प्रणब ने अन्ना के तीन मुद्दों पर चर्चा का प्रस्ताव रखा

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लोकसभा में सदन के नेता प्रणब मुखर्जी ने अन्ना हज़ारे के तीनों मुद्दों को सदन के सामने चर्चा के लिए रखा है.

उन्होंने संसद के सदस्यों से अनुरोध किया है कि वे संविधान के दायरे में और संसद की सर्वोच्चता को ध्यान में रखते हुए अपनी राय दें.

उन्होंने कहा है कि वे उम्मीद करते हैं कि यदि इन तीन मुद्दों पर संसद में सहमति बनती है तो उम्मीद है कि अन्ना हज़ारे अपना अनशन ख़त्म करेंगे.

उल्लेखनीय है कि अन्ना हज़ारे ने शर्त रखी है कि अगर जनलोकपाल के तीन मुद्दों पर अगर संसद सहमत होती है तो वे अपना अनशन ख़त्म कर सकते हैं.

जनलोकपाल के तीन अहम मुद्दों पर संसद में प्रस्ताव लाने की मांग अन्ना ने रखी है, इसमें से एक यह है कि इसी क़ानून के ज़रिए लोकायुक्त भी बनाए जाएँ, दूसरा हर विभाग में जन समस्याओं के लिए सिटिज़न्स चार्टर बनाए जाए जिसे न मानने पर संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई हो और तीसरा ये कि केंद्र सरकार के ऊपर से नीचे तक सभी कर्मचारियों और राज्य के सभी कर्मचारियों को इसके दायरे में लाया जाए.

शुक्रवार के शाम सरकार की ओर से को घोषणा की थी कि लोकसभा में सदन के नेता प्रणब मुखर्जी सदन की कारवाई शुरू होते ही एक वक्तव्य देंगे.

लोकसभा में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने सदन से अनुरोध किया है कि कोशिश करनी चाहिए कि शनिवार को ही सदन किसी नतीजे पर पहुँच सके.

इस बीच अन्ना हज़ारे का अनशन बारहवें दिन जारी है और रामलीला मैदान में और देश के विभिन्न हिस्सों में उनके हज़ारों समर्थक आंदोलन कर रहे हैं.

'हम एक चौराहे पर खड़े हैं'

अन्ना हज़ारे के तीनों मुद्दों को सदन के सामने चर्चा के लिए प्रस्तुत करते हुए कहा, "इसमें कोई शक नहीं है कि इस समय एक चौराहे पर खड़े हैं, एक आंदोलन चल रहा है और हम सब चाहते हैं कि हम इसे ख़त्म करना चाहते हैं."

उन्होंने कहा, "संसद के हर सदस्य दो बार और मंत्री तीन बार संविधान से बंधे रहेंगे और उसकी अक्षुण्णता बनाए रखेंगे. इसलिए इसका ध्यान रखना चाहिए कि इन तीनों मुद्दों पर चर्चा करते हुए संविधान की अक्षुण्णता और संसद की सर्वोपरिता को ध्यान में रखेंगे."

सदन के नेता प्रणब मुखर्जी ने कहा कि संसद में यदि इन मुद्दों पर सहमति बनती है तो इन्हें संसद की स्थायी समिति के पास भेज दिया जाएगा जो इन मुद्दों की व्यावहारिकता, इन्हें लागू करने की संभावनाओं और इसकी संवैधानिकता को ध्यान में रखते हुए इसे लोकपाल विधेयक में शामिल करने पर विचार करेगा.

उन्होंने कहा, "ये बात बढ़ाचढ़ाकर नहीं कह रहा हूँ लेकिन शायद ये उन दु्र्लभ अवसरों में से एक है जब संसद के इस सदन की कार्यवाही पर पूरे देश की नज़र है और शायद देश के बाहर भी इस पर नज़र है क्योंकि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र इस समय एक कठिन समय में है. इसे ध्यान में रखते हुए मैं सभी सदस्यों से अपील करता हूँ कि इस पर एक निष्पक्ष चर्चा की जाए."

इससे पहले प्रणब मुखर्जी ने पाँच अप्रैल को अन्ना से आंदोलन से लेकर शुक्रवार तक लोकपाल विधेयक के गठन और जनलोकपाल विधेयक को लेकर चल रही बहस तक और सरकार और नागरिक समाज के साथ हुई चर्चा से लेकर विपक्षी दलों की बैठक तक अब तक के घटनाक्रम का एक विवरण दिया.

उन्होंने सदन से अनुरोध किया है कि अगर संभव हो तो इन मुद्दों पर सहमति पर पहुँचने का प्रयास करे.

उनका कहना था कि उन्हें बताया गया है कि अगर सदन इन मुद्दों पर सहमति पर पहुँचता है तो अन्ना हज़ारे अपना अनशन ख़त्म करने पर विचार कर सकते हैं.