भाजपा चाहती है प्रस्तावों पर मतविभाजन

सुषमा स्वराज
Image caption सुषमा स्वराज ने आरोप लगाया है कि सरकार के अनिर्णय से ये स्थिति बनी है

लोकपाल के मुद्दे पर सरकार लगातार घिरती जा रही है. सरकार चाहती थी अन्ना हज़ारे के प्रस्तावों पर चर्चा करवा ली जाए और कोई मतविभाजन न हो लेकिन भाजपा ने कह दिया है कि संसद के दोनों सदनों में वह इन प्रस्तावों पर चर्चा के बाद मतविभाजन चाहती है.

लोकसभा में सुषमा स्वराज ने नियम 184 के तहत और राज्य सभा में अरुण जेटली ने नियम 168 के तहत लोकपाल पर चर्चा के बाद मत-विभाजन का नोटिस दिया है.

अरुण जेटली ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी चाहती है कि इन सभी मुद्दों पर संसद में चर्चा हो और सभी पार्टियां इन पर अपना मत साफ करें, जिसके बाद मत-विभाजन हो.

सुषमा स्वराज ने एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि अपने नोटिस में उनकी पार्टी ने साफ किया है, "प्रधानमंत्री, सभी सरकारी मुलाज़िम और संसद के बाहर सांसदों का आचरण लोकपाल के दायरे में हो, सरकारी सेवाएं ना देने पर नागरिकों की सुनवाई हो, राज्यों में भी लोकायुक्त बनाए जाएं और न्यायपालिका के लिए एक अलग आयोग का गठन किया जाए."

साथ ही सुषमा स्वराज ने आरोप लगाया कि सरकार इस मसले पर फ़ैसला ही नहीं ले पा रही थी लेकिन अचानक दोपहर को तय कर लिया गया कि धारा 193 के तहत चर्चा करवा ली जाए. इस धारा के तहत मत विभाजन नहीं होता.

कैसे होगी बहस?

वहीं संसदीय कार्यमंत्री पवन बंसल के मुताबिक लोकपाल पर चर्चा शुक्रवार के लिए तय नहीं की गई थी. लेकिन विपक्षी सांसदों द्वारा ज़ोर-शोर से ये मांग उठाए उठाने के बाद इस चर्चा को आज ही करने की बात मान ली गई थी और इसे दोपहर के लिए नियत किया गया, लेकिन दोपहर में भी ये बहस नहीं हो पाई क्योंकि विपक्ष के सासंद अध्यक्ष की आसंदी के पास आ गए.

पवन बंसल के मुताबिक ने संसद की कार्यवाही शुरु होने से पहले ही उन्होंने कहा था कि ये चर्चा आज संभव नहीं है.

लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने संसद में बताया था कि उन्हें लोकपाल के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने के लिए आठ सदस्यों की ओर से सूचनाएँ मिली हैं. इनमें से दो धारा 184 के तहत चर्चा के लिए हैं जबकि शेष धारा 193 के तहत चर्चा के लिए.

कांग्रेस के चार सदस्यों, जगदंबिका पाल, संदीप दीक्षित, विजय बहुगुणा और भक्त चरण दास ने धारा 193 के तहत चर्चा के लिए नोटिस दिया था.

इस नोटिस में अन्ना हज़ारे की अध्यक्षता में बनाए गए जन लोकपाल मसौदो के साथ-साथ अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं के द्वारा बनाए गए मसौदों पर भी चर्चा की मांग की गई है.

धारा 193 के तहत हुई बहस में मतविभाजन नहीं हो सकता और बहस के अंत में सदन के नेता की ओर से जवाब दिया जाता है.

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Image caption अन्ना हज़ारे ने कहा है कि उनके तीन मुद्दों पर सहमति बननी चाहिए

उल्लेखनीय है कि गुरुवार को सरकार की ओर से अन्ना हज़ारे को कथित रुप से आश्वासन दिया गया था कि सरकार शुक्रवार को जन लोकपाल के उन तीन मुद्दों पर चर्चा करेगी.

सरकार के कहने पर उन्होंने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखकर ये आश्वासन दिया है कि अगर उनके तीन मुद्दों पर संसद में सहमति बनती है तो वे अपना अनशन ख़त्म करने को तैयार हैं.

अन्ना हज़ारे ने कहा है कि जनलोकपाल के तीन अहम मुद्दों पर संसद में प्रस्ताव लाना चाहिए, इसमें से एक यह है कि केंद्र और राज्य के सभी सरकारी कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लाना चाहिए, दूसरा राज्य के लोकायुक्तों को लोकपाल के तहत रखा जाना चाहिए, तीसरा सिटीज़न्स चार्टर लागू हो.

शुक्रवार को दोपहर में बहस संदीप दीक्षित के नोटिस पर तय की गई थी, लेकिन सरकार ने अब तक भारतीय जनता पार्टी के नोटिस के बाद ये तय नहीं किया है कि अब बहस किस नियम के तहत और कब होगी.

इस बीच अन्ना का अनशन ग्यारहवें दिन भी जारी है और प्रशांत भूषण की ओर से साफ़ कर दिया गया है कि अगर इन तीन मुद्दों पर सहमति बनती है तभी अन्ना अनशन ख़त्म करेंगे.

उन्होंने कहा है कि अगर ये प्रस्ताव पारित नहीं हुए तो अनशन ख़त्म करने न करने का फ़ैसला अन्ना हज़ारे ही करेंगे.