फेडरेशन लें बीसीसीआई से सीख: राजपाल

  • 14 सितंबर 2011
भारतीय हॉकी टीम इमेज कॉपीरइट PTI
Image caption राजपाल सिंह कहते हैं कि खिलाड़ियों को अच्छा प्रोत्साहन मिलना ज़रूरी है.

एशियाई चैंपियंस ट्रॉफ़ी जीतकर देश लौटी भारतीय हॉकी टीम के हर खिलाड़ी को 25,000 रुपए दिए जाने को पूर्व हॉकी खिलाड़ियों ने ‘शर्मनाक’ बताया है, वहीं हॉकी कप्तान राजपाल सिंह ने बीबीसी से बातचीत में कहा है कि खिलाड़ियों को अच्छा प्रोत्साहन ज़रूरी है और दूसरे फ़ेडरेशनों को बीसीसीआई से सीख लेनी चाहिए.

राजपाल ने कहा, "अगर खिलाड़ी 100 प्रतिशत खेल को दे रहा है तो फ़ेडरेशन को भी देना चाहिए."

उधर खिलाड़ियों के धन वापस किए जाने के बाद खेल मंत्री अजय माकन ने हर खिलाड़ी को डेढ़ लाख रुपए देने की घोषणा की है.

इससे पहले हॉकी इंडिया की ओर से जारी एक वक्तव्य में कहा गया था कि उसके पास खिलाड़ियों को देने के लिए पैसे ही नहीं हैं.

इस पर राजपाल का कहना था, "अगर आपके पास पैसा कम है तो इतना भी मत दो. आप हॉकी को चलाओ. हम अपना 100 प्रतिशत देते रहेंगे."

लेकिन जब राजपाल से ये पूछा गया कि हॉकी इंडिया की ओर से हर खिलाड़ी को 25,000 रुपए देने की घोषणा की गई थी तो खिलाड़ियों की क्या प्रतिक्रिया थी?

इस पर राजपाल ने कहा, "सभी का कहना था कि इतनी बड़ी जीत के बाद इतना कम धन देने से बेहतर है कि इसे ना ही दिया जाए. इससे खिलाड़ियों को ये दुख होता है कि क्या खिलाड़ियों की इतनी ही हैसियत है."

ज़्यादातर हॉकी खिलाड़ी मध्यमवर्गीय परिवारों से ही निकलते रहे हैं. ऐसे में इतने बड़े टूर्नामेंट जीतने के बाद हर खिलाड़ी को मात्र 25,000 रुपए दिए जाने की तीखी आलोचना हो रही है.

राजपाल कहते हैं कि चाहे खिलाड़ी किसी भी परिवार से आए, उसे अच्छा प्रोत्साहन मिलना ज़रूरी है.

"हम आर्थिक सहायता की बात तभी क्यों करते हैं जब खिलाड़ी जीतता है. और प्रोत्साहन के लिए भी इतनी कम धन राशि दी जाती है. खिलाड़ी को हर खेल पर पैसा मिलना चाहिए, ना कि हर जीत पर. जिस तरह से बीसीसीआई ने फंडिंग की, औj वो जिस तरह से खिलाड़ियों को पैसा दे रहे हैं, हर युवा क्रिकेट खिलाड़ी बनना चाहता है."

राजपाल के मुताबिक हर चीज़ जो दूसरी जगह पर अच्छी हो रही है, वो बाकी फ़ेडरेशनों को भी सीखनी चाहिए.

"रणजी खिलाड़ी भी दूसरे खेलों के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से ज़्यादा कमा रहे हैं. ये बातें फ़ेडरेशनों को देखनी चाहिए. अच्छी फ़ंडिंग होनी चाहिए, सही योजना होनी चाहिए, मार्केटिंग होनी चाहिए, और खिलाड़ियों का पूरा ख्याल रखा जाना चाहिए."

पूर्व खिलाड़ी नाराज़

उधर पूर्व हॉकी खिलाड़ी सरकारी रुख से बेहद नाराज़ हैं.

पूर्व ओलंपियन असलम शेर ख़ान कहते हैं, "इतने बड़े देश में क्रिकेट का नंगा नाच होता है, लेकिन हॉकी खिलाड़ियों के प्रति अधिकारियों का रुख दिखलाता है कि वो हॉकी को लेकर क्या सोचते हैं."

भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कोच हरिंदर सिंह कहते हैं कि वो हर खिलाड़ी को 25,000 रुपए दिए जाने को सम्मान नहीं अपमान समझते हैं.

वो कहते हैं, "लड़कों ने बिना कोई मैच हारे ये टूर्नामेंट जीता. उन्होंने फ़ाइनल में पाकिस्तान को हराया. ऐसे में खिलाड़ियों को 25,000 रुपए का टोकन मनी देना जैसे उनका मज़ाक उड़ाना है."

वो कहते हैं कि अगर हॉकी फ़ेडरेशन खेल की सही मार्केटिंग नहीं कर पा रहे हैं तो अधिकारियों को पद पर बैठने का कोई हक़ नहीं है.

हरिंदर कहते हैं, "खिलाड़ियों को अपने भविष्य की देखभाल करने के लिए धन की ज़रूरत होती है. मात्र जुनून के आधार पर कब तक कोई हॉकी खेलेगा."

हरिंदर बताते हैं कि जब हॉकी कैंप होते थे तो कई खिलाड़ी घर को लेकर विभिन्न चिंताओं से परेशान रहते थे.

उधर असलम शेर ख़ान बताते हैं कि लोग इसलिए भी हॉकी में धन लगाने को तैयार नहीं हैं क्योंकि उन्हें भरोसा नहीं कि इस धन का सही इस्तेमाल होगा.

"आप देख रहे हैं कि ओलंपिक फे़डरेशन के लोग जेल में हैं."

वो बताते हैं कि जब उन्होंने 1975 में विश्व कप जीता तो राज्य सरकारों ने पाँच-पाँच हज़ार रुपए दिए, "‘हमें 60,000 मिले थे. उत्तर प्रदेश से हमें विजय सुपर स्कूटर मिली थी क्योंकि ये नई-नई कंपनी खुली थी."

संबंधित समाचार