'सामूहिक क़ब्रों में 2156 बेनाम दफ़न'

तस्लीम
Image caption तस्लीम के शौहर की लाश एक गांदेरबल में गुमनाम 'चरमपंथी ' कहकर दफ़ना दी गई थी.

भारत-प्रशासित कश्मीर में राज्य मानवधिकार कमीशन ने कहा है कि घाटी में 38 स्थानों पर 2156 लोग सामूहिक क़ब्रों में दफ़न हैं.

पिछले 21 सालों में ये पहली बार है जब मानवधिकार संस्था ने सामूहिक कब्रों की मौजूदगी को स्वीकार किया है.

तस्लीम कश्मीर की उन सैकड़ों औरतों में से हैं जिनके पति या बेटे लापता हो गए हैं. पिछले छह साल से इंसाफ़ के लिए जंग लड़ रही 27 साल की तस्लीम मानती हैं कि अब इंसाफ़ मिलने में देर नहीं लगनी चाहिए.

साल 2007 में तस्लीम के शौहर नज़री अहमद की लाश ज़िला गांदरबल की एक गुमनाम कब्र से बरामद हुई थी.

आरोप है कि दक्षिणी कश्मीर के ज़िले कोकरनाग के रहने वाले नज़ीर अहमद को पुलिस के कथित तौर पर स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने फ़रवरी 2006 को श्रीनगर से अग़वा करवाया और गांदरबल में उन्हें एक फ़र्जी़ मूठभेड़ में मारकर पाकिस्तान चरमपंथी के तौर पर गांदरबल में दफ़न कर दिया.

सवाल

अब सवाल ये उठ रहा है कि सामूहिक क़ब्रों में गाड़ी हुई उन 2156 लाशों की शिनाख़्त कैसे की जाए?

मानवधिकार आयोग के प्रमुख सेवानिवृत्त न्यायाधीश बशीर अहमद ने बीबीसी को बताया कि रिपोर्ट अभी हुकूमत के सामने पेश नहीं की गई है लेकिन फिर भी वो कोशिश करेंगे कि सरकार को इस मामले में जवाबदेह बनाया जाए.

उन्होंने कहा, "हम काफ़ी लंबी जांच पड़ताल के बाद कुछ तय कर पाए हैं. अब मसला शिनाख़्त का है. हमें उम्मीद है कि हम इंसाफ़ दिलाने में कामयाब हो जाएंगे."

साल 2008 में मानवधिकार के लिए काम करनेवाले संगठनों ने एक रिपोर्ट जारी कर कहा था कि उत्तरी कश्मीर में ऐसी दर्जनों सामूहिक क़ब्रे हैं जिनमें 2800 लोग दफ़न है.

जब नज़ीर अहमद मूठभेड़ की बात सामने आई थी तो सरकार ने चार अफ़सरों और कई को गिरफ़तार किया गया था. अब मामला अदालत में है.

स्थानीय मानवधिकार संस्थाओं ने ताज़ा रिपोर्ट की सराहना की है लेकिन उन्हें डर है कि सरकार इस रिपोर्ट को भी ठंडे बस्ते में डाल देगी.

कश्मीर कोलिशन ऑफ़ सिविल सोसाइटी के ख़ुरर्म परवेज़ का कहना है कि अगर कमीशन की रिपोर्ट पर ध्यान नहीं दिया गया तो वो अदालत का दरवाज़ा खटखटाएंगे.

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