ममता के बिना समझौता नहीं

  • 5 सितंबर 2011
Image caption ममता बैनर्जी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ बांग्लादेश दौरे पर जाने से मना कर दिया है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के दो-दिवसीय बांग्लादेश दौरे में तीस्ता नदी के पानी के बंटवारे पर आम सहमति बनना मुश्किल लग रहा है.

मंगलवार को शुरू होने वाले इस दौरे से पहले विदेश सचिव रंजन मथाई ने कहा है कि पश्चिम बंगाल की सहमति के बिना केंद्र सरकार पानी के बंटवारे पर कोई फ़ैसला नहीं लेगी.

एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए मथाई ने कहा, “भारत की संघीय व्यवस्था के मुताबिक़ कोई भी समझौता राज्य सरकार की सहमति के बिना नहीं हो सकता, और बांग्लादेश की सहमति भी ज़रूरी होगी.”

इस दौरे में प्रधानमंत्री के साथ बांग्लादेश की सीमा से जुड़ने वाले पांच भारतीय राज्यों में से चार (असम, त्रिपुरा, मिज़ोरम, मेघालय) के मुख्यमंत्री भी जा रहे हैं.

लेकिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस दौरे पर जाने से इनकार कर दिया है.

इनकार की वजह?

ममता बनर्जी ने सार्वजनिक तौर पर अपने फ़ैसले की कोई वजह नहीं दी है.

ख़बरों के मुताबिक तीस्ता नदी के पानी का बंटवारा ही मूल कारण है, क्योंकि बांग्लादेश के साथ केंद्र सरकार के प्रस्तावित समझौते के तहत बांग्लादेश को ज़्यादा पानी मिलेगा.

पिछले 12 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री का ये बांग्लादेश का पहला दौरा है. चार राज्यों के मुख्यमंत्री के अलावा, विदेश मंत्री एसएम कृष्णा, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिव शंकर मेनन और विदेश सचिव रंजन मथाई भी मंगलवार को ढाका जाएंगे.

विदेश सचिव रंजन मथाई के मुताबिक़ इस दौरे में तीस्ता नदी के पानी के बंटवारे के अलावा दोनों देशों की सीमाओं, लोगों की आवाजाही, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत होगी.

इससे पहले बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना वर्ष 2010 में भारत के दौरे पर आईं थीं.

पूर्वोत्तर का विकास

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Image caption दो महीने पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की वेबसाइट पर बांग्लादेश के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी छपी थी.

अपनी यात्रा से पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक साक्षात्कार में कहा है कि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के विकास में बांग्लादेश की अहम भूमिका रहेगी.

बांग्लादेश की राष्ट्रीय समाचार एजंसी को दिए साक्षात्कार में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, “अब दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे आर्थिक एकीकरण के माहौल में भारत के पूर्वोत्तर हिस्से के विकास के लिए बांग्लादेश एक नई शुरुआत कर सकता है.”

प्रधानमंत्री ने आतंकवाद से निपटने के लिए दोनों देशों के आपसी सहयोग की ज़रूरत पर बल दिया.

उन्होंने ये भी कहा कि भारत में बांग्लादेश के नागरिकों के लिए बेहद प्रेम और इज़्ज़त की भावना है.

ग़ौरतलब है कि पिछले दिनों प्रधानमंत्री कार्यालय की वेबसाइट पर मनमोहन सिंह की बांग्लादेश पर की गई एक टिप्पणी से विवाद छिड़ गया था.

वेबसाइट के मुताबिक़ प्रधानमंत्री ने कहा था कि बांग्लादेश की 25 प्रतिशत जनसंख्या जमाते-इस्लामी की कसमें खाती हैं और वो भारत विरोधी है.

इस बयान के सार्वजनिक होने के बाद काफ़ी विवाद हुआ था. फिर वेबसाइट से मनमोहन सिंह की टिप्पणी हटा ली गई और तर्क ये दिया गया कि प्रधानमंत्री ने ये बातें ऑफ़ द रिकॉर्ड कही थी.

प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी की राजनयिक हलकों ने काफ़ी आलोचना हुई थी और कई पूर्व राजनयिकों ने ये सवाल भी उठाए थे कि प्रधानमंत्री को ये आँकड़े किसने दिए थे.

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