ये है अन्ना की टीम..

अन्ना हज़ारे की टीम के प्रमुख चेहरों की अगर बात की जाए, तो इसमें पाँच नाम सबसे पहले उभरते हैं. वे हैं- अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी, प्रशांत भूषण, शांति भूषण और जस्टिस संतोष हेगड़े.

अरविंद केजरीवाल

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Image caption अन्ना टीम की ओर से अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी और प्रशांत भूषण सरकार से बात कर रहे हैं

1989 में आईआईटी खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक केजरीवाल का वर्ष 1992 में भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) में चयन हो गया और उन्हें दिल्ली में आयकर आयुक्त कार्यालय में नियुक्त किया गया.

वर्ष 2000 में उन्होंने सरकारी नौकरी से छुट्टी लेकर दिल्ली में एक संस्था 'परिवर्तन' की स्थापना की.

ये संस्था एक पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन को सुनिश्चित करने के लिए काम करती है. इसके बाद फरवरी 2006 में उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया और सिर्फ 'परिवर्तन' के लिए ही काम करने लगे.

प्रसिद्व सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय और कई अन्य लोगों के साथ मिलकर अरविंद केजरीवाल ने सूचना अधिकार अधिनियम के लिए अभियान शुरू किया, जो जल्द ही एक सामाजिक आंदोलन बन गया.

दिल्ली में सूचना अधिकार अधिनियम को 2001 में पारित किया गया और अंत में राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संसद ने 2005 में सूचना अधिकार अधिनियम (आरटीआई) को पारित कर दिया.

इसके बाद जुलाई 2006 में उन्होंने पूरे भारत में आरटीआई सूचना के अधिकार के बारे में जागरूकता फ़ैलाने के लिए एक अभियान शुरू किया.

भारत में सूचना अधिकार के आंदोलन में उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए के लिए वर्ष 2006 में उन्हें रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

डॉ. किरण बेदी

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Image caption भारतीय पुलिस सेवा की प्रथम महिला अधिकारी किरण बेदी जेल महानिरीक्षक भी रह चुकी हैं.

भारतीय पुलिस सेवा की प्रथम वरिष्ठ महिला अधिकारी रह चुकी हैं. वह संयुक्त आयुक्त पुलिस प्रशिक्षण तथा दिल्ली पुलिस स्पेशल आयुक्त (खुफिया) के पद पर कार्य कर चुकी हैं.

किरण बेदी दो स्वयं सेवी संस्था चलाती हैं नवज्योति और इंडिया विजन फाउंडेशन.

उन्होंने क़ानून की डिग्री के साथ-साथ ‘ड्रग एब्यूज एंड डोमेस्टिक वायलेंस’ विषय पर डॉक्टरेट की उपाधि भी हासिल की है.

किरण बेदी पुलिस महानिरीक्षक जेल भी रह चुकी हैं.

उन्हें पुलिस कार्यप्रणाली और तिहाड़ जेल सुधारों के लिए भी जाना जाता है. उन्हें भी रैमन मैग्सेसे पुरस्कार से नवाज़ा जा चुका है.

प्रशांत भूषण और शांति भूषण

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Image caption प्रशांत भूषण और उनके पिता शांति भूषण ने भ्रष्टाचार के कई मामले उजागर किए हैं.

प्रशांत भूषण और उनके पिता शांति भूषण ने भ्रष्टाचार के कई मामले उजागर किए हैं. शांति भूषण भारत के भूतपूर्व विधि मंत्री एवं वरिष्ट अधिवक्ता हैं. वे मोरारजी देसाई सरकार में मंत्री थे. वर्ष 2009 में उन्हें संसार के सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में 74 वें स्थान पर रखा गया था.

प्रशांत भूषण भ्रष्टाचार, विशेष रूप से न्यायपालिका के भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ पिछले दो दशक से लगातार लड़ाई लड़ रहे हैं.

लोकपाल बिल के लिए संयुक्त प्रारूप समिति की अधिसूचना जैसे ही जारी हुई उसके तुरंत बाद, भूषण परिवार से जुड़ी एक सीडी मीडिया में जारी कर दी गई .

इलाहाबाद में एक संपत्ति की ख़रीद के संबंध में स्टांप ड्यूटी चोरी करने के आरोप लगाए गए. नोएडा में आवंटित कृषि भूमि भूखंडों के संबंध में भी उन पर आरोप लगे.

जस्टिस संतोष हेगड़े

Image caption संतोष हेगडे हाल ही में कर्नाटक के लोकायुक्त भी थे.

संतोष हेगडे भारत के उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायधीश और महान्यायवादी रह चुके हैं.

वह कर्नाटक के लोकायुक्त भी थे.

हाल में ही उन्होंने कर्नाटक में अवैध खनन मामले पर जो रिपोर्ट बनाई उसमें उन्होंने मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को ज़िम्मेदार ठहराया.

इसके बाद येदियुरप्पा को अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था.

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