अख़बारों में अन्ना

  • 28 अगस्त 2011

भारत के अख़बारों में अन्ना छाए हुए हैं. अख़बारों ने न केवल अन्ना को मुखपृष्ठ पर जगह दी है बल्कि संपादकीय और लेख भी लिखे हैं पूरे आंदोलन पर.

अंग्रेज़ी अख़बार

टाइम्स ऑफ इंडिया का शीर्षक है. Anna wins for the people..यानी लोगों के लिए जीते. अख़बार ने पहले पन्ने पर टाइम्स टिप्पणी के रुप में अपना छोटा सा संपादकीय भी दिया है. इसके अनुसार ये भारत के इतिहास का एक ऐसा क्षण है जब लोगों को विनम्रता और साहस दिखाने की ज़रुरत है न कि दुस्साहस. अख़बार के अनुसार मामले को जीत और हार के रुप में देखा नहीं जाना चाहिए बल्कि लोगों की ताकत को आंकना चाहिए. राजनेताओं को सोचने की ज़रुरत है और खुद से सवाल करने की आवश्यकता है.

इंडियन एक्सप्रेस का शीर्षक है- house sets stage for Anna Break-fast

अख़बार में संपादकीय तो रविवार को नहीं है लेकिन सोली सोराबजी, तवलीन सिंह और जस्टिस जेएस वर्मा के लेख हैं. वर्मा कहते हैं कि लोकपाल का गठन संवैधानिक संस्था के रुप में हो तो इसके पास कई ताकतें हो जाएंगी. तवलीन सिंह ने अराजकता के नाम से लिखे अपने लेख में लिखा है कि अन्ना हज़ारे लोकतांत्रिक पद्धतियों में यकीन नहीं रखते हैं.इसके अलावा कांग्रेस के मंत्री अश्विनी कुमार के साथ मुलाक़ात को पूरा पन्ना मिला है जिसमें ज़िक्र अन्ना का ही है.

हिंदुस्तान टाइम्स की हेडिंग है- people’s Democracy

संपादकीय पन्ने पर रविवार को आने वाले कॉलम चाणक्य में सरकार की आलोचना की गई है और कहा है कि सरकार अन्ना के आंदोलन से निपटने में सही रुख नहीं अपना पाई और बार बार बयानबाज़ी और फैसले नहीं ले पाने की क्षमता उचित नहीं दिखी. अख़बार ने ब्रिटेन के अख़बारों में अन्ना से जुड़ी खबरों की समीक्षा करते हुए लिखा है कि अन्ना गांधी तो नहीं लेकिन उनका विरोध प्रदर्शन भारत के लिए अच्छा है.

हिंदू-

अख़बार ने अन्ना और आंदोलन गंभीर लेखों का एक पूरा पन्ना छापा है जिसमें एक लेख में अन्ना हज़ारे को युवाओं का आदर्श करार दिया गया है. इसी पन्ने पर एक लेख कहता है कि अन्ना इस समय की ज़रुरत हैं जबकि आशीष गुप्ता का लेख स्पष्ट करता है कि कई लोग जो अन्ना के साथ नहीं हैं उनका रुख क्या है. पन्न् का चौथा लेख राजनेताओं का आह्वान करता है कि उन्हें भ्रष्टाचार से सीधे सीधे निपटना होगा.

नवभारत टाइम्स ने लोगों की तस्वीरों के साथ शीर्षक दिया है. ...अब तो सारा देश है अन्ना. पहले पन्ने पर अख़बार ने संपादकीय लिखते हुए कहा है कि इंडिया जाग गया है अपने सपने पूरा करने. संपादकीय कहता है कि ‘हमने इतिहास बना दिया…..अब क्रांति की शुरुआत होने जा रही है..सलाम यंग इंडिया..सलाम अन्ना हज़ारे...सलाम भारतीय संसद.

दैनिक जागरण की पहली ख़बर का शीर्षक है जीता जन टूटेगा अनशन. अख़बार ने भी पहले पन्ने पर ही संपादकीय लिखते हुए कहा है कि अन्ना के आंदोलन ने कई सबक भी दिए हैं. राजनेताओं को भी और जनांदोलन के लिए भी.

अमर उजाला अख़बार की अन्ना और लोगों की तस्वीर के साथ ख़बर दी है अन्ना जीते, जनता जीत. अमर उजाला के संपादकीय पन्ने पर यशवंत व्यास का लेख कहता है एक बूढ़ा एक दर्ज़न दिन और डरे हुए ऊंचे लोग. इसी पन्ने पर गौतम कौल भ्रष्टाचार से जुड़ी फ़िल्मों की चर्चा करते हुए जंजीर के अमिताभ बच्चन को याद करते हैं जो लोगों के गुस्से के प्रतीक बन गए थे.

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