'संसदीय प्रणाली से पारित हो लोकपाल'

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Image caption संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के अनुरोध पर भ्रष्टाचार पर विशेष बहस हुई.

संसद में भ्रष्टाचार पर विशेष चर्चा में सभी विपक्षी पार्टियों ने लोकपाल विधेयक को संसदीय प्रणाली से पारित करने का समर्थन किया है.

राज्य सभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा कि अन्ना हज़ारे भ्रष्टाचार के मुद्दे को सामने लाए हैं लेकिन संसद सर्वोपरि है और उसे अपनी ज़िम्मेदारी निभानी होगी.

जेटली ने कहा कि, "अन्ना हज़ारे के सहयोगियों के सुझाव तार्किक हैं और संसद को बिना जल्दबाज़ी किए, बातचीत के ज़रिए इस विधेयक को सोच-समझ कर लाना चाहिए".

जनता दल (युनाइटिड) के नेता शरद यादव ने भी कहा कि भ्रष्टाचार भारत में रच बस गया है और उसे कम करने के लिए विपक्ष को एकजुट होना होगा, तभी संसद में एक असरदार क़ानून बन पर बहस हो सकेगी.

उन्होंने कहा कि, "संविधान के दायरे में रहकर ही क़ानून बनाया जाना चाहिए फिर चाहे उसमें कितने ही कड़े प्रावधान रखे जाएं."

यादव ने कहा कि देश की परेशानिया क़ानून बनाने से ख़त्म नहीं हुई हैं, और क़ानून बनाने भी हों तो उसको लंबा समय देना होगा.

समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह यादव ने कहा कि, "लोकपाल विधेयक में दलितों, मुसलमानों और सभी पिछड़े वर्ग के लोगों की राय लेकर सभी दलों के साथ सहमति बनाना ज़रूरी है."

'विश्वास खो चुकी है सरकार'

मुलायम सिंह यादवं ने इस बात पर भी बल दिया कि क़ानून बनाना काफ़ी नहीं है क्योंकि ग़रीब लोगों के पास अच्छे वकील की सेवाएं लेने के साधन ही नहीं हैं. यादव ने महात्मा गांधी ग्रामीण विकास योजना और ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन समेत कई सरकारी योजनाओं में धांधली और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए.

सीपीएम नेता बासुदेब आचार्य ने कहा कि देश में भ्रष्टाचार और महंगाई और के लिए सरकार की ग़लत नीतिया ज़िम्मेदार हैं. उन्होंने कहा कि सरकार को एक प्रभावी लोकपाल क़ानून बनाने के अलावा न्यायपालिका में भी सुधार लाने होंगे.

अरुण जेटली ने कहा कि "सरकार विश्वसनीयता खो चुकी है, सरकारी तंत्र में ही नहीं बल्कि न्यायपालिका में भी कोई जवाबदेही नहीं है, सीबीआई भी भ्रष्ट है, उसके शपथ पत्र सत्ता में पार्टी बदलने से बदल जाते हैं."

लोक सभा में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ सांसद मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि पिछले कुछ सालों में कई घोटाले सामने आए हैं जैसे स्टैम्प पेपर घोटाला, हसन अली मामला, वोट के बदले नोट घोटाला, मधु कोड़ा से जुड़े आरोप, इसरो-देवास घोटाला, कॉमनवेल्थ खेल घोटाला, आदर्श सोसाइटी घोटाला और राडिया टेप्स विवाद.

उन्होंने कहा ये विडंबना ही है कि अलग-अलग घोटालों में मंत्रियों और सरकारी महकमे के अफसर ही जेल में बंद किए गए हैं. जोशी ने आरोप लगाया कि सरकार ने काले धन की जानकारी छुपाई ताकि कोई कार्रवाई ना करनी पड़े.

मुरली मनोहर जोशी ने अंतर्राष्ट्रीय संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेश्नल की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि कुल 178 देशों में भ्रष्टाचार के पैमाने पर भारत 87वें पायदान पर है.

सरकार की ओर से वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने कहा कि सांसदों और मंत्रियों के घरों के घेराव का ऐलान करना ग़लत है.

उन्होंने राज्य सभा में सभी सदस्यों से अपील की कि वे एकजुट हों ताकि दुनिया में ये संदेश जाए कि भारत का लोकतंत्र किसी भी संकट से निपट सकता है.

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