आरोपों को लेकर हाल ही में विधान सभा में जमकर हंगामा हुआ था. तब सरकार ने उनका बचाव किया था.

लेकिन राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि इस समय जबकि देश भर में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ माहौल गरम है , लोकायुक्त की रिपोर्ट के बाद मुख्यमंत्री मायावती अपने इस विवादास्पद मंत्री को बर्खास्त कर सकती हैं.

डा. सुबोध यादव नाम के एक व्यक्ति ने मंत्री श्री यादव के ख़िलाफ़ लोकायुक्त कार्यालय को शिकायत भेजी थी.

रिपोर्ट के अनुसार मंत्री श्री यादव ने वकीलों के माध्यम से अपना जवाब लोकायुक्त को भेजा . लेकिन लोकायुक्त ने जांच के बाद उनका उत्तर संतोषजनक नहीं पाया.

आरोप

मंत्री यादव के ख़िलाफ़ मुख्य आरोप यह है कि उन्होंने प्रदेश में 189 पशु चिकित्सालयों के निर्माण के लिए सरकार से बजट स्वीकृत कराय फिर इनमें से अधिकांश के निर्माण का ठेका अपने ही बेटे और भांजे को दिलवा दिया.

उन पर आरोप है कि मंत्री ने नियमों का उल्लंघन करते हुए अपने गृह जनपद एटा की अलीगंज तहसील में ही 26 अस्पतालों का निर्माण करवा डाला.

एक और तथ्य यह है कि विभाग के पास इन अस्पतालों को चलाने के लिए डाक्टर या अन्य स्टाफ़ नहीं था. शिकायतकर्ता का निष्कर्ष यह कि कि सारा निर्माण कार्य मुख्य रूप से कमीशन खाने के लिए हुआ. इस कारण निर्माण भी घटिया हुआ. लोकायुक्त ने निर्माण की टेक्निकल जांच की सिफ़ारिश की है.

आरोप यह भी है कि पशुधन विभाग में दवाओं, वैक्सीन और राष्ट्रीय गाय एवं भैंस प्रजनन परियोजना में भी भारी भ्रष्टाचार हुआ.

मंत्री श्री यादव पर एक और गंभीर आरोप यह है कि वह एटा ज़िले में बड़े पैमाने पर कच्ची शराब बनवाने और बिकवाने का धंधा करते हैं.

लोकायुक्त ने अपनी जांच में यह आरोप भी सही पाया कि मंत्री श्री यादव ने अपने पद का दुरूपयोग करते हुए ग्राम सभा की ज़मीनों पर कब्ज़ा किया है. उन्हें इन जमीनों से बेदखल करने की संस्तुति की गई है.

लोकायुक्त मेहरोत्रा ने मुख्यमंत्री मायावती से यह भी सिफारिश की है कि मंत्री अवध पाल सिंह यादव के निजी जन संपर्क अधिकारी के रूप में कार्यरत संजू यादव और अजीत यादव के ख़िलाफ़ जांच कराकर कार्रवाई की जाए. आरोप है के ये लोग मंत्री के नाम पर बड़े पैमाने पर अवैध वसूली करते हैं.

अपनी जांच में लोकायुक्त ने यह आरोप भी सही पाया कि मंत्री श्री यादव ने अपने ख़िलाफ़ शिकायत करने वाले डा. सुबोध यादव उनके पिता और चाचा के ख़िलाफ़ के ख़िलाफ़ करीब दो दर्जन फ़र्ज़ी मुक़दमे कायम कराए. लोकायुक्त ने इन सभी फर्जी मुकदमों की जांच कराकर कर शिकायतकर्ता को राहत दिलाने की सिफारिश की है. उन्होंने शिकायतकर्ता को सुरक्षा दिलाने की भी सिफारिश की है.

लोकायुक्त ने अपनी रिपोर्ट में यह भी लिखा है जिला पुलिस ने मंत्री के ख़िलाफ़ हत्या के आपराधिक मामलों में पुलिस ने मंत्री का बचाव किया.

लोकायुक्त ने जस्टिस मेहरोत्रा ने मुख्यमंत्री से कहा है कि वह सभी बिंदुओं पर कार्रवाई करके एक महीने के अंदर उन्हें सूचित करें.

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