'नक्सलवाद से निपटने के लिए समग्र नीति बनानी होगी'

  • 13 सितंबर 2011
Image caption मनमोहन सिंह ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों और प्रशासन के बीच की दीवार गिरानी होगी.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि नक्सलवाद मुद्दे के समाधान के लिए प्रभावित क्षेत्रों से जुड़े सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए एक समग्र नीति बनानी होगी.

मनमोहन सिंह ने 60 नक्सल प्रभावित ज़िलों के कलेक्टरों को संबोधित करते हुए दिल्ली में कहा कि बारहवीं पंचवर्षीय योजना को बनाते समय ज़मीनी स्थिति और तथ्यों से सीख लेनी होगी.

पिछले साल सरकार ने एकीकृत कार्य योजना यानि आईएपी बनाई थी जिसके तहत नक्सल प्रभावित ज़िलों में स्कूल, सड़क, पीने का पानी, स्वास्थ्य केंद्र जैसी जन सुविधाओं और ग्रामीण रोज़ग़ार गारंटी योजना यानी मनरेगा और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी ग्रामीण योजनाओं को मज़बूत बनाने की बात कही गई थी.

इस योजना के तहत 60 नक्सल प्रभावित ज़िलों को कुल 1,500 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे. हर ज़िले को 25 करोड़ रुपए देने की घोषणा की गई थी.

उसी संदर्भ में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के कलेक्टरों की दिल्ली में एक बैठक बुलाई गई, जिसमें उन्होंने अपने अपने क्षेत्रों में आड़े आने वाली समस्याओं का ब्यौरा दिया.

प्रधानमंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित इलाक़ों में विकास के अभाव की वजह से वहाँ के लोग अलग-थलग पड़ रहे हैं और उन्हें अपने साथ लेकर चलने की ज़रूरत है.

उन्होंने कहा, “ऐसे लोग जो प्रशासन और मुख्य धारा से ख़ुद को कटा हुआ महसूस करते हैं, उनमें अपनेपन की भावना जगाने के लिए हमारी नीतियों और योजनाओं को सुनिश्चित करना होगा कि इनसे मिलने वाले फ़ायदों का उन लोगों को भागीदार बनाया जाए. साथ ही देखना होगा कि अर्थव्यवस्था में हो रही बढ़ोत्तरी का लाभ इन लोगों तक पहुंच सके. इन क्षेत्रों को विकास योजनाओं के लिए कितनी ही राशि क्यों न दे दी जाए, लेकिन उस राशि से लोगों के विश्वास को नहीं जीता जा सकता. हमें अपने और उनके बीच की दीवार को गिराना होगा.”

सुनिए दंतेवाड़ा के कलेक्टर ओपी चौधरी से ज़मीनी स्थिति का आकलन

'दीवार गिरानी होगी'

प्रधानमंत्री ने कहा कि एकीकृत कार्य योजना के तहत आने वाले ज़िलों में नीतियां बनाने से पहले प्रभावित होने वाले ग्रामीणों का पक्ष और उनकी ज़रूरतों को ध्यान में लेना चाहिए.

उन्होंने कहा, “एकीकृत कार्य योजना का मक़सद नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की कमी को पूरा करना है. नक्सलवाद की समस्या से निपटने के लिए हमें विकास के मुद्दे पर ध्यान देना होगा. इन क्षेत्रों में किया जाने वाला विकास अर्थपूर्ण, समग्र और लोगों के लिए होना चाहिए. सुरक्षा व्यवस्था का अभाव विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के आड़े आता है. इन क्षेत्रों में विकास योजनाओं में कार्यरत लोगों को सुरक्षा प्रदान करना एक चुनौती ज़रूर है लेकिन विकास और सुरक्षा के मुद्दों को हमें साथ-साथ लेकर चलना होगा.”

ग़ौरतलब है कि बैठक के दौरान कई ज़िला कलेक्टरों ने विकास कर्मचारियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया था. उनका कहना था कि नक्सली तत्वों के डर की वजह से लोग उनके क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए आसानी से आगे नहीं आते.

साथ ही उनकी शिकायत थी कि मनरेगा जैसी योजनाओं के तहत ग्रामीणों को उनके श्रम का पैसा समय पर नहीं मिल पाता है, जिस पर ध्यान दिया जाना चाहिए.

इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें ये सुनिश्चित करना होगा कि ग्रामीण योजनाओं के तहत लोगों को एक टिकाऊ कमाई का माध्यम दिया जाए.

साथ ही उन्होंने कहा कि ग्रामीण योजनाओं से जुड़ी धन राशि का रखरखाव करने वाले अधिकारियों को भी सुरक्षा प्रदान करवाना उनकी ज़िम्मेदारी है.

सेना से मदद?

जहां प्रधानमंत्री ने लोगों का दिल जीतने पर ज़ोर दिया, वहीं गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि वामपंथी कट्टरपंथ भारत का सबसे हिंसक आंदोलन है.

साथ ही उन्होंने इन क्षेत्रों के लिए सेना की मदद लेने के भी संकेत दिए. उन्होंने कहा कि सरकार इन क्षेत्रों के लिए एक विशेष बल बनाने पर भी विचार कर रही है, जिसके लिए सेना से मदद ली जा सकती है.

उनका कहना था, “हम नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आड़े आने वाली मुसीबतों को समझते हैं. हम एक विशेष बटालियन का विकास करने पर विचार कर रहे हैं. इस बटालियन में सुरक्षा और इंजीनियरिंग विभाग होंगे, जैसे कि सेना में अलग-अलग विभाग होते हैं. इन क्षेत्रों में विकास सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी इस बटालियन की ही होगी. लेकिन इस बटालियन को तैयार करने में थोड़ा वक्त लगेगा. इन्हें अलादीन का चिराग रगड़ने से पैदा नहीं किया जा सकता.”

उनका कहना था कि प्रभावित ज़िलों में क़ानून व्यवस्था को बनाए रखने की लड़ाई उतनी बड़ी नहीं है, जितनी कि लोगों के दिल और दिमाग़ जीतने की लड़ाई.

उन्होंने कहा कि नक्सलवाद पर जीत पाने के लिए ये ज़रूरी है कि ग्रामीण लोग प्रशासन के साथ-साथ चले.

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