'इसी सत्र में जनलोकपाल बिल पेश हो'

  • 23 अगस्त 2011
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Image caption प्रणब मुखर्जी एक बार फिर सरकार के संकट मोचक की तरह सामने आए हैं

अन्ना हज़ारे के एक अहम सहयोगी अरविदं केजरीवाल ने कहा है कि संसद के इसी सत्र में जनलोकपाल बिल पारित होना चाहिए. अरविदं केजरीवाल के मुताबिक़ टीम अन्ना ने जनलोकपाल बिल को स्थाई समिति के सामने भेजने की सरकार की पेशकश को भी ख़ारिज कर दिया है.

इस मुद्दे पर बातचीत के लिए सरकार की तरफ़ से नियुक्त किए गए वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से मुलाक़ात के बाद अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अभी भी तीन मुद्दों पर सरकार और टीम अन्ना के बीच असहमति बनी हुई हैं.

केजरीवाल ने कहा कि टीम अन्ना की मांग है कि सरकार या तो अपने लोकपाल बिल को स्थाई समिति से वापस ले या उसे इसी तरह गुज़र जाने दे.

केजरीवाल के मुताबिक़ सरकार जनलोकपाल मसौदे को क़ानून मंत्रालय के पास भेजेगी और उसमें कुछ बदलाव करके उसे टीम अन्ना के पास दोबारा भेजा जाएगा. उसके बाद अगर टीम अन्ना को उन बदलावों पर कोई आपत्ति नहीं हुई तो उसे संसद के इसी सत्र में पेश किया जाएगा. केजरीवाल ने ये भी कहा कि सरकार को ये विश्वास दिलाना होगा कि वो संसद में इस बिल का समर्थन करेगी.

अन्ना हज़ारे के एक और सहयोगी प्रशांत भूषण ने कहा कि प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने के मुद्दे पर सरकार को कोई आपत्ति नहीं है.

प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार सीबीआई के भ्रष्टाचार निरोधक यूनिट और सीवीसी को भी लोकपाल के दायरे में लाने के लिए तैयार हो गई है.

'तीन मुद्दे'

लेकिन अरविंद केजरीवाल के मुताबिक़ अभी भी तीन मुख्य मुद्दों पर सरकार और टीम अन्ना में मतभेद बने हुए हैं.

केजरीवाल के अनुसार निचले रैंक के सरकारी अधिकारियों को लोकपाल के दायरे में लाने के जनलोकपाल की सिफ़ारिश को सरकार ने मानने से इनकार कर दिया है.

लेकिन केंद्र में लोकपाल के अलावा राज्यों में लोकायुक्त के गठन की टीम अन्ना की सिफ़ारिश पर सरकार ने विचार करने को कहा है.

इसके अलावा हर विभाग में नागरिकों के चार्टर बनाए जाने की मांग पर भी सरकार ने विचार करने को कहा है.

केजरीवाल के अनुसार न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे में लाने की मांग को लेकर सरकार ने कहा है कि वो इसके लिए एक दूसरा क़ानून बना रही है. इस मामले में टीम अन्ना की मांग है कि न्यायपालिका से संबंधित का़नून और लोकपाल का़नून साथ-साथ बनने चाहिए.

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Image caption टीम अन्ना के सदस्य उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता ज़ाहिर कर रहे हैं

इससे पहले मंगलवार शाम को सरकार और टीम अन्ना के बीच लगभग दो घंटे तक बातचीत हुई.

दोनों पक्षों ने बातचीत को सकारात्मक बताते हुए आगे बातचीत जारी रखने का फ़ैसला किया है.

सरकार की तरफ़ से बातचीत के लिए वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी नियुक्त किए गए थे और उनके साथ क़ानून मंत्री सलमान ख़ुर्शीद और दिल्ली से लोकसभा सांसद संदीप दीक्षित भी शामिल थे.

अन्ना हज़ारे की तरफ़ से अरविदं केजरीवाल, किरण बेदी और प्रशांत भूषण बैठक में शामिल हुए.

बातचीत के बाद प्रणब मुखर्जी ने एक छोटा से लिखित बयान मीडिया के सामने पढ़ा.

प्रणब मुखर्जी ने अन्ना हज़ार से अनशन ख़त्म करने की अपील करते हुए कहा, ''टीम अन्ना से बातचीत जारी रहेगी. इस बारे में कल यानि बुधवार को सर्वदलीय बैठक में चर्चा होगी. मुझे आशा है कि हमलोग इस समस्या का समाधान ढूंढ लेंगे.''

इससे पहले अन्ना हज़ारे के अनशन के आठवें दिन मंगलवार दोपहर को आख़िरकार सरकार ने लोकपाल विधेयक पर अन्ना हज़ारे की टीम को बातचीत के लिए औपचारिक न्यौता दिया. सरकार ने इसके लिए ज़्यादातर मामले में केंद्र सरकार के संकटमोचक रहे प्रणब मुखर्जी को नियुक्त किया.

टीम अन्ना ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और अन्ना हज़ारे ने अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी और प्रशांत भूषण को बातचीत के लिए अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया.

इसी बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार शाम को अन्ना हज़ारे को लिखे एक पत्र में उनसे अनशन ख़त्म करने की अपील की.

प्रधानमंत्री का पत्र

उन्होंने कहा कि अगर लोकसभा अध्यक्ष ने अनुमति दी तो वे जनलोकपाल विधेयक को संसद की स्थाई समिति के समक्ष पेश करने के लिए तैयार हैं.

बातचीत का फ़ैसला

मंगलवार को दिनभर बातचीत का दौर जारी रहा.

मंगलवार को दोपहर में सरकार की ओर से बुलावे के बाद टीम अन्ना के दो मुख्य सदस्य अरविंद केजरीवाल और अखिल गोगोई ने क़ानून मंत्री सलमान ख़ुर्शीद से मुलाक़ात की थी.

सलमान ख़ुर्शीद के अनुसार दिल्ली के सांसदों में से एक संदीप दीक्षित के निवास पर दोनों की मुलाक़ात हुई.

इसी मुलाक़त में सलमान ख़ुर्शीद ने बताया कि प्रधानमंत्री ने प्रणब मुखर्जी को सरकार की ओर से बातचीत के लिए प्रतिनिधि नियुक्त कर दिया है.

टीम के एक अन्य सदस्य संतोष हेगड़े ने एक टेलीविज़न चैनल से हुई बातचीत में कहा कि सरकार के इस क़दम के बाद अन्ना हज़ारे को अपना अनशन ख़त्म कर देना चाहिए और आंदोलन जारी रखना चाहिए.

हालांकि अन्ना हज़ारे ने सोमवार को कहा था वे या तो प्रधानमंत्री से बात करेंगे या फिर राहुल गांधी से लेकिन टीम अन्ना ने प्रणब मुखर्जी के नाम को स्वीकार कर लिया.

हालांकि सरकार ने आध्यात्मिक नेता भय्यूजी महाराज और महाराष्ट्र के अधिकारी यूसी सारंगी के ज़रिए बातचीत का सिलसिला शुरु किया था लेकिन टीम अन्ना ने कहा था कि वे अधिकृत रुप से नियुक्त प्रतिनिधि से ही बातचीत करेंगे.

इससे पहले सरकार अन्ना हज़ारे की मांगों को अव्यवहारिक बताती रही है. यहाँ तक कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लालक़िले से 15 अगस्त को दिए अपने भाषण में अनशन को ग़लत बताया था.

सरकार की ओर से कहा जाता रहा है कि यदि अन्ना हज़ारे और उनके सहयोगियों को अपनी बात रखनी है तो संसद की स्थाई समिति के सामने रखना चाहिए, जो विधेयक पर लोगों की राय ले रही है.

लेकिन पिछले आठ दिनों से देश भर में अन्ना हज़ारे को मिले व्यापक जनसमर्थन के बाद आख़िरकार सरकार ने टीम अन्ना से बातचीत का फ़ैसला किया.

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