चिदंबरम पर निकला अन्ना हज़ारे का गुस्सा

  • 3 सितंबर 2011
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सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे ने भारत के गृह मंत्री पी चिदंबरम पर भड़कते हुए कहा है कि भारत को भ्रष्टाचार रहित करने के लिए उनके आंदोलन जैसे झटकों की ज़रुरत है.

बारह दिनों तक आमरण अनशन करने के बाद अपने गाँव में एक रैली को संबोधित करते हुए अन्ना हज़ारे ने कहा कि 'आज़ादी की दूसरी लड़ाई' की मशाल बुझनी नहीं चाहिए क्योंकि 'निरंतर झटकों' से ही भारत में भ्रष्टाचार मिटाया जा सकता है.

अन्ना हज़ारे ने अपने संबोधन में सत्ताधारी यूपीए सरकार को भी जम कर लताड़ा और अनशन शुरू होने से पहले खुद को हिरासत में लिए जाने की निंदा भी की.

अन्ना हज़ारे ने कहा, "ये सरकार 'लबाड'(चालाक) लोगों की है. इन लोगों ने दिल्ली में मुझे किसी भी स्थान पर आमरण अनशन करने से रोक दिया. जब जेपी पार्क में अनशन की आज्ञा भी दी तो कई शर्तों के साथ."

'सरकार गंभीर नहीं'

अपने आंदोलन की सफलता की बात कहते हुए अन्ना हज़ारे ने ये भी कहा कि सरकार को लोगों की इच्छाओं के आगे झुकना ही पड़ता है.

अनशन के बाद अपनी पहली रैली में अन्ना हज़ारे ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि केंद्र सरकार एक मज़बूत लोकपाल विधेयक के बारे में गंभीर नहीं है.

साथ ही उन्होंने दिल्ली पुलिस पर भी कई आरोप लगाए.

उन्होंने कहा, "दिल्ली पुलिस ने मुझे उस घर से उठाया जहाँ मैं रह रहा था. गिरफ़्तारी की वजह पूछे जाने पर कहा गया कि मैं शांति भंग कर सकता हूँ. हालांकि दो घंटे बाद ही मुझे रिहा करने की बात कही गई. पूछे जाने पर पुलिस ने कहा उनके पास ऊपर से आदेश हैं."

अन्ना हज़ारे ने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे गृह मंत्री पी चिदंबरम की ओर इशारा किया और कहा कि चिदंबरम 'खोडसाल' (शरारती) व्यक्ति हैं.

जन लोकपाल बिल के लिए किये गए आंदोलन के दौरान ग्रामीणों और देशभर के निवासियों का भी धन्यवाद देते हुए अन्ना हज़ारे ने कहा कि 'ये सिर्फ़ एक शुरुआत है'.

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