'धमाकों के सुराग पर सरकार नाकाम'

  • 9 सितंबर 2011
सुषमा स्वराज
Image caption विपक्ष ने धमाकों पर सरकारी कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है.

राज्य सभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा है कि दिल्ली धमाके की घटना के बाद राम मनोहर लोहिया अस्पताल में जो हंगामा हुआ, और लोगों ने कांग्रेस नेताओं पर जो ग़ुस्सा उतारा, इससे सरकार की आँखें खुल जानी चाहिए.

दिल्ली धमाके और उससे पहले मुंबई और पुणे में हुए धमाकों में सरकार पर नाकामियों का आरोप लगाते हुए अरुण जेटली ने कहा," इन घटनाओं के बारे में कोई भी पूर्व जानकारी उपलब्ध नहीं थी."

उन्होंने कहा, "इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि हमारी एजेंसियाँ प्रमुख उग्रवादी संगठनों के अंदर पैठ नहीं बना पाई हैं. क्या हमारी इटेलिजेंस कमज़ोर हुई है? क्या उनके तरीक़े बदले हैं. ये देश के लिए बड़ी चुनौती की घटना है. ये कहना कि आतंकवाद के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस होगा पर्याप्त नहीं है."

उधर लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि गुरुवार को ख़त्म हुए मॉनसून सत्र में सरकार में अंतर्विरोध दिखा और विपक्ष एकजुट था और सरकार पर भारी रहा.

सुषमा ने कहा कि संसद में कार्रवाई के बाधित होने के लिए सरकार ज़िम्मेदार है, न कि विपक्ष.

सुषमा ने कहा, "अन्ना को लेकर सरकार में अंतर्विरोध था और मुद्दों को लेकर उसमें एकजुटता में कमी थी, जबकि विपक्ष एकजुट था. हर बहस में विपक्ष ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया."

राज्यसभा में लाल कृष्ण आडवाणी द्वारा कैश फ़ॉर वोट स्कैम की ज़िम्मेदारी अपने कंधों पर लेने पर सुषमा स्वराज ने कहा कि दरअसल आडवाणी कहना चाह रहे थे कि अगर उनके सांसद ज़िम्मेदार हैं तो वह भी नैतिक रूप से जिम्मेदार हैं.

सुषमा ने कहा कि आडवाणी को उनकी यात्रा के लिए पार्टी का पूरा समर्थन प्राप्त है और पार्टी महामंत्रियों को कहा गया है कि वो यात्रा की रूपरेखा पर काम करें.

'यूपीए में अंतर्विरोध'

प्रधानमंत्री की बांग्लादेश यात्रा से ठीक पहले तीस्ता नदी समझौते पर ममता बनर्जी की कथित नाराज़गी पर टिप्पणी करते हुए अरुण जेटली ने कहा कि लोग सोच रहे थे कि बांग्लादेश यात्रा से हल निकलेंगे, लेकिन यूपीए के अंतर्विरोध की वजह से उम्मीद के मुताबिक उपलब्धि हासिल नहीं हो पाई.

जेटली के अनुसार, "इसका असर ये हुआ कि वहाँ क्या हुआ, इसके संबंध में सारी जानकारी सामने नहीं आ पाई."

इधर सुषमा स्वराज ने कहा, "बांग्लादेश जाने से पहले प्रधानमंत्री जी ने आडवाणी जी, अरुण जी और मुझे बुलाया था. इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी भी थे. हम लोग ऑन रेकार्ड ये कहना चाहते हैं कि असम की वो कोई भूमि वो वहाँ देने जा रहे हैं, इस पर कतई कोई चर्चा हमसे नहीं हुई. इसलिए अगर वो कहें कि फ़ैसले में भाजपा शामिल थी, तो ये सरासर ग़लत और निराधार है."

सरकारी जवाब

उधर संसदीय कार्य मंत्री पवन बंसल ने संसद में विपक्ष के शोर-शराबे की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि मॉनसून सत्र के 25 दिनों में 17 दिन प्रश्नकाल नहीं चला, 140 घंटों में करीब 66 घंटे हंगामे की भेंट चढ़े और मात्र दो-तीन महत्वपूर्ण विधेयक ही पास हो पाए.

बंसल ने कहा, ‘प्रश्नकाल नहीं चला क्योंकि किसी ना किसी बात को लेकर शोर करते थे. और जब हम कहते थे कि हम चर्चा के लिए तैयार हैं, तो मानने को तैयार नहीं होते थे.’