लोकपाल के सभी मसौदों पर बहस

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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि सरकार ऐसे उपाय कर रही है जिससे जनलोकपाल बिल और लोकपाल से जुड़े अन्य मसौदों पर बहस हो सके.

प्रधानमंत्री ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बयान देते हुए कहा कि लोकपाल बिल पर कई सुझाव आए हैं और वो सभी पर विचार करना चाहते हैं.

उनका कहना था, '' अन्ना हज़ारे जी का एक लोकपाल है. सरकार का पक्ष है. अरुणा राय जी ने दिया है. जयप्रकाश नारायण जी का एक वर्ज़न है. संभवत हम सभी पर चर्चा करना चाहेंगे. बहस करना चाहेंगे और फिर जो सर्वमान्य हो, मज़बूत प्वाइंट आएं. हम चाहेंगे कि संसद में उन सभी मसौदों पर बहस हो जो लोगों ने रखे हैं. बहस हो. बहस के बाद उसे स्थायी समिति को भेज दिया जाए.''

प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद की स्थायी समिति लोकपाल मामले से जुड़े हर सुझाव और मसौदे पर विचार करने का अधिकार है और सरकार कोशिश करेगी कि स्थायी समिति जनलोकपाल के बिंदुओं पर भी विचार करे.

प्रधानमंत्री भ्रष्टाचार के मुद्दे पर संसद में बयान दे रहे थे और उन्होंने इस दौरान अन्ना से अनशन तोड़ने की भी अपील की.

अन्ना हज़ारे का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अन्ना जनलोकपाल लाना चाहते हैं और सरकार उनकी बात सुन रही है.

उन्होंने कहा, '' हमने अन्ना की टीम से बात की थी. कुछ मामलों पर सहमति नहीं बनी. फिर सरकार ने अपना बिल पेश किया जो स्थायी समिति के पास है. स्थायी समिति को हक है कि वो सभी विकल्पों पर विचार करे. हमारे पास उपाय है जिससे हम ये सुनिश्चित कर सकें कि जनलोकपाल के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा कर सकें. और भी सुझाव आए हैं. अरुणा राय जी का. जयप्रकाश गुट का एक बिल है. हम सभी सुझावों के लिए तैयार हैं.इन मुद्दों पर राष्ट्रीय सहमति बनाने की ज़रुरत है.''

प्रधानमंत्री का कहना था, ‘‘ मैं अन्ना को सैल्यूट करता हूं. वो भ्रष्टाचार को ख़त्म नहीं कर पाने को लेकर लोगों की नाराज़गी और गुस्से का प्रतीक बन चुके हैं. मैं उनका सम्मान करता हूं. हम सभी उनसे अपील करते हैं कि वो अपना अनशन तोड़ें. उन्होंने खुद को साबित कर दिया है. हम सशक्त लोकपाल लाना चाहते हैं. जनलोकपाल और इस तरह के जो भी सुझाव हैं. सब पर विचार कर रहे हैं. हम मज़बूत बिल लाएंगे.मैं समझता हूं कि अन्ना की टीम ये बात समझेगी.’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी ऐसे बिल पर राष्ट्रीय सहमति बनाने की ज़रुरत है. प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के अंत में एक बार फिर अपील की कि अन्ना ने अपनी बात रख दी है और हम सभी उनसे अपील करते हैं कि वो अपना अनशन खत्म करें क्योंकि देश को उनकी ज़रुरत है.

प्रधानमंत्री के बयान के बादसंसद ने अन्ना हज़ारे से आह्वान किया है कि उन्होंने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अपनी बात पूरी ताकत से रख दी है और अब उन्हें अपना अनशन ख़त्म करना चाहिए.

इस अपील का विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने भी पुरज़ोर समर्थन किया.

इसके बाद लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार ने पूरे सदन की तरफ से अपील की कि अन्ना हज़ारे अपना अनशन समाप्त करें क्योंकि सरकारर और सदन ने मज़बूत लोकपाल के लिए प्रतिबद्धता जताई है.

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के दौरान विपक्ष के आरोपों पर भावुक होते हुए कहा कि उन पर जो आरोप लगाए गए हैं, वो दुःखदायी है.

प्रधानमंत्री का कहना था, ‘‘ कल विपक्ष के नेता मुरली मनोहर जोशी ने जोशीला भाषण दिया और मुझ पर व्यक्तिगत हमले किए कि मैं भ्रष्टाचार की मिसाल हूं. ये दुखद आरोप हैं. मैंने संसद में कभी ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं किया. ये जगह आरोप प्रत्यारोप की नहीं है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘ मैं सात साल से प्रधानमंत्री हूं. हर आदमी ग़लती करता है. मैंने भी ग़लतियां की हैं लेकिन ये कहना कि मैं जानबूझकर भ्रष्टाचार में लिप्त हुआ हूं ये अत्यंत ग़लत होगा. विपक्ष की नेता हैं यहां. मैं उनसे कहता हूं कि वो ये देखें कि मैंने क्या संपत्ति जुटाई है. वो देख लें और फिर जो फ़ैसला करें मुझे मान्य होगा.’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि वो पीएसी या कोर्ट के समक्ष लंबित भ्रष्टाचार के मुद्दों पर टिप्पणी नहीं करना चाहेंगे लेकिन साफ है कि सरकार भ्रष्टाचार को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है.

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