पत्थर फेंकने के आरोपी युवकों को आम माफ़ी

पत्थर फेंकने वाले प्रदर्शनकारी
Image caption पत्थर फेंकने के 1200 से ज़्यादा मामलों में दी गई इस माफ़ी को मुख्यमंत्री ने ईद का तोहफ़ा क़रार दिया.

भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पिछले साल घाटी में हुई हिंसा और पत्थर फेंकने के आरोप में हिरासत में लिए गए युवकों को क्षमा-दान देने की घोषणा की है.

पत्थर फेंकने के 1200 से ज़्यादा मामलों में दी गई इस सार्वजनिक माफ़ी को मुख्यमंत्री ने ईद का तोहफ़ा क़रार दिया.

उमर अब्दुल्ला ने साफ़ किया कि यह आम माफ़ी आगज़नी के मामलों के लिए नहीं है.

उन्होंने कहा, ''हम मानते हैं कि बच्चों से ग़लती हो जाती है. हमने नौजवानों को एक मौका देने का फैसला किया है. पत्थर फेंकने के आरोप में गिरफ़्तार किए गए नौजवानों को रिहा किया जाएगा. लेकिन ये माफ़ी नए मामलों के लिए नहीं होगी. ये सिर्फ उन नौजवानों के लिए है जिन्हें गिरफ़्तार किया जा चुका है. माफ़ी बार-बार नहीं दी जा सकती.''

हाल ही में अलगाववादी नेता सयैद अली शाह गिलानी की ने मांग की थी कि पत्थर फेंकने के आरोप में गिरफ़्तार नौजवानों को जल्द से जल्द रिहा किया जाए और अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो ईद के बाद राज्यभर में व्यापक स्तर पर प्रदर्शन किए जाएंगे.

बीबीसी से हुई बातचीत में गिलानी ने कहा, ''अगर हुकूमत सबको रिहा कर रही तो दुनिया देखेगी. हम कह चुके हैं कि अगर ईद के दिन, हमें नमाज़ पढ़ने से रोका गया, लोगों से मिलने से रोका गया और नौजवानों को रिहा नहीं किया गया तो हम राज्यभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का आह्वान करेंगे.''

पिछले हफ्ते राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारुक़ अब्दुल्ला की ओर से दिए गए इस बयान कि अलगाववादी कशामीर में फिर आग लगाना चाहते हैं के जवाब में गिलानी ने कहा कि वो तोपें या बंदूकें लेकर विरोध प्रदर्शन नहीं करते. सभी प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से किए जाते हैं.

साल 2010 में जून-जुलाई के महीनों में भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में हिंसा का एक लंबा दौर चला. इस दौरान सौ से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई. इन लोगों की मौत प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए चलाई गई गोलियों से हुई थी.

इससे पहले 2010 के सितंबर महीने में भी विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए ऐसे 50 युवकों रिहा कने का फैसला लिया गया था जिनपर सुरक्षाबलों पर पत्थर फेंकने के आरोप थे.

हालांकि इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए अलगाववादियों ने कहा था कि इस तरह के फ़ैसलों के ज़रिए लोगों को भ्रमित कर सरकार फिर भारत प्रशासित कश्मीर की आज़ादी जैसे मुद्दों को दरकिनार कर रही है.

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