हिट है अन्ना की रसोई

  • 23 अगस्त 2011
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अन्ना हज़ारे भले ही अन्न त्यागकर पिछले आठ दिनों से अनशन पर बैठे हुए हैं, लेकिन दिल्ली के रामलीला मैदान पर आ रहे उनके हज़ारों समर्थकों के लिए वहाँ अन्न का पूरा इंतज़ाम है.

रामलीला मैदान में यूँ तो लोगों का सैलाब है लेकिन दो ख़ास जगहों पर सबसे ज़्यादा भीड़ है. एक तो मैदान पर बनाई गई ‘अन्ना की रसोई’ और दूसरे वो काउंटर जहाँ अन्ना टोपियाँ और टीशर्ट बिक रहे हैं.

रामलीला मैदान पर अन्ना के समर्थक दिल्ली से ही नहीं बल्कि दिल्ली के बाहर से भी आए हैं. कुछ लोगों ने तो पिछले कई दिनों से डेरा जमाया हुआ है.

कहा जाता है कि भूखे पेट न भजन गोपाला ...इसीलिए लोगों के लिए मैदान पर जगह-जगह लगी हैं ‘अन्ना की रसोई’. कई छोटे-बड़े समूह अपने-अपने स्तर पर लोगों की भूख मिटाने के लिए रसोईघर चला रहे हैं. यहाँ दाल-भात से लेकर पूरी-सब्ज़ी सब मिल रहा है..

कारवाँ बनता गया

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कईयों ने तो एक-दो व्यक्तियों के समूह से खाना बनाने का काम शुरु किया था और देखते-देखते और लोग उनसे जुड़ते रहे....यानी लोग जुड़ते गए और कारवां बनता गया. वेल्कम समूह नाम के प्रमुख बताते हैं कि वो पिछले कई दिनों से लोगों को खाना-परोसने का काम रहे हैं.

कहने की ज़रूरत नहीं है कि इन रसोईघरों के सामने अच्छी ख़ासी क़तारें लगी रहती हैं. थके-हारे लोग यहाँ खाना खाकर ऊर्जा जुटाते हैं ताकि फिर से अन्ना के संग जुट जाएँ.

जो लोग रसोई का इंतज़ाम नहीं कर सकते वो अन्य तरीकों से मदद कर रहे हैं.एक जनाब अपनी बड़ी से गाड़ी लेकर गेट के बाहर आए, गाड़ी में केले ही केले भरे थे. आते-जाते सभी लोगों को वे केले बाँटते रहे.

प्यास लगी हो तो पानी की थैलियाँ बाँटते लोग भी मौजूद हैं.

बच्चे-बूढ़े सब इसमें हाथ बंटा रहे हैं.. कोई चावल का बोरा दे जाता है, कोई आटे का तो कई तेल-घी का...बस हिदायत ये है कि अन्ना की रसोई का स्वाद ज़रूर चखिए पर जितनी ज़रूरत है उतना ही खाना लीजिए.

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