आर्थिक विकास को लेकर चेतावनी

  • 26 अगस्त 2011
रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया
Image caption आरबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चतता बढ़ी है

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया यानी आरबीआई के मुताबिक़ आने वाले दिनों में महंगाई की दर तेज़ रहेगी, लेकिन इस वित्तीय वर्ष में देश की आर्थिक विकास दर में कमी आएगी.

रि़ज़र्व बैंक ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि भारत की अर्थव्यवस्था के ताज़ा हालात को देखते हुए आगे आने वाले दिन कठिन हो सकते हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक़ वर्ष 2011-2012 में आर्थिक विकास आठ प्रतिशत पर रहेगा, जो पिछले साल के मुक़ाबले 0.5 प्रतिशत कम रहेगा.

आरबीआई का कहना है कि अगर वैश्विक आर्थिक स्थिति बिगड़ती है, तो इससे वित्त वर्ष में जो अनुमान लगाया गया था, विकास उससे भी कम हो सकता है.

गुरुवार को जारी की गई इस रिपोर्ट में कहा गया है, "कुछ प्रतिकूल घटनाक्रम की वज़ह से पिछले वित्त वर्ष की तुलना में चालू वित्त वर्ष में आर्थिक विकास की जो संभावना जताई गई थी, वह उससे कम हुआ है."

विकास पर दबाव

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चतता बढ़ी है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि लगातार बढ़ती महंगाई और उसकी वजह से क़ीमतों में बढ़ोतरी, किसी भी उद्योग को शुरू करने के लिए ज़रूरी अधिक पूंजी और हाल ही में आरबीआई की ओर से बढ़ाए गए ऋण दर, सभी मिलकर भारत के आर्थिक विकास दर पर दबाव डाल रहे हैं.

जून के महीने में महंगाई की दर 9.22 प्रतिशत दर्ज की गई थी.

आरबीआई के मुताबिक़ महंगाई की दर ऊंची रहेगी, लेकिन मार्च 2012 तक आते-आते ये कम होकर क़रीब सात प्रतिशत तक पहुंच जाएगी.

आरबीआई ने सलाह दी है कि आने वाले दिनों में विकास दर को ऊंचा रखने के लिए निवेश को बढ़ावा देना होगा.

आरबीआई का कहना है कि वित्तीय घाटा बढ़ने के आसार ज़्यादा है.

बैंक के अनुसार अमरीका के क्रेडिट रेटिंग गिराए जाने के बाद वैश्विक बाज़ार में अनिश्चतता बढ़ी है और इसका भारत पर असर, व्यापार पर पड़ने वाले प्रभाव, विदेशी निवेश और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में वस्तुओं की क़ीमतों पर निर्भर करेगा.

इस रिपोर्ट में आशा की एक किरण भी दिखाई गई है, जिसमें कहा गया है कि कृषि क्षेत्र में संभावनाएं दिख रही हैं, लेकिन ओद्यौगिक विकास की गति धीमी हो सकती है.

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