हल्के में न ले सरकार: केजरीवाल

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अन्ना हज़ारे के अनशन को सात दिन पूरे हो गए हैं.लेकिन दिन भर चली गहमागहमी के बाद भी अन्ना हज़ारे की टीम और सरकार के बीच गतिरोध बना हुआ है. दोनों पक्षों में सुलहों की कोशिशों को लेकर अटकलों का बाज़ार दिन भर गर्म रहा. पर अन्ना के सहयोगी अरविंद केजरीवाल ने स्पष्ट कर दिया है कि स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है.

उन्होंने कहा, “हमारे रुख़ में कोई बदलाव नहीं है. अन्ना जी ने कहा है कि सरकार या तो अपने बिल को बदले या फिर जनलोकपाल बिल को पेश करे. हमारा मकसद सरकार को गिराना नहीं है पर क्या हम सरकार को भ्रष्टाचार करने के लिए खुला छोड़ सकते हैं. सरकार जनलोकपाल बिल की माँग को हल्के में न ले.?”

इस बीच विभिन्न शहरों में सोमवार को कई जगह लोगों ने अपने-अपने सांसदों और नेताओं के घरों के सामने प्रदर्शन किए जिनमें शीला दीक्षित, कपिल सिब्बल और मुख्तार अब्बास नक़्वी जैसे नेता शामिल हैं.

'संयम और समय चाहिए'

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कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा है कि ये प्रदर्शन कोई बड़ा मुद्दा नहीं है. हालांकि लोकपाल के मसले पर उनके सुर थोड़े नरम थे. अब वे संयम और लचीलेपन की बात कर रहे हैं.

अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “ ऐसा हल आसानी से निकाला जा सकता है जो सबको कुबूल हो और देश के हित में हो. इसके लिए कोई बड़ी शर्तें नहीं हैं. ज़रूरी है सब संयम का परिचय दें, लचीलापन दिखाएँ और विशेष रूप से ये कि और समय चाहिए होगा. अगर ये तीन चीज़ें हो तो निकट भविष्य में माकूल हल निकल सकता है.”

उधर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि अगर भ्रष्टाचार से छुटकारा पाना है तो केवल लोकपाल काफ़ी नहीं बल्कि न्यायिक सुधार और सरकारी तंत्र में बदलाव ज़रूरी है.

उनका कहना था, “हमें अपनी मौजूदा सरकारी प्रक्रियाएँ व्यापक स्तर पर बदलने की ज़रूरत है ताकि व्यवस्था में पारदर्शिता आ सके. इसके अलावा समय पर न्यायिक फ़ैसले आने से भी भ्रष्टाचार मिटाने में मदद मिलेगी.”

इस खींचतान के बीच अन्ना हज़ारे अपने रुख़ और माँगों पर अड़े हुए हैं. दिल्ली के रामलीला मैदान पर रविवार की ही तरह सोमवार को भी जनसैलाब उमड़ा हुआ है.

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