अन्ना टीम को मायावती की चेतावनी

  • 26 अगस्त 2011
मायवती
Image caption कुछ दिनों पहले मायावती ने अन्ना का समर्थन किया था

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने अचानक अपना रुख़ बदलते हुए अन्ना हज़ारे और उनकी टीम को चेतावनी दी है.

उनका कहना है कि उनकी पार्टी केवल ऐसे लोकपाल क़ानून को समर्थन देगी, जो डॉक्टर अंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान के अनुरूप हो.

इससे पहले मायावती ने अन्ना हज़ारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को समर्थन दिया था. लेकिन मायावती ने शुक्रवार को लखनऊ में एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए अन्ना और उनके साथियों को सलाह दी है कि फिर भी यदि वे केवल अपनी पसंद का लोकपाल क़ानून लाना चाहते हैं, तो अनशन छोड़कर जनता के बीच जाएँ और अगला लोकसभा चुनाव लड़कर अपनी सरकार बनाएँ.

मायावती ने प्रेस कांफ्रेंस में साफ़ कर दिया कि लोकपाल बिल का मसौदा भारतीय संविधान के अनुरूप होना चाहिए और उसी के अनुरूप ही संसद में पास भी होना चाहिए.

मायावती ने कहा कि डॉ. अंबेडकर की सोच और भावनाओं का आदर करते हुए लोकपाल संगठन में सभी स्थानों पर अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़े वर्गों और सभी धर्मों को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए.

मांग

मायावती ने मांग की कि लोकपाल तैयार करने के लिए जो कमेटी बने, उसमे भी इन वर्गों को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिये, वरना उनकी पार्टी संसद में इस बिल का समर्थन नही करेगी.

मायावती ने खरी-खरी बातें की और कहा कि अन्ना हज़ारे और उनकी टीम अपनी शर्तों के हिसाब से जिस प्रकार का बिल पास कराना चाहती है, उस पर आम सहमति नही है.

और अगर वे अपना ही बिल पास कराना चाहते हैं तो अनशन छोड़कर जनता में जाएँ. वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में अपनी सरकार बनाएँ और फिर जैसा चाहे बिल पास कराएं.

उन्होंने कहा, "अन्ना हज़ारे की टीम अपनी शर्तों के हिसाब से जिस प्रकार का बिल पास कराना चाहती है और जिस पर अभी तक भी सहमति नहीं बन पा रही, तो ऐसी स्थिति में मेरी अन्ना हज़ारे की टीम को यह सलाह है कि अब वे उसको लेकर आंदोलन करने की बजाय देश में 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव में उतरें और केंद्र में अपनी सरकार बनाकर फिर अपनी मर्ज़ी के मुताबिक़ ख़ुद अपने बिल को पास कराएं तो यह ज़्यादा बेहतर होगा."

राज्यों में भी जनलोकपाल के अन्ना हज़ारे के प्रस्ताव पर मायावती ने कहा कि यह राज्यों के अधिकार क्षेत्र की बात है. फिर भी उत्तर प्रदेश में लोकपाल क़ानून लागू है और सरकार उनकी सिफ़ारिशों पर अमल कर रही है.

अंकुश

एक अन्य मुद्दे पर अपना रुख़ साफ़ करते हुए मायावती ने कहा कि लोकपाल क़ानून के दायरे में केवल बड़े अधिकारियों को रखना चाहिए. अगर उच्च स्तर पर प्रशासन भ्रष्टाचार मुक्त हुआ, तो निचले स्तर पर भी भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगेगा.

गुरूवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में अन्ना हज़ारे के समर्थकों की अराजकता और पुलिस के साथ मारपीट की आलोचना करते हुए मायावती ने चेतावनी दी कि अगर उत्तर प्रदेश में ऐसा कुछ हुआ तो यहाँ पुलिस सख़्त कार्रवाई करेगी.

मायावती ने 10 दिन पहले एक बयान जारी कर अन्ना हज़ारे के जनलोकपाल आंदोलन को समर्थन दिया था. इसीलिए उत्तर प्रदेश में बिना पूर्व अनुमति धरना प्रदर्शन पर पाबंदी के बावजूद उत्तर प्रदेश पुलिस ने अन्ना समर्थकों को खुलकर धरना प्रदर्शन की अनुमति दे रखी है.

लेकिन पिछले कुछ दिनों में कई दलित और मुस्लिम नेताओं ने अन्ना हज़ारे के आंदोलन पर कई संवैधानिक सवाल उठाए हैं.

राहुल गांधी ने भी संसद में बयान देकर एक प्रकार से इन्ही भावनाओं को मुखर करते हुए संविधान, संसदीय प्रक्रिया और धर्मनिरपेक्षता जैसे मुद्दे उठाए.

ऐसा लगता है कि इन सबसे मायावती दबाव में आ गईं और उन्होंने भी अपने को दलित और मुस्लिम बुद्धिजीवियों और राजनीतिक सामाजिक कार्यकर्ताओं से जोड़ना ज़रूरी समझा.

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