'मोदी की तारीफ़, हिंदू चरमपंथ पर चिंता'

हिंदु कट्टरपंथी
Image caption रिपोर्ट में कहा गया है कि हिंदू चरमपंथ पर हो रही चर्चाओं का लोगों की मानसिकता पर असर पड़ा है.

अमरीकी संसद की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में स्वदेशी हिंदू चरमपंथ बढ़ता जा रहा है. इस रिपोर्ट में ‘भारत में पनपते हिंदू चरमपंथ’ का आकलन करते हुए कहा गया है कि ‘हिंदू चरमपंथ’ एक नया और विवादास्पद जुमला बन गया है.

रिपोर्ट में स्वामी असीमानंद के उस बयान का भी ज़िक्र किया गया है जिसमें उन्होंने मालेगांव बम धमाके और समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट में अपनी भूमिका स्वीकार की थी.

रिपोर्ट में टिप्पणी की गई है कि भारत के इतिहास में हिंदू चरमपंथ के मुद्दे पर कभी इतने बड़े पैमाने पर चर्चा नहीं की गई है, जिस तरह से अब की जा रही है.

रिपोर्ट कहती है कि इसका भारत की राष्ट्रीय मानसिकता पर गहरा असर पड़ा है और कई विश्लेषकों का कहना है कि हिंदू राष्ट्रवादी देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के लिए ख़तरा साबित हो सकते हैं.

94 पन्नों की ये रिपोर्ट कॉंग्रेशनल रिसर्च सेंटर यानि सीआरएस ने तैयार की है. सीआरएस अमरीकी संसद का एक स्वतंत्र हिस्सा है, जो कि समय-समय पर विभिन्न विषयों पर अमरीकी सांसदों के लिए रिपोर्ट जारी करता है.

मोदी की तारीफ़

इस रिपोर्ट में गुजरात प्रशासन और मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ़ों के पुल भी बांधे गए हैं और लिखा है कि वे अगले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री की दावेदारी के लिए आगे आ सकते हैं.

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Image caption नरेंद्र मोदी ने इस रिपोर्ट को गुजरात के लोगों के लिए एक सम्मान बताया है.

रिपोर्ट में गुजरात को प्रशासन के मामले में सबसे प्रभावशाली राज्य माना गया है और लिखा है कि ‘विवादों से घिरे गुजरात मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात की आर्थिक प्रक्रिया को कारगर बनाया है और भ्रष्टाचार पर रोक लगाई है, जिसकी वजह से राष्ट्रीय आर्थिक विकास में राज्य की अहम भूमिका रही.’

नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व का विश्लेषण करते हुए रिपोर्ट कहती है कि ‘2002 के सांप्रदायिक दंगों के बाद मोदी ने अपनी छवि सुधारने के लिए राज्य में भारी निवेश को आमंत्रण दिया, जिससे राज्य ने 11 प्रतिशत की आर्थिक बढ़त दर्ज की है.’

गुजरात के अलावा बिहार प्रशासन की भी रिपोर्ट में प्रशंसा की गई है और लिखा है कि भारत के सबसे ग़रीब राज्यों में से एक, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अच्छे प्रशासन ने पूरे राष्ट्र का ध्यान अपनी ओर खींचा.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तारीफ़ में कहा गया है कि नीतीश ने राज्य में कानून व्यवस्था को बहाल किया, शिक्षा की बेहतरी के लिए कई उपाय किए और ढांचागत क्षेत्र का विकास कर आम जनता को फ़ायदा पहुँचाया.

रिपोर्ट में चिन्हित किया गया है कि ‘नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड ने भारतीय मुख्य विपक्षी दल भाजपा के साथ मिल कर बिहार के चुनाव में बेहतरीन जीत हासिल की.’

प्रधानमंत्री पद के दावेदार

रिपोर्ट में नरेंद्र मोदी के प्रशासनिक गुणों के बारे में ही नहीं बल्कि भविष्य में उनके राजनीतिक करियर पर भी टिप्पणी की गई है.

रिपोर्ट कहती है कि हालांकि भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी का निजीकरण के प्रति रुझान किसी से छिपा नहीं है, लेकिन ऐसे संकेत हैं कि भाजपा 2014 के चुनाव से पहले पार्टी के ढांचे में कुछ बड़े बदलाव करे.

रिपोर्ट में लिखा है कि आने वाले चुनाव में पार्टी प्रधानमंत्री पद के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को सामने ला सकती है क्योंकि उनके राज्य में तेज़ी से प्रभावशाली विकास हुआ है.

ग़ौरतलब है कि साल 2005 में अमरीका ने मोदी को वीज़ा देने से इनकार कर दिया था क्योंकि उनके शासन काल में हुए सांप्रदायिक दंगों की विश्व भर के मानवाधिकार संगठनों ने कड़ी निंदा की थी.

इस रिपोर्ट के मीडिया में आने के कुछ घंटो बाद नरेंद्र मोदी ने सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट ट्विटर पर लिखा कि ये गुजरात में रहने वाले छह करोड़ लोगों के लिए सम्मान की बात है.

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