सर्वदलीय बैठक में नहीं निकला रास्ता

  • 24 अगस्त 2011
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लोकपाल विधेयक पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में अन्ना हज़ारे से अनशन तोड़ने की अपील की गई है. बैठक के बाद जारी सर्वदलीय प्रस्ताव में कहा गया है कि जनलोकपाल विधेयक पर भी विचार करना चाहिए.

ये बैठक ऐसे समय में हुई है, जब सरकारी लोकपाल विधेयक का विरोध कर रहे अन्ना हज़ारे का अनशन नौवें दिन भी जारी है.

इस बैठक में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि अन्ना हज़ारे की टीम के जनलोकपाल विधेयक को संसद की स्थायी समिति के पास भेज दिया गया है.

लेकिन अन्ना हज़ारे की टीम पहले ही ये स्पष्ट कर चुकी है कि वो जनलोकपाल विधेयक को स्थायी समिति के पास भेजने पर संतुष्ट नहीं है. सर्वदलीय बैठक के अपनी प्रतिक्रिया में अन्ना हज़ारे ने कहा कि उनकी लड़ाई जारी है.

जबकि अन्ना की टीम के अहम सदस्य अरविंद केजरीवाल ने कहा, "अगर प्रधानमंत्री को अन्ना हज़ारे के स्वास्थ्य की वाकई चिंता है तो संसद में जनलोकपाल विधेयक रख दीजिए, अन्ना जी अपना अनशन तोड़ देंगे. अगर अन्ना जी को कुछ होता है, तो इसके लिए सीधे-सीधे सरकार ज़िम्मेदार होगी."

प्रधानमंत्री के आवास पर हुई इस सर्वदलीय बैठक में अन्ना हज़ारे से अपना अनशन ख़त्म करने की अपील की गई है. सभी दलों ने इस पर सहमति जताई है कि संसदीय प्रक्रिया सर्वोच्च है.

प्रस्ताव

इस बैठक के बाद एक प्रस्ताव भी पारित किया गया है. बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री वी नारायणस्वामी ने कहा है कि स्थायी समिति जनलोकपाल विधेयक पर चर्चा करेगी.

इस प्रस्ताव में कहा गया है कि एक मज़बूत लोकपाल विधेयक बनना चाहिए और जनलोकपाल विधेयक पर भी विचार किया जाना चाहिए.

बैठक के बाद जारी प्रस्ताव में कहा गया है- सर्वदलीय बैठक में अन्ना हज़ारे से ये अनुरोध किया जा रहा है कि वे अपना अनशन ख़त्म करें. बैठक में ये भी राय बनी कि जनलोकपाल विधेयक पर भी विचार किया जाना चाहिए जिससे एक मज़बूत और प्रभावी लोकपाल तैयार हो सके, जिसे व्यापक राष्ट्रीय सहमति हासिल हो.

हालाँकि बैठक के बाद अलग-अलग पार्टियों ने पत्रकारों को अपने रुख़ से अवगत कराया. भारतीय जनता पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने कहा कि उन्होंने सरकार से लोकपाल विधेयक वापस लेने की अपील की थी.

लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि वे सर्वदलीय बैठक के नतीजे से ख़ुश नहीं है क्योंकि सरकारी लोकपाल को वापस लिए जाने पर सहमति नहीं बन पाई.

उन्होंने कहा, " सर्वदलीय बैठक में चर्चा की शुरुआत करते हुए हमारी ओर से कहा गया है कि बैठक के दो लक्ष्य होने चाहिए- देश में प्रभावी और सशक्त लोकपाल विधेयक पारित हो और अन्ना जी का अनशन तुड़वाया जाए. लेकिन असाधारण परिस्थितियों में नियमों में ढील देकर सरकार अपना विधेयक वापस ले, जनलोकपाल को देखते हुए एक सशक्त विधेयक पेश करे."

सुषमा स्वराज ने कहा कि सरकारी लोकपाल विधेयक को वापस लेने पर सहमति नहीं बनी और वे ख़ुश नहीं हैं.

माकपा के सीताराम येचुरी ने भी कहा कि उनकी पार्टी चाहती है कि सरकार पहले अपने विधेयक को वापस ले.

उन्होंने कहा, "हमारी मांग यही रही कि सरकार इस विधेयक को वापस ले. जनलोकपाल के कुछ प्रावधानों को शामिल किया जाए, बाक़ी लोगों के विचारों पर भी ध्यान देते हुए सरकार नया मसौदा लाए. इस सत्र में विधेयक पास नहीं हो पाएगा. ये संसदीय प्रक्रिया है. हमने कहा है कि ये मसौदा इसी सत्र में पेश किया जाए."

बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में असम गण परिषद के सांसद वीरेंद्र वैश्य ने कहा कि उनकी पार्टी एक मज़बूत लोकपाल के पक्ष में हैं.

अन्ना टीम की शर्त

बैठक की शुरुआत में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बैठक में शामिल नेताओं को सरकार के पक्ष की जानकारी दी और बताया कि अन्ना हज़ारे की टीम चाहती है कि सरकार अपना लोकपाल विधेयक वापस लेकर जनलोकपाल विधेयक को कुछ संशोधनों के साथ पेश करे.

प्रधानमंत्री ने बताया कि अन्ना की टीम ये चाहती है कि जनलोकपाल विधेयक को बिना स्थायी समिति को भेजे हुए ही संसद 30 अगस्त तक पास करे या ज़रूरत पड़ने पर अवधि आगे बढ़ाई जाए.

मनमोहन सिंह ने कहा कि उनकी सरकार एक मज़बूत लोकपाल विधेयक के पक्ष में है.

दूसरी ओर नौ दिनों से अनशन कर रहे अन्ना हज़ारे ने स्पष्ट किया है कि वे मांग पूरी होने तक अनशन नहीं ख़त्म करेंगे. उन्होंने कहा कि वे नौ दिन और अनशन कर सकते हैं.

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