'एक क़ानून से कुछ नहीं होगा'

Image caption कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने कहा कि लोकपाल को चुनाव आयोग की तर्ज़ पर एक संवाधानिक संस्था बनाना चाहिए.

भ्रष्टाचार और लोकपाल के मसौदे पर राहुल गांधी ने पहली बार राय देते हुए कहा है कि सिर्फ़ एक लोकपाल क़ानून से भ्रष्टाचार ख़त्म नहीं होगा.

राहुल गांधी ने कहा, "पिछले दिनों में ये समझ बनाई जा रही है कि एक लोकपाल क़ानून आने से भ्रष्टाचार से निजात मिल जाएगी लेकिन ये ग़लत है, सिर्फ़ एक लोकपाल क़ानून लाने से भ्रष्टाचार नहीं ख़त्म होगा, बल्कि इसके लिए कई और चुनौतियों के हल ढूंढ़ने होंगे".

राहुल ने इनमें चुनाव पर सरकार और राजनीतिक पार्टियों का ख़र्च, सरकारी कामों के लिए ख़रीदी जाने वाली चीज़ों में पारदर्शिता, भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले भूमि और खनन जैसे क्षेत्र, सरकारी महकमे से शिकायतों के लिए संस्था, राशन कार्ड और बुज़ुर्गों के पेन्शन पहुंचाना, कर चोरी कम करने के लिए कर प्रणाली में सुधार रेखांकित किए.

राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा परिस्थिति का रास्ता निकालना ही ज़रूरी नहीं है बल्कि भ्रष्टाचार मिटाने के लिए गहन चिंतन और सही तरीका खोजना अहम है.

हालांकि राहुल गांधी के बोलना शुरू करते ही विपक्ष के सांसदों ने ज़ोर-शोर से उनका विरोध किया.

लोकतंत्र को ख़तरा

राहुल गांधी ने अन्ना हज़ारे का शुक्रिया करते हुए कहा कि उन्होंने भ्रष्टाचार से पीड़ित जनता के मन की बात को सामने लाने का महत्वपूर्ण काम किया है. लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की गरिमा को कम करना एक ख़तरनाक चलन है.

उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत रूप से कई लोगों ने देश को महत्वपूर्ण योगदान दिया है लेकिन ये समझना ज़रूरी है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अपना महत्व है, लोकतांत्रिक प्रक्रिया लंबी ज़रूर होती है पर इससे सभी को अपना विचार रखने का मौका मिलता है.

राहुल गांधी के मुताबिक इस बार मुद्दा भ्रष्टाचार है लेकिन आगे ऐसे मुद्दों पर आंदोलन छेड़े जा सकते हैं जो लोकतंत्र के लिए बुरे हों.

उनके इस बयान पर पहली प्रतिक्रिया देते हुए अन्ना हज़ारे की सहयोगी किरण बेदी ने ट्विटर पर लिखा कि, "ऐसा हो सकता है कि एक लोकपाल काफ़ी ना हो, पर शुरुआत तो करिए."

उन्होंने लिखा कि एवरेस्ट पर चढ़ने से पहले आपको छोटे पहाड़ चढ़ने होंगे.

लोक सभा में शून्य प्रहर के दौरान अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार को कम करने के लिए लोकपाल क़ानून बनाने पर सभी राजनीतिक पार्टियां सहमत हैं लेकिन उसके कार्यान्वयन पर चर्चा नहीं की जा रही.

उन्होंने चिंता जताई कि लोकपाल में भी भ्रष्टाचार पनप सकता है. राहुल गांधी ने कहा, "लोकपाल की जवाबदेही कैसे तय की जाएगी, इसलिए मेरा सुझाव है कि लोकपाल को चुनाव आयोग की ही तरह एक संवैधानिक संस्था बनाया जाए."

राहुल गांधी ने कहा कि पिछले दिनों के घटनाक्रम ने उन्हें दुख पहुंचाया है और ये संसद के सामने एक बड़ी चुनौती है, जिसका सामना सभी राजनीतिक पार्टियों को एकजुट होकर करना होगा.

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