उमर अब्दुल्ला के ट्वीट पर विवाद

अफ़ज़ल गुरु
Image caption अफ़ज़ल गुरु को संसद पर हमले के मामले में मौत की सज़ा मिली है

अफ़ज़ल गुरु की फाँसी और दया याचिका पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के ट्विटर पर दिए बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी आपत्ति जताई है.

अब्दुल्ला ने ट्विटर पर लिखा था, "अगर तमिलनाडु विधानसभा की ही तरह जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने अफ़ज़ल गुरु के लिए कोई प्रस्ताव पारित किया होता तो भी क्या लोगों की प्रतिक्रिया इतनी ही शांत होती? मेरे ख़्याल से नहीं."

दरअसल मंगलवार को तमिलनाडु विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर राष्ट्रपति से अपील की थी कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के आरोप में दोषी ठहराए गए तीनों अभियुक्तों को क्षमादान दिया जाए.

इसी के बाद उमर अब्दुल्ला ने ट्विटर पर ये बयान दिया जिसे भाजपा ने 'हुर्रियत नेताओं की भाषा' बताया है.

अफ़ज़ल गुरु को संसद पर हमले के मामले में सज़ा-ए-मौत मिली है और गृह मंत्रालय ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से गुरु की ओर से दायर दया याचिका ख़ारिज करने की सिफ़ारिश की है.

भाजपा ने मुख्यमंत्री अब्दुल्ला के बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उनके जैसे ज़िम्मेदार नेता को ऐसा बयान नहीं देना चाहिए था.

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