लोकपाल पर चर्चा को लेकर असमंजस

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लोकपाल विधेयक पर एक बार फिर असमंजस की स्थिति दिख रही है क्योंकि लोकसभा की कार्यसूची में लोकपाल पर चर्चा को शामिल नहीं किया गया है.

संसदीय कार्यमंत्री पवन बंसल ने संसद की कार्यवाही शुरु होने से पहले कहा है कि संसद की कार्यसूची में इसका ज़िक्र नहीं है.

अब से कुछ देर पहले ही लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने कहा है कि उन्हें लोकपाल के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने के लिए आठ सदस्यों की ओर से सूचनाएँ मिली हैं. इनमें से दो धारा 184 के तहत चर्चा के लिए हैं जबकि शेष धारा 193 के तहत चर्चा के लिए.

उन्होंने बताया कि कांग्रेस के चार सदस्यों, जगदंबिका पाल, संदीप दीक्षित, विजय बहुगुणा और भक्त चरण दास ने धारा 193 के तहत चर्चा के लिए नोटिस दी है.

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा है कि वे इस मसले पर अपना फ़ैसला शीघ्र ही देंगीं.

धारा 193 के तहत हुई बहस में मतविभाजन नहीं हो सकता और बहस के अंत में सदन के नेता की ओर से जवाब दिया जाता है. माना जा रहा है कि इस धारा के तहत बहस टीम अन्ना को मंज़ूर नहीं होगी क्योंकि वे धारा 184 के तहत बहस चाहते हैं जिससे कि बहस के अंत में मतविभाजन हो सके.

उल्लेखनीय है कि गुरुवार को सरकार की ओर से अन्ना हज़ारे को कथित रुप से आश्वासन दिया गया था कि सरकार शुक्रवार को जन लोकपाल के उन तीन मुद्दों पर चर्चा करेगी. हालांकि सरकार की ओर से कोई लिखित आश्वासन नहीं दिया गया था जैसा कि अन्ना हज़ारे की मांग थी.

भाजपा नेताओं से मिली टीम अन्ना

चर्चा है कि टीम अन्ना की भाजपा नेताओं से हुई मुलाक़ात से सरकार नाराज़ है और इसलिए उसने फ़िलहाल क़दम वापस खींच लिए हैं.

इस बीच अन्ना का अनशन ग्यारहवें दिन भी जारी है.

सहमति के संकेत

वैसे सरकार की ओर से किसी ने कोई बयान नहीं दिया था कि लेकिन सूत्रों के हवाले से समाचार एजेंसी ने कहा था कि सरकार लोकपाल के तीन मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है जिन पर गतिरोध बना हुआ है.

ये तीन मुद्दे अन्ना हज़ारे की ओर से रखे गए हैं, निचले स्तर के सरकारी अधिकारियों को लोकपाल के दायरे में लाना, राज्यों के लोकायुक्तों को लोकपाल के तहत लाना और सिटीज़न चार्टर है.

संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने इतना ही कहा था कि इस पर विचार हो रहा है.

अन्ना की तीन शर्तें

उन्होंने कहा था कि ये एक जटिल मामला है और इस पर सभी से विचार-विमर्श करना होगा.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने अपने सूत्रों के हवाले से कहा था कि ये विधेयक एक दस्तावेज़ के रूप में पेश किया जा सकता है. इसके बाद बहस के बिंदुओं को स्थायी समिति के पास भेजा जाएगा.

इससे पहले संसद ने एकमत से प्रस्ताव पारित करके अन्ना हज़ारे से अनशन ख़त्म करने की अपील की थी और कहा था कि संसद एक सख़्त लोकपाल विधेयक के पक्ष में है.

लेकिन अन्ना हज़ारे ने कहा था कि अगर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह वाक़ई उनकी स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं, तो उन्हें जनलोकपाल विधेयक को संसद में पेश करना चाहिए.

उन्होंने कहा था कि वे इसके बाद अनशन तोड़ने पर विचार कर सकते हैं. गुरुवार को दिन में केंद्रीय मंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख ने अन्ना हज़ारे से मुलाक़ात की थी.

मुलाक़ात के बाद वे अन्ना हज़ारे की तीन शर्तों के साथ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिले और फिर संकेत मिलने लगे थे कि सरकार संसद में इस पर चर्चा करवा सकती है.

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