जनलोकपाल पास होने तक अनशन: अन्ना

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रामलीला मैदान में अपना अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे ने कहा है कि अगर संसद के मौजूदा सत्र में जनलोकपाल विधेयक पेश नहीं किया, तो अनशन जारी रहेगा.

शुक्रवार को तिहाड़ जेल से रामलीला मैदान पहुँचे अन्ना हज़ारे ने पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा कि सरकार गूंगी-बहरी हो गई है और इसी कारण उन्होंने अभी तक जनलोकपाल विधेयक पर ध्यान नहीं दिया.

अन्ना हज़ारे ने कहा कि सरकार संसद और स्थायी समिति में बहुमत में है. लेकिन उन्होंने अपना आख़िरी निर्णय ले लिया है.

उन्होंने कहा, "मैंने आख़िरी निर्णय ले लिया है. अगर इस सत्र में पेश नहीं हुआ, तो अनशन जारी रहेगा. जब तक शरीर में प्राण है, ये अनशन जारी है. दिल दिया है जान भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए. पीछे हटेंगे नहीं, पीछे हटने का सवाल ही नहीं है. सरकार को क्या करना है, उस पर कुछ नहीं कहना."

अन्ना हज़ारे ने कहा कि वे तो अभी जनसंसद के सामने आए हैं, जनसंसद को वे अपील करते हैं. सरकार ने 30 अगस्त तक बिल पास नहीं किया, तो वे देशभर के लोगों से अपील करते हैं कि लोग जेल भरें.

इस संवाददाता सम्मेलन में अन्ना हज़ारे के सहयोगी अरविंद केजरीवाल और प्रशांत भूषण भी मौजूद थे.

अरविंद केजरीवाल ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि सरकार अन्ना हज़ारे से नहीं बल्कि लोगों से घबराई है.

उन्होंने कहा कि ग़ैर सरकारी संगठनों के लोकपाल के दायरे में लाने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन लोकपाल का दायरा इतना नहीं बढ़ा देना चाहिए, जिससे समस्या पैदा हो.

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि एनजीओ के लिए पहले से कई क़ानून मौजूद हैं.

रामलीला पहुँचे अन्ना हज़ारे

तिहाड़ जेल में तीन दिन बिताने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे लोगों की भारी भीड़, नारेबाज़ी और देशभक्ति के गीत के बीच रामलीला मैदान पहुँचे.

दिल्ली पुलिस ने अन्ना हज़ारे को रामलीला मैदान में 15 दिनों के अनशन की अनुमति दी है. लेकिन बारिश के बीच लोगों की भारी भीड़ को संबोधित करते हुए अन्ना हज़ारे ने कहा कि जब तक लोकपाल बिल नहीं आएगा, वे मैदान नहीं छोड़ेंगे.

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उन्होंने लोगों का भारी समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया और युवकों को बधाई दी.

अन्ना ने कहा, "भारत में नई क्रांति करनी है. दुनियाभर में जहाँ भी क्रांति हुई है, रक्तरंजित हुई है. जनता को तकलीफ़ देकर हुई है. संपत्ति का नुक़सान हुआ है. लेकिन आपकी क्रांति की मिसाल पूरी दुनिया लेगी. अहिंसा से क्रांति कैसे होती है, ये भारत के युवकों ने दिखाई है."

उन्होंने कहा कि संघर्ष की मशाल बुझनी नहीं चाहिए, अन्ना रहें या न रहें. लोगों की नारेबाज़ी और तालियों के बीच अन्ना ने कहा कि देश का उज्ज्वल भविष्य दूर नहीं है. उन्होंने कहा, "हम अच्छा भविष्य देकर रहेंगे. जिन गद्दारों ने देख को लूटा है, हम उन्हें बर्दाश्त नहीं कर सकते."

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'मैं रहूँ या न रहूँ'

इससे पहले क़रीब 11.30 बजे अन्ना हज़ारे तिहाड़ जेल से बाहर आए. सुबह से ही लोगों की भारी भीड़ तिहाड़ जेल के बाहर अन्ना हज़ारे का स्वागत करने के लिए बाहर खड़ी थी.

तस्वीरें: अन्ना पहुँचे रामलीला मैदान

जैसे ही अन्ना हज़ारे जेल से बाहर आए, लोगों ने तालियाँ पीटकर उनका स्वागत किया. शोर-शराबा इतना था कि किसी को कुछ सुनाई नहीं दे रहा था.

जेल के बाहर बने एक छोटे से मंच से अन्ना ने लोगों का अभिवादन किया और समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया.

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उन्होंने कहा, "हमने वर्ष 1947 में आज़ादी पाई है, लेकिन स्वतंत्रता का दूसरा आंदोलन 16 अगस्त से शुरू हुआ है. एक क्रांति की शुरुआत हुई है. मैं रहूँ ना रहूँ, भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ संघर्ष जारी रहेगा."

तिहाड़ से मायापुरी होते हुए अन्ना हज़ारे राजघाट पहुँचे. रास्ते में सड़कों के किनारे लोगों की भारी भीड़ मौजूद थी, जिन्होंने अन्ना हज़ारे पर फूलों की बारिश की. इस बीच बारिश भी तेज़ हुई लेकिन लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई.

राजघाट पहुँच अन्ना हज़ारे ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी. अपना अनशन शुरू से पहले भी 15 अगस्त को अन्ना हज़ारे राजघाट गए थे और प्रार्थना की थी.

अन्ना हज़ारे सरकारी लोकपाल विधेयक का विरोध कर रहे हैं और वे चाहते हैं कि उनकी टीम की ओर से तैयार जनलोकपाल विधेयक को संसद में पेश किया जाए.

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