उल्फ़ा ने किया शांति समझौते पर हस्ताक्षर

उल्फ़ा विद्रोही
Image caption शनिवार को सरकार और उल्फ़ा ने एसओओ समझौते पर हस्ताक्षर किए

भारत के पूर्वोतर राज्य असम में शांति बहाली के लिए सरकार और प्रतिबंधित यूनाइटेड फ़्रंट ऑफ़ असम यानी उल्फ़ा के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर हो गए हैं.

इस समझौते पर हस्ताक्षर के बाद सरकार और उल्फ़ा के बीच राज्य में शांति प्रक्रिया की कोशिशों की शुरुवात हो गई है.

अभियानों को स्थगित करने यानी सस्पेंशन ऑफ़ ऑपरेशन(एसओओ) की समझौते पर केंद्र और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के साथ साथ उल्फ़ा के नेता ने हस्ताक्षर किए.

शनिवार को हुई समझौते में सरकार की तरफ़ से केंद्रीय गृह मंत्रालय में पूर्वोतर मामलों के संयुक्त सचिव शंभु सिंह , असम के गृह आयुक्त जिश्नु बरुआ और उल्फ़ा की ओर से वित्त सचिव चित्राबॉन हज़ारिका और उप कंमाडर राजू बरुआ मौजूद थे.

इस समझौते के मुताबिक अब उल्फ़ा तब तक कोई हिंसक गतिविधि नहीं करेगा जब तक राज्य में विद्रोह का एक समाधान नहीं निकल आता साथ ही सुरक्षाबल उल्फ़ा के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं करेंगे.

वार्ता के लिए रास्ता खोला

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय में पूर्वोत्तर मामलों के संयु्क्त सचिव शंभु सिंह ने कहा," दोनों पक्षों के बीच बहुत बढ़िया बातचीत हुई. एसओओ समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं. बातचीत के इस पहले दौर में राजनीतिक वार्ता के लिए रास्ता खोला है. यही अब भविष्य में होने वाली वार्ताओं के लिए दिशा तय करेगा."

इस बैठक में इस समझौते के नियमों और शांति बनाए रखने के विचारों पर विस्तार से च्रर्चा हुई.

विद्रोही गुट के क़रीब 600 सदस्यों को एक विशेष कैंप में रखा जाएगा जिसे 'नवनिर्माण केंद्र ' कहा जाएगा.

लेकिन जब उल्फ़ा के विदेश सचिव से पूछा गया कि क्या उल्फ़ा के काडर हथियारों का समर्पण करेगा तो उन्होंने तुरंत कहा," हम ऐसा क्यों करें.ये कोई अंतिम सहमति नहीं है. हम देखना चाहेगे बातचीत आगे किस दिशा में बढ़ेगी."

पिछले महीने उल्फ़ा ने केंद्र सरकार को 'मांग पत्र' सौंपते हुए संविधान में संशोधन की बात कही थी.

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