'एक भी गोली नहीं चली, प्रशिक्षण पूरा'

  • 24 अगस्त 2011
छत्तीसगढ़ (फ़ाईल फ़ोटो)
Image caption माओवादी छत्तीसगढ़ में सेना के प्रशिक्षण केंद्र खोले जाने का विरोध कर रहे थे

थल सेना ने छत्तीसगढ़ के नारायणपुर ज़िले में स्थित अबूझ माड़ के जंगलों में अपने प्रशिक्षण का पहला चरण पूरा कर लिया है.

पिछले दो महीनों से सेना की एक ब्रिगेड इन जंगलों में छापामार युद्ध का प्रशिक्षण ले रही थी. प्रशिक्षण में लगे सेना के अधिकारी और जवान मध्य कमांड के हैं और पूरी ब्रिगेड प्रशिक्षण के बाद सोमवार को वापस चली गई.

इस संबंध में सेना ने एक बयान जारी कर कहा है कि अपने उद्देश्यों को सफलतापूर्वक हासिल करने के बाद अब बस्तर में प्रशिक्षण के लिए आई ब्रिगेड वापस चली गई है.

माओवादी छत्तीसगढ़ में सेना की तैनाती का विरोध करते आ रहे हैं. उनका आरोप रहा है कि प्रशिक्षण केंद्र खोलने के बहाने सरकार जनता के ख़िलाफ़ सेना को उतार रही है.

मगर सेना ने पहले ही स्पष्ट किया है कि वह बस्तर में किसी नक्सल विरोधी अभियान में हिस्सा लेने नहीं बल्कि अपना प्रशिक्षण के लिए आई है.

सेना

सेना के लखनऊ स्थित मध्य कमान के मुख्यालय से सेना की एक 'कॉलम' यानी टुकड़ी जून महीने में छत्तीसगढ़ पहुँची थी. इस टुकड़ी में हज़ार से ज़्यादा जवान और अधिकारी थे.

मंगलवार को जारी किए गए बयान में कहा गया है कि प्रशिक्षण के दौरान सेना नें नारायणपुर के लोगों के बीच अपनी अच्छी छाप छोड़ी है.

बयान के अनुसार, "जिस जगह प्रशिक्षण दिया जा रहा था उसके आस-पास के गावों में सेना ने चिकित्सा सेवा मुहैय्या कराई है और पीने के पानी के लिए वहां चापा नल और बोरवेल भी लगाए."

इतना ही नहीं सेना का कहना है कि उन्होंने नारायणपुर के गावों में वहां के युवकों को सेना में भर्ती होने के तौर तरीक़ों के बारे में प्रशिक्षित भी किया है.

बयान में कहा गया है, " ना गोलियां चलीं, ना पेड़ कटे, ना विस्थापन हुआ. सेना ने यह सुनिश्चित भी किया है कि प्रशिक्षण के दौरान कुछ समय के लिए जो ढाँचे खड़े किए गए थे वह भी जाने से पहले हटा लिए गए हैं. सेना ने छत्तीसगढ़ में अपनी मौजूदगी के दौरान अपने आचरण से एक आदर्श प्रस्तुत किया है."

सेना का कहना है कि उनके प्रशिक्षण के दौरान किसी स्थानीय निवासी को कोई परेशानी नहीं हुई और माओवादियों का आरोप बेबुनियाद साबित हुआ है.

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