संघ और भाजपा मेरे पीछे नहीं है: अन्ना

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Image caption नागरिक समाज के कुछ और लोग भी अपना लोकपाल बिल लेकर सामने आए हैं.

भ्रष्टाचार से निपटने के लिए एक मज़बूत लोकपाल की मांग को लेकर दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे ने कहा है कि उनके आंदोलन के पीछे भारतीय जनता पार्टी या राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ का हाथ नहीं है.

अन्ना हज़ारे ने उनके आंदोलन के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े होने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके विरोधी कल को उनके रिश्ते पाकिस्तान से बताने से भी गुरेज नहीं करेंगे.

अपने अनशन के पांचवें दिन रामलीला मैदान पर जब हज़ारे से उनके आंदोलन को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से समर्थन प्राप्त होने के आरोपों के बारे में पूछा गया तो अन्ना हज़ारे ने कटाक्ष करते हुए कहा, 'जो लोग हमारे आंदोलन को भाजपा या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का आंदोलन कह रहे हैं, उन्हें पागलख़ाने में भेज देना चाहिए. उन्होंने हमारा नाम अमरीका से भी जोड़ा था. कल को वे यह तक कह देंगे कि हमारे आंदोलन में पाकिस्तान का हाथ है.'

'साज़िश'

ग़ौरतलब है कि सत्ताधारी कांग्रेस और कुछ दूसरे नेता कहते रहें हैं कि अन्ना हज़ारे का आंदोलन भाजपा और संघ समर्थित आंदोलन है.

कई नेता तो इसे पिछले दरवाज़े से सत्ता हासिल करने की भाजपा की साजिश कहते हैं. अन्ना की गिरफ़्तारी के बाद संसद में प्रधानमंत्री के बयान के बाद हुई बहस में भी कई नेताओं ने इस तरह की बात कही थी.

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Image caption इस बीच रामलीला मैदान में अन्ना के समर्थकों की तादाद बढ़ती जा रही है.

इसी बहस के दौरान क़ानून मंत्री सलमान ख़ुर्शीद ने कहा था कि जेपी आंदोलन और फिर पूर्व प्रधानमंत्री वी पी सिंह के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से भ्रष्टाचार तो ख़त्म नहीं हुआ लेकिन सांप्रदायिक शक्तियों ने इसका ख़ूब लाभ उठाया.

इसी क्रम में कांग्रेस के नए-नए प्रवक्ता बने राशिद अलवी ने सवाल उठाया था कि अन्ना हज़ारे के आंदोलन में अमरीका इतनी इच्छा क्यों दिखा रहा है.

शनिवार को ही टीम अन्ना के एक अहम सदस्य अरविंद केजरीवाल और किरण बेदी ने संसद की स्थाई समिति पर हमला लिया.

केजरीवाल ने कहा, 'स्थाई समिति के समक्ष अपने विचार रखने के दौरान हमने अनुरोध किया था कि वह विधेयक को ख़ारिज कर वापस भेज दें. इस स्थाई समिति में लालू यादव और अमर सिंह जैसे लोग हैं. क्या वे हमारे देश को सशक्त क़ानून दे पाएंगे?'

केजरीवाल ने कहा, 'स्थाई समिति ने विज्ञापन प्रकाशित कर जनता और संगठनों से सुझाव मांगे हैं. लेकिन विज्ञापन में उसने हमारे जनलोकपाल विधेयक का ज़िक्र नहीं किया है. क्या विचार-विमर्श की यह क़वायद दिखावाभर नहीं रह जाएगी.'

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