नई ‘स्विफ़्ट’ के लिए और इंतज़ार

मारुति स्विफ़्ट

दिल्ली में रहने वाली किरण गौरी पिछले 20 सालों से मारुति की बनाई हुई गाड़ियां ही इस्तेमाल करती आई हैं और जैसे ही मारुति की गाड़ी ‘स्विफ़्ट’ का नया मॉडल लॉन्च होने की ख़बर आई, उन्होंने झट से उसकी बुकिंग करवा ली.

लेकिन किरण को मालूम नहीं था कि जितने उत्साह से उन्होंने इस गाड़ी की बुकिंग करवाई, उसका दीदार करने के लिए उन्हें कितना लंबा इंतज़ार करना पड़ेगा.

नई गाड़ी के लिए अपने दम तोड़ते उत्साह को बयान करते हुए किरण ने कहा, “किसी को तोहफ़े के तौर पर देने के लिए हमने कुछ भावनाओं के साथ ये नई गाड़ी बुक करवाई. जब हमने गाड़ी बुक करवाई, तब हमें बताया गया था कि हमें दो महीने का इंतज़ार करना पड़ेगा. लेकिन मारुति प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच चल रहे गतिरोध की वजह से अगर हमारी गाड़ी की डिलिवरी में और देरी होती है तो हमारा उत्साह ही ख़त्म हो जाएगा. प्रबंधन और कर्मचारियों की लड़ाई के बीच ग्राहक को ही क्यों ऐसे परिणाम झेलने पड़ रहे हैं?”

मारुति सुज़ुकी इंडिया लिमिटिड भारत में कार बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी है और स्विफ़्ट इस कंपनी की सबसे ज़्यादा बिकने वाली गाड़ियों में से एक है.

इस गाड़ी का नया मॉडल पिछले महीने ही लॉन्च हुआ और लॉन्च से पहले ही इसकी बुकिंग धड़ल्ले से शुरू हो गई थी.

लेकिन मारुति के मानेसर स्थित प्लांट में कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच पिछले एक हफ़्ते से जारी गतिरोध की वजह से कंपनी गाड़ियों के निर्माण का निर्धारित लक्ष्य नहीं पूरा कर पा रही है.

मसला

दरअसल मारुति सुज़ुकी इंडिया लिमिटिड के हरियाणा स्थित मानेसर प्लांट में कंपनी ने कर्मचारियों के काम करने पर एक शर्त लगा दी थी जिसके विरोध में कर्मचारियों ने काम पर आना बंद कर दिया.

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Image caption पिछले महीने यानि अगस्त में मारुति गाड़ियों की बिक्री में 17 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई है.

कर्मचारियों से एक लिखित आश्वासन पर हस्ताक्षर करने को कहा गया जिसमें सभी कर्मचारियों से अनुशासन से काम करने, अपनी किसी भी मांग के लिए काम की रफ़्तार कम ना करने और हड़ताल ना करने की बात कही गई थी.

लेकिन मानेसर प्लांट में काम करने वाले 950 कर्मचारियों में से केवल 65 कर्मचारियों ने ही इस बॉन्ड पर हस्ताक्षर किये जिसके कारण प्लांट की उत्पादन क्षमता पर बहुत बुरा असर पड़ा है.

मारुति के मानेसर स्थित इस प्लांट में हर दिन 1,100 से ज़्यादा गाड़ियों का निर्माण किया जाता है, लेकिन पिछले सोमवार से शुरु हुए श्रमिक संकट की वजह से प्रतिदिन केवल 150 से 200 गाड़ियों का ही निर्माण हो पाया है.

इस स्थिति से निपटने के लिए हालांकि कंपनी ने कांट्रेक्ट पर कुछ 400 कर्मचारियों को नई नौकरियां दी, लेकिन फिर भी निर्माण से जुड़ा लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया है.

मारुति के मुताबिक़ गत सोमवार को केवल 200 गाड़ियों का ही निर्माण हो पाया.

ग्राहकों को आश्वासन

जहां तक ‘स्विफ़्ट’ गाड़ी की बात है, तो कंपनी के मुताबिक़ इस गाड़ी की अब तक 90,000 करों की बुकिंग हो चुकी हैं, लेकिन वर्तमान संकट की वजह से केवल 10,000 गाड़ियों का ही निर्माण हो पाया है.

मारुति में कॉरपोरेट सर्विसिस के जेनरल मैनेजर कंवल दीप सिंह ने बीबीसी को बताया, “मानेसर प्लांट में ये स्थिति उत्पन्न होने से पहले भी ग्राहकों को ये बताया गया था कि उन्हें इस गाड़ी की डिलिवरी के लिए थोड़ा इंतज़ार करना पड़ेगा, लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए उन्हें तीन-चार महीने से ज़्यादा इंतज़ार करना पड़ सकता है. फिर भी मैं ग्राहकों का शुक्रिया अदा करना चाहूंगा कि उन्होंने स्थिति को समझने की कोशिश की है. गाड़ियों के निर्माण के लिए हम लगातार कोशिश में लगे हैं.”

हालांकि इन सब दिक्कतों के बावजूद कंपनी ने स्विफ़्ट की बुकिंग बंद नहीं की है और अभी भी बहुत से ग्राहक इसकी बुकिंग की कतार में अपना नाम दर्ज करवाने के लिए खड़े हैं.

ग़ौरतलब है कि इस साल अब तक मारुति गाड़ियों की बिक्री में 5 प्रतिशत गिरावट आई है और पिछले महीने यानी अगस्त में ये गिरावट 17 प्रतिशत की थी.

ये पहली बार नहीं है कि मारुति के मानेसर प्लांट में कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच में इतना गहरा गतिरोध उत्पन्न हुआ है.

इसी वर्ष जून में मारुति के इसी प्लांट के कर्मचारी तेरह दिन तक हड़ताल पर रहे थे. वे एक नए कर्मचारी संगठन को मान्यता दिलाने की मांग कर रहे थे.

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