सीमापार नहीं, भारतीय चरमपंथियों पर ध्यान दें: चिदंबरम

  • 9 सितंबर 2011
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Image caption चिदंबरम ने बीबीसी के साथ विशेष इंटरव्यू में ये जानकारियाँ दी हैं

गृह मंत्री पी चिदंबरम के अनुसार हाल की चरमपंथी घटनाएँ दर्शाती हैं कि भारत को देश में बसे या भारतीय चरमपंथियों पर ध्यान केंद्रित करना होगा.

बीबीसी को दिए एक विशेष इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "आतंकवाद के स्रोत के लिए सीमापार आतंकवाद की ओर इशारा नहीं किया जा सकता. वो ख़तरा बना हुआ है लेकिन भारत को देश में बसे या भारतीय चरमपंथियों के मॉड्यूल्स पर ध्यान केंद्रित करना होगा."

भारत के गृह मंत्री का कहना था कि उनकी सबसे बड़ी चिंता ये है कि 'आंतकवाद का केंद्र माने जाने वाले अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र में चरमपंथियों का सामना करने वाली ताकतें नहीं रहतीं तो वे भारत की ओर ध्यान केंद्रित करेंगे और कई लोग हैं जो उनका समर्थन कर सकते हैं.'

उन्होंने ये भी कहा, "चाहे भारत अमरीका, ब्रिटेन, फ़्रांस और मध्य पूर्व के देशों से ख़ुफ़िया जानकारी का आदान-प्रदान करता लेकिन हम उस स्थिति में नहीं पहुँचे हैं कि हम ख़ुफ़िया जानकारियाँ पाकिस्तान के साथ बाँटें या फिर पाकिस्तान हमारे साथ ख़ुफ़िया जानकारियाँ बाँटे."

चिदंबरम ने ये भी कहा कि जब से पाकिस्तान-अमरीका के रिश्तों में तल्ख़ी आई है तब से भारत-पाक सीमा पर हालात उतने शांत नहीं रहे जितने कुछ महीने पहले थे.

'पाकिस्तान से ख़ुफ़िया जानकारी कैसे बाँटें'

चरमपंथी गतिविधियों पर ख़ुफ़िया जानकारियों के आदान-प्रदान पर भारत-पाकिस्तान सहयोग के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में पी चिदंबरम ने कहा, "पाकिस्तान से जानकारी न बाँट पाने का कारण साफ़ है - पाकिस्तान या फिर पाकिस्तानी सरकार में मौजूद लोग अब भी नॉन स्टेट एक्टर्स (सरकारी की जानकारी के बिना सक्रिय चरमपंथी) को समर्थन दे रहे हैं. मैनें पहले भी इस फ़र्क को ख़ारिज किया है. यदि ऐसा फ़र्क हो तब भी पाकिस्तान सरकार में मौजूद लोग इन लोगों को समर्थन देते हैं. तो हम पाकिस्तान के साथ ख़ुफ़िया जानकारी कैसे बाँट सकते हैं या फिर पाकिस्तान से भरोसेमंद, सही वक्त पर मिलने वाली जानकारी की कैसे उम्मीद कर सकते हैं?"

भारतीय गृह मंत्री का कहना था कि हाल में भारत में तीन बड़े हमले हुए हैं और एक 25 मई (दिल्ली में) वाला असफल प्रयास रहा है.

उन्होंने कहा, "पुणे और मुंबई के हमलों के बारे में हमें लगभग यकीन है कि ये भारत में आधार रखने वाले या भारतीय चरमपंथियों का काम था. दिल्ली में मई में हुआ प्रयास और दिल्ली में हुए धमाके के मामले में शक़ की सुई भारतीय चरमपंथियों की ओर है. आपको पता है हूजी और इंडियन मुजाहिद्दीन ने इसे अंजाम देने का दावा किया है और हम इसकी पुष्टि करने की कोशिश कर रहे हैं."

चिदंबरम ने इससे निष्कर्ष निकालते हुए कहा, "हमें इससे ये पता चलता है कि हम अब आतंकवाद के स्रोत के लिए सीमापार से आतंकवाद की ओर इशारा नहीं कर सकते. वो ख़तरा बना हुआ है लेकिन हमें भारतीय और भारत में आधारित चरमपंथियों के मॉड्यूल्स पर ध्यान केंद्रित करना होगा."

'मेरी सबसे बड़ी चिंता'

पाकिस्तान के संदर्भ में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "हमें अपने दोस्तों पर दबाव बनाना होगा जो पाकिस्तान पर दबाव बनाएं ताकि वो वहां सक्रिय लोगों का सामना करे. लेकिन अब क्योंकि भारतीय चरमपंथी सक्रिय हुए हैं तो हमें आतंकवाद निरोधक क्षमता बनानी होगी और इन मॉड्यूल्स को ख़त्म करना होगा."

अपनी सबसे बड़ी चिंता का ज़िक्र करते हुए चिदंबरम ने कहा, "मेरी सबसे बड़ी चिंता है कि जब हम सब मानते हैं कि पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान आतंकवाद का केंद्र हैं, तो यदि वहाँ इनका सामना करने वाली ताकतें न रहीं तो क्या उनके हौसले बढ़ेंगे, वे और उग्र होंगे? ये गुट अपना ध्यान बहुत जल्दी भारत पर केंद्रित कर सकते हैं. भारत-पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान में लोग हैं जो इस मुद्दे पर हाथ मिलाकर चल सकते हैं."

चिदंबरम ने कहा कि ओसामा के मारे जाने का मतलब ये नहीं कि कोई और नेता नहीं आ सकता सकता. उनका मानना है कि यदि संगठन का तंत्र बरक़रार है तो इस बात से सब्र नहीं किया जा सकता कि नंबर 1 मारा गया है. उन्होंने इलियास कश्मीरी का ज़िक्र करते हुए कहा कि ये तो अस्थायी धक्का है.

युवाओं का उग्रवाद की ओर झुकाव

उनका कहना था कि उनकी दूसरी चिंता है युवाओं के उग्रवादी विचारधारा की ओर बढ़ते झुकाव को कैसे रोकें जिससे सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चिंताएँ हैं क्योंकि पूरे विश्व में युवा उग्रवादी विचारधारा की ओर झुक रहे हैं और इसे रोकना केवल पुलिस के बस की बात नहीं है.

उन्होंने ये भी कहा कि वे 'भारतीयों को कैसे ये समझाएँ कि भारत में क़ानून व्यवस्था कायम रखना आसान काम नहीं है और सरकार क्षमता बढ़ा सकती है लेकिन ऐसे मौक़े भी आएँगे जब चरमपंथियों का दांव लग सकता है.'

भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसियों की कारगुज़ारी पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "जिस तरह की ख़ुफ़िया जानकारी आ रही है मैं उससे संतुष्ट नहीं हूँ. भारत बड़ा देश है जहाँ विभिन्न संस्कृतियों वाले लोग हैं और शहरों में इतने भि्न्न किस्म के लोग बसे हैं कि वहाँ ख़ुफ़िया जानकारी जुटाना बहुत मुश्किल है.मुझे भरोसा नहीं कि हर तरह के गुट के बारे में हमारे पास पर्याप्त जानकारी है.ये राज्यों का काम है और केंद्र की राज्यों में मौजूदगी तो होती है लेकिन ख़ुफ़िया जानकारियाँ जुटाना राज्य सरकारों का काम है और वे अपनी क्षमताएँ बढ़ा रहे हैं."

चिदंबरम ने कहा कि ओसामा के मारे जाने का मतलब ये नहीं कि कोई और नेता नहीं आ सकता सकता. उनका मानना है कि यदि संगठन का तंत्र बरक़रार है तो इस बात से सब्र नहीं किया जा सकता कि नंबर 1 मारा गया है. उन्होंने इलियास कश्मीरी का ज़िक्र करते हुए कहा कि ये तो अस्थायी धक्का है.

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