नौ दल सरकारी लोकपाल बिल के ख़िलाफ़

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लोकपाल बिल पर बढ़ते दबाव के बीच विपक्षी दलों ने भी सरकार के लिए मुश्किलें बढ़ाने के संकेत दे दिए हैं.

वामपंथियों सहित नौ विपक्षी दलों ने लोकपाल बिल के सरकारी मसौदे को ‘कमज़ोर’ क़रार देते हुए कहा है कि 23 अगस्त को वो बिल के विरोध में देशव्यापी प्रदर्शन करेंगे.

सभी नौ विपक्षी दलों ने एनडीए की ओर से 23 अगस्त को भारत बंद की घोषणा को नकारते हुए इस दिन प्रदर्शन करने की बात कही है.

इस बीच इस मुद्दे पर अपने बचाव की कार्रवाई के रुप में लोकपाल के मुद्दे पर बनाई गई संसद की स्थाई समिति ने आम लोगों और नागरिक संगठनों से इस बिल पर अपनी निष्पक्ष राय ज़ाहिर करने को कहा है.

राय देने की अपील

स्थाई समिति की ओर से प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित विज्ञापनों में समिति के अध्यक्ष अभिषेक मनु सिंघवी ने आम लोगों से 15 दिन के भीतर इस बिल पर अपनी राय देने की अपील की है.

जनलोकपाल पास होने तक अनशन: अन्ना

सरकार के इस न्योते पर अपनी प्रतिक्रिया ज़ाहिर करते हुए टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल ने कहा, ''लोगों से राय मांगकर सरकार इस मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है. इस बिल में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं.''

जन लोकपाल बिल पर टीम अन्ना को बढ़ते समर्थन का ज़िक्र करते हुए बीबीसी से खास बातचीत में टीम अन्ना की सदस्य और पूर्व आईपीएस अफ़सर किरण बेदी ने कहा, ''चंद्रबाबू नायडू ने खासतौर पर मुझे फ़ोन करके कहा है कि नौ विपक्षी दलों ने संसद में प्रस्ताव पारित कर सरकार की ओर से संसद में पेश किए गए लोकपाल बिल के मसौदे को वापस लेने की बात कही है.''

किरण बेदी ने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी ने इस मामले में अपना समर्थन नहीं दिखाया है.

विपक्षी दलों का कहना है कि इन प्रदर्शनों का मकसद सरकार के समाने एक मज़बूत लोकपाल क़ानून बनाने की मांग रखना है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक अन्ना के अनशन के दूसरे दिन वामपंथी दलों सहित विपक्षी पार्टियों ने नागरिक संगठनों के सुर में सुर मिलाते हुए संसद में पेश किए गए लोकपास बिल को वापस लेने की मांग की.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, तेलुगु देसम पार्टी और जनता दल सेक्यूलर सहित अन्य दलों ने इस बाबत एकमत होकर अन्ना हज़ारे का समर्थन करने का फैसला किया है.

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