नोटिस के पीछे सरकार: केजरीवाल

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Image caption अरविंद केजरीवाल ने वर्ष 2006 में राजस्व सेवा से इस्तीफ़ा दिया था

अन्ना हज़ारे के सहयोगी अरविंद केजरीवाल ने उन्हें आयकर विभाग की ओर से नौ लाख रुपए का नोटिस भेजे जाने पर कहा है कि उन्होंने किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं किया और सरकारी दावे बेबुनियाद हैं.

अरविंद केजरीवाल 1995 में भारतीय राजस्व सेवा में शामिल हुए और 2006 में विभाग से इस्तीफ़ा दे दिया. लेकिन आयकर विभाग का कहना है कि उनका इस्तीफ़ा स्वीकार नहीं किया जा सकता क्योंकि उन्हें विभाग को बकाया धन देना है.

इस बारे में विभाग ने अरविंद केजरीवाल को नोटिस भेजी थी लेकिन अरविंद का कहना है कि विभाग को ये बातें इस्तीफ़े के पाँच साल बाद क्यों ध्यान में आई हैं, खासकर अन्ना हज़ारे का अनशन खत्म होने के बाद.

अरविंद के साथी प्रशांत भूषण ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सरकार को गंदी राजनीति नहीं करनी चाहिए.

'राजनीतिक मालिकों का हाथ'

अरविंद ने आरोप लगाया कि नोटिस भेजने के पीछे विभाग के राजनीतिक मालिकों का हाथ है.

अरविंद ने कहा, “मैने नवंबर 1, 2000, से अक्टूबर 2002 तक पढ़ने के लिए सरकारी छुट्टी ली थी. नवंबर 1, 2002, को मैं दफ़्तर वापस आ गया. मैने जिस बांड पर हस्ताक्षर किए थे, उसके मुताबिक मैं अगले तीन साल तक ना ही इस्तीफ़ा दे सकता था, ना ही रिटायर हो सकता था और ना ही नौकरी छोड़ सकता था. मैने फ़रवरी 2006 में नौकरी से इस्तीफ़ा दिया, यानी नौकरी से वापस आने के साढ़े तीन साल बाद. इसलिए मैने किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं किया.”

अरविंद ने कहा कि सरकारी अधिकारी सिवानी औऱ हिसार स्थित उनके गाँव में रिश्तेदारों के यहाँ जा रहे हैं और उनसे सभी तरह के जवाब पूछ रहे हैं, हालाँकि उन्हें कुछ भी हासिल नहीं हुआ है.

अरविंद ने कहा कि उन्होंने कंप्यूटर खरीदने के लिए विभाग से ऋण लिया था जिसके एवज़ में एक छोटी सी रक़म उनकी तनख़्वाह से कटती थी. लेकिन जब उन्हें तनख़्वाह मिलनी बंद हो गई तो ऋण पर ब्याज़ एक लाख रुपए को पार कर गया.

अरविंद ने कहा कि उन्होंने बार-बार विभाग को पत्र लिखकर कहा है कि ये रक़म उनके कर्मचारी भविष्य निधि खाते से काट लेनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा अभी तक नहीं हुआ है.

ये पूछे जाने पर कि उन्हें पाँच तारीख को विभाग की चिट्ठी आने पर उसका जवाब क्यों नहीं दिया, अरविंद ने कहा कि अन्ना हज़ारे के अनशन की वजह से वो बेहद व्यस्त थे.

अरविंद ने कहा कि अगर विभाग का कुछ पैसा बनता भी है तो उसे माफ़ कर दिया जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने जन सेवा के लिए नौकरी से इस्तीफ़ा दिया था.

अरुंधति की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया

Image caption अरुंधति राय अन्ना हज़ारे के आंदोलन के ख़िलाफ़ रही हैं

लेखिका अरुंधति राय की ओर से टीम अन्ना की कई मामलों पर की गई आलोचना पर भी अरविंद केजरीवाल और प्रशांत भूषण ने प्रतिक्रिया दी.

अरुंधति राय ने टीम अन्ना के आंदोलन के पीछे विश्व बैंक का हाथ बताया था.

इस पर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि अरुंधति राय की ओर से ऐसे आक्षेप क्यों लगाए जा रहे हैं क्योंकि जब दिल्ली जल निगम के निजीकरण के लिए विश्व बैंक ने धन देने की बात की थी, तब उस परियोजना की खिलाफ़त में अरुंधति राय उनके साथ थी.

अरविंद ने कहा कि अरुंधति जानती हैं कि वो विश्व बैंक का कितना विरोध करते रहे हैं.

प्रशांत भूषण ने कहा कि ये कहना गलत है कि विश्व बैंक ने आंदोलन को धन दिया है.

उन्होंने कहा, “ये कहना कि विश्व बैक जो भी काम करता है, वो गलत है, ये बिल्कुल गलत सोच है. जो लोग ऐसी सोच रखते हैं, उन्हें अपनी सोच सुधारने की ज़रूरत है.”

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