'अमरीका में एक दिन इंडिया गेट जैसा मोड़ आएगा'

अगर ये कहें कि भारत और ख़ासकर राजधानी दिल्ली इनदिनों 'अन्नामय' हैं तो कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा. हर शाम को इंडिया गेट जैसी जगहों पर मोमबत्तियाँ लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं....ऐसे दृश्य जो आज की पीढ़ी ने फ़िल्मी पर्दे पर ही देखे हैं.

बुधवार शाम को जब मैं इंडिया गेट पहुँची थी तो वो हर वर्ग और उम्र के लोगों का मजमा था- स्कूली थैला लेकर पहुँचे स्कूली बच्चे, सफ़ेद पोशाक पहने मेडिकल कॉलेजों के छात्र, लाठी लेकर चलने वाले उम्रदराज़ लोग. कोई नारे लगा रहा था, कोई अन्ना-स्टाइल टोपी पहने तख़्तियाँ लेकर ख़ड़ा था.... लेकिन इस पूरी भीड़ में एक व्यक्ति बड़ी तल्लीनता से सब देख रहा था जो भीड़ में शामिल भी था पर तटस्थ भी था. नाम था टॉड और वे अमरीका से आए थे.

उनकी तल्लीनता देखकर मैने कुछ सकुचाकर उनसे बातचीत शुरु की. वे पहले भी भारत आते रहे हैं और अपने इस दौरे में वे अन्ना हज़ारे की इस मुहिम पर करीब से नज़र रखे हुए थे. मेरी उत्सुकता ये जानने की थी कि एक विदेशी व्यक्ति, एक तटस्थ व्यक्ति इस सब के बारे में क्या सोच रहा है?

क्या उनके लिए ये पूरा माहौल महज़ एक ‘एक्ज़ॉटिका’ था या फिर उनकी इस पर कोई गंभीर सोच थी. टॉड बचपन में इंग्लैंड में रहे हैं और अब अमरीका में. उनका कहना था कि भारत में चल रहे प्रदर्शनों की सबसे अच्छी बात ये रही है कि आमतौर पर हुल्लड़बाज़ी नहीं हुई है.

हुड़दंग नहीं

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बतौर उनके कई यूरोपीय देशों में जब इस तरह के प्रदर्शन होते हैं तो युवक शराब के असर में आकर हुड़दंग करते हैं. लेकिन भारत में ऐसा उन्होंने नहीं देखा.

उन्हें पूरा ज्ञान था कि भारतीय जनता पार्टी विपक्षी दल है, कांग्रेस सत्ता दल. टॉड ने ये भी बताया कि प्रदर्शनकारियों की भीड़ में दोनों दलों की ओर झुकाव रखने वाले लोग शामिल हैं.

उनकी इतनी सामाजिक-राजनीतिक समझ देकर मैने उनसे पूछा कि क्या अमरीका में जहाँ वे रहते हैं भ्रष्टाचार कोई मुद्दा है ? उन्होंने तपाक से जवाब दिया...अमरीका लंबे समय से सपन्न रहा है, लोगों को लगता है कि सब कुछ ठीक है. लेकिन ऐसा नहीं है. मुझे लगता है कि जो दृश्य आज मैं भारत में देख रहा हूँ अगले 15-20 साल में यही दृश्य अमरीका में होंगे. हम बहुत बुरे समय से गुज़रने वाले हैं.

कहते-कहते टॉड एक फिर अपना कैमरा उठा फ़ोटोग्राफ़ी में लग गए और मैने उनसे विदा ले ली.

यूँ तो ये भारत में आए एक परदेसी की टिप्पणी भर थी पर अन्ना को लेकर भारत में चली इस लहर के बीच टॉड से मिलने के बहाने एक ऐसे व्यक्ति का रुख़ जानने का मौका मिला जो बाहर का होकर भी अंदर की बात बता सका.... बात कुछ परदेस की और कुछ उसके अपने देस की.

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