'आतंकवाद का केंद्र हैं पाक और अफ़ग़ानिस्तान'

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Image caption चिदंबरम ने कहा कि आतंकवाद के पाँच में से चार केंद्र पाकिस्तान में हैं.

भारत के गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान आतंकवाद का केंद्र हैं.

उनका कहना था कि पाँच में चार बड़े आतंकवादी समूहों के अड्डे पाकिस्तान में मौजूद हैं.

राजधानी दिल्ली में राज्यों के पुलिस महानिदेशकों और महानिरीक्षकों की एक बैठक को संबोधित करते हुए कहा, "तीन आतंकवादी संगठन ,लश्करे तैबा, जैश ए मोहम्मद और हिज़्बुल मुजाहिदीन लागातार भारत को निशाना बना रहे हैं."

उन्होंने कहा कि अगस्त के महीने तक 22 देशों में 279 बड़े आतंकवादी हमले हुए हैं.

इनमें से सबसे ज़्यादा प्रभावित और बड़े हमले इराक़, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में किए गए हैं और आतंकवाद का केंद्र पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान हैं.

चिदंबरम ने सीमापार से हो रही घुसपैठ पर चिंता ज़ाहिर करते हुए कहा "नियंत्रण रेखा के पार से घुसपैठ में कोई कमी नहीं आई है बल्कि आतंकवादी नेपाल और बांग्लादेश की सीमा से भी घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे हैं. साथ ही घुसपैठिए श्रीलंका के रास्ते तमिलनाडु में प्रवेश कर रहे हैं."

उन्होंने हाल ही में मुंबई और दिल्ली में हुए आतंवादी हमलों को एक धब्बा बताया.

भारतीय इकाइयों से ख़तरा

चिदंबरम का कहना था, "भारत में भी आतंकवादी इकाइयाँ मौजूद हैं. इनमें भ्रमित युवाओं को आकर्षित करने की क्षमता है.ऐसा लग रहा है कि इनमें से कुछ इकाइयाँ इंडियन मुजाहिदीन नाम के संगठन के अंतर्गत काम करती हैं. इनमें प्रतिबंधित स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ इंडिया यानी सिमी के भी लोग जुड़ गए हैं. वहीं इनमें से कई ऐसी भी इकाई है, जो दक्षिणपंथी, धार्मिक या अलगाववाद की विचारधारा का समर्थन करती हैं और इन लोगों ने बम बनाने की तकनीक भी सीख ली है."

उन्होंने आतंकवाद को एक चुनौती बताया और कहा कि इससे लड़ने के लिए एक नीति होनी चाहिए.

चिदंबरम का कहना था कि भारत को कई तरह के ख़तरे हैं और इन ख़तरों के लड़ने के लिए समय, मानव संसधानों, पैसा, तकनीक और सभी एजेंसियों का सहारा लेना होगा.

चिदंबरम ने इस संदर्भ में सवाल उठाया कि क्या हमने मुंबई हमलों के बाद जो किया वो काफ़ी था.

उन्होंने इसका 'हाँ' और 'ना' में जवाब देते हुए कहा कि नवंबर 2008 के बाद 30 बटालियन का गठन किया गया है, जिसमें 36000 सैनिक हैं. इसके अलावा 21 बटालियन का और गठन किया जाएगा.

उनका कहना था कि राइफ़ल, कॉरबाईन, पिस्तौल, रात को देखने वाले उपकरण और गाड़ियों को भी ख़रीदा गया है. लेकिन ये काफ़ी नहीं है और बहुत कुछ किया जाना बाक़ी है.

पुलिस में भर्ती

उनका कहना था, "पुलिस बल में अभी पाँच लाख पद ख़ाली है. काडर की संख्या की समीक्षा किए जाने के बाद आईपीएस अधिकारियों की संख्या 4,720 कर दी गई है. 2011 के जनवरी महीने तक 3393 अधिकारी पद पर थे लेकिन उस स्तर तक पहुँचने के लिए अगले सात साल लगेंगे."

चिदंबरम का कहना था, "सभी राज्यों ने नए पुलिस क़ानून को लागू नहीं किया है और ना ही राज्य पुलिस प्रतिष्ठान बोर्ड का गठन किया है. साथ ही कई राज्यों ने पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया भी नहीं अपनायी है."

उन्होंने माना कि पैसा एक बहुत बड़ी दिक़्कत है लेकिन उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों को साथ मिलकर ख़र्च वहन करने की बात पर ज़ोर दिया.

उनका कहना था, "देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गृह मंत्रालय ने बजट की राशि 25,302 करोड़ से बढ़ाकर कर साल 2011-12 के लिए 40, 834 करोड़ कर दिया गया है. इसका मतलब ये हुआ कि हम देश भर में पुलिस को मज़बूत बनाने के लिए इस साल 1,01, 858 करोड़ रुपए ख़र्च करेंगे. "

उनका कहना था कि इस राशि की रक्षा बजट से तुलना की जानी चाहिए, जिसके लिए 164,415 करोड़ रुपए दिए गए हैं.

उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों को पुलिस बल के लिए और पैसा देने की बात कही.

सीपीए माओवादी समूह को सबसे हिंसक बताते हुए चिदंबरम ने वामपंथी उग्रवादियों से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को साथ मिलकर काम करने की ज़रूरत बताई.

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