मुंबई मामले में गुत्थी अब तक सुलझी नहीं

  • 8 सितंबर 2011
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दिल्ली में हुए बम धमाके के बाद मुंबई में लोगों का ध्यान एक बार फिर 13 जुलाई को हुए धमाकों की ओर खिंचा है. इसकी गुत्थी अब तक सुलझ नहीं पाई है.

इन सिलसिलेवार बम धमाकों की जांच शुरू हुए लगभाग दो महीने हो चुके हैं. लेकिन न तो अब तक कोई गिरफ्तार हुआ है और न ही किसी संगठन ने इन धमाकों की ज़िम्मेदारी कुबूल की है.

अधिकारी अब तक यह स्पष्ट रूप से नहीं कह पा रहे हैं की इन बम धमाकों में किस संगठन यह व्यक्ति का हाथ था.

लेकिन सूत्रों के अनुसार इन धमाकों की जांच करने वाले आतंकवाद-निरोधी दस्ते का फोकस इंडियन मुजाहीदीन पर है.

एक समाचार एजेंसी ने यह खबर चलाई है कि जांच करने वाले अधिकारी इस नतीजे पर पहुँच गए हैं कि मुंबई धमाकों के पीछे इंडियन मुजाहीदीन का ही हाथ था.

एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से चार संदिग्ध लोगों की शनाख्त भी की और कहा की यह चारों देश से बाहर फरार होने में कामयाब हो गए हैं. लेकिन विभाग के लोग इस की पुष्टि नहीं कर रहे.

जांच अधिकारियों को इस मामले को हल करने में कई दिक्क़तें आ रही हैं. इसमें सबसे बड़ी बाधा है धमाकों के दौरान बारिश के कारण सुबूतों का पानी में बह जाना.

समझा जाता है कि पुलिस को धमाकों वाले इलाकों से सुबूत के तौर पर कुछ नहीं मिला.

हमले

13 जुलाई की शाम को मुंबई के भीड़ भाड़ वाले इलाके दादर, ज़ावेरी बाज़ार और ओपरा हॉउस में तीन बम धमाके हुए थे जिन में 20 लोगों की मौत हो गई थी.

यह 2003 से मुंबई में होने वाला चौथा बड़ा आतंकवादी हमला था. पिछले तीन हमलों की गुत्थियों को सुलझाने में जांच अधिकारी कामयाब रहे हैं.

जुलाई 2003 में एक साथ दो बम के धमाके हुए थे जिन में 55 लोग मारे गए थे. इन बम धमाकों में मुंबई के मोहम्मद हनीफ और उसकी पत्नी को सज़ा हुई थी.

इसके बाद मुंबई की लोकल ट्रेनों में लग भाग एक साथ सात शक्तिशाली बम विस्फोट हुए थे जिन में लग भाग 200 लोगों की मौत हुई थी.

इन धमकों में 13 भारती नागरिकों को गिरफ्तार किया गया था और अब तक तक उनके खिलाफ मुक़दमा जारी है.

इसके बाद 26 नवम्बर 2008 को आतंकी हमलों में 165 लोगों की जानें गई थीं. अदालत में चले मुक़दमे के अनुसार इस कांड में पाकिस्तान से आए दस आतंकवादियों का हाथ था.

नौ को पुलिस ने मार दिया था जबकि अजमल कसाब गिरफ्तार कर लिया गया था. उसको अदालत ने मौत की सुनाई है.

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