आंध्र प्रदेश पर मँडराता बिजली का संकट

तेलंगाना में बंद के तीसरे दिन जनजीवन काफ़ी प्रभावित हुआ है
Image caption तेलंगाना में बंद के तीसरे दिन जनजीवन काफ़ी प्रभावित हुआ है

आंध्र प्रदेश में अलग तेलंगाना राज्य के लिए पिछले तीन दिनों से जारी अनिश्चित कालीन हड़ताल की वजह से सिंगरेनी की कोयला खदानों में उत्पादन बंद हो जाने के बाद बिजली घरों में बिजली का उत्पादन घट गया है. इससे आंध्र प्रदेश के साथ पूरे दक्षिणी भारत पर बिजली का संकट मँडराने लगा है.

अधिकारियों का कहना है कि केवल रामागुंडम के एनटीपीसी प्लांट में सात सौ मेगावाट बिजली का उत्पादन घट गया है. इस संयंत्र से दक्षिणी भारत के सभी राज्यों को बिजली मिलती है.

सत्तर हज़ार मज़दूरों की हड़ताल से हर दिन एक लाख साठ हज़ार टन कोएले का उत्पादन रुक गया है और राज्य के सभी बिजली घरों को कोएले की कमी का सामना करना पड़ रहा है.

बिजली विभाग के हड़ताली कर्मचारियों की संयुक्त समिति के संयोजक रघु रेड्डी ने कहा कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आगामी पाँच दिनों में बिजली के गंभीर संकट का सामना करना पड़ेगा और बिजली की आपूर्ति में कटौती करनी पड़ेगी.

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को इस स्थिति के लिए हड़ताली कर्मचारियों को ज़िम्मेदार बताने के बजाए तेलंगाना की समस्या के समाधान की कोशिश करनी चाहिए.

इधर तेलंगाना के सभी दस ज़िलों में लगातार तीसरे दिन भी कोई कामकाज नहीं हुआ. कर्मचारियों, वकीलों और डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन किए और जुलूस निकाले.

इनमें महिलाओं और युवाओं ने भी भाग लिया. हैदराबाद में छात्रों के एक जुलूस में ख़ास तौर पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को निशाना बनाया गया और हालात की ख़राबी के लिए उन्हें दोषी ठहराया गया.

आने वाले दिनों में हालात के और बिगड़ने की आशंका है क्योंकि शुक्रवार से अध्यापक भी हड़ताल में शामिल हो जाएँगे. रविवार को तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति ने रास्ता रोको कार्यक्रम का आह्वान किया है.

उस दिन तेलंगाना से गुज़रने वाले राज्य मार्गों को लोग बंद कर देंगे और उत्तरी और दक्षिणी भारत के बीच संपर्क काट देंगे.

सोमवार से रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन के चालीस हज़ार से ज़्यादा कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हो जाएगे जबकि मंगलवार से हैदराबाद नगरपालिका के कर्मचारी भी हड़ताल कर देंगे.

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