धमाके में 11 मरे, प्रधानमंत्री ने कहा सुरक्षा व्यवस्था कमज़ोर

  • 8 सितंबर 2011
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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि भारतीय सुरक्षा व्यवस्था में कमज़ोरियाँ हैं जिसका फ़ायदा चरमपंथी उठा रहे हैं.

मनमोहन सिंह ने बुधवार शाम को राम मनोहर लोहिया अस्पताल में जाकर दिल्ली बम धमाके के घायलों से मुलाक़ात की. दिल्ली हाई कोर्ट के बाहर बुधवार सुबह हुए धमाके में 11 लोग मारे गए हैं और कम से कम 91 लोग घायल हुए हैं.

दिल्ली धमाके पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

बांग्लादेश यात्रा पर गए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ढाका से आने के बाद हवाईअड्डे से सीधे राममनोहर लोहिया अस्पताल गए. ज़्यादातर घालयों का यहीं भर्ती करवाया गया है.

प्रधानमंत्री ने दिल्ली में कहा कि सुरक्षा व्यवस्था की कमज़ोरियाँ को दूर करने की ज़रूरत है. गृह मंत्री पी चिदंबरम ने इसे 'आतंकवादी हमला' बताया है.

मामले की जांच नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी यानी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) कर रही है.जांच के लिए 20 लोगों की विशेष टीम बनाई गई है.

दिल्ली पुलिस ने दो प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर दो संदिग्ध लोगों के स्केच भी जारी किए हैं.

केंद्रीय गृहमंत्रालय में आतंरिक सुरक्षा मामलों के सचिव यूके बंसल ने बताया है कि आरंभिक जाँच से पता चल रहा है धमाका नाइट्रेट के आधार वाले या पीईटीएन विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था.

इस विस्फोट की ज़िम्मेदारी संभालने वाला संगठन हूजी मूलरूप से बांग्लादेश का चरमपंथी संगठन है लेकिन कहा जाता है कि इसकी गतिविधियाँ पाकिस्तान में भी हैं.

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घटनाक्रम

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विस्फोट की घटना बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट के गेट नंबर चार और पाँच के बाहर हुई. बुधवार के दिन हाई कोर्ट जनहित याचिकाओं की सुनवाई होती है इसलिए आम दिनों से थोड़ी ज़्यादा भीड़ थी.

वकीलों के अनुसार जिस जगह पर विस्फोट हुआ वहां आमतौर पर दो सौ से ढाई सौ की संख्या में लोग मौजूद रहते हैं. वकीलों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की.

घटना के थोड़ी देर बाद ही वहाँ पुलिस ने घेरा डाल दिया था और घायलों को अस्पताल पहुँचाने के लिए एंबुलेंस पहुँच गए थे.

पुलिस को लोगों को वहाँ से हटाने के लिए काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी.

उल्लेखनीय है कि गत 25, मई को इसी हाईकोर्ट में एक विस्फोट और हुआ था जो बहुत सफल नहीं हुआ था इसलिए किसी को नुक़सान नहीं पहुँचा था.

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