रसोई गैस पर मंत्री समूह की बैठक टली

  • 16 सितंबर 2011
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Image caption सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल की कीमतों में 3.14 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी की है.

रसोई गैस की सीमित सप्लाई और उसके बाद बाज़ार भाव पर सिलेंडर दिए जाने के मुद्दे पर होने वाली मंत्रियों के समूह यानी ईजीओएम की बैठक टल गई है.

इससे पहले यूपीए के कुछ घटक दल सरकार के पट्रोल के दाम बढ़ाए जाने से नाराज़ थे .

यूपीए के घटक दल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और तृणमुल कांग्रेस सरकार से पट्रोल के दाम में की गई बढ़ोत्तरी को वापस लेने की मांग कर रहे हैं.

दरअसल शुक्रवार को रसोई गैस पर सब्सिडी को घटाएँ जाने और सिलेंडर को बाज़ार भाव पर दिए जाने के प्रस्ताव पर बैठक होनी थी.

इस प्रस्ताव के तहत एक परिवार को एक साल में केवल चार से छह सिलेंडर दिए जाने का प्रस्ताव था.

डीएमके और तृणमुल कांग्रेस ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था लेकिन उन्होंने कहा था कि वे इस बैठक का बॉयकॉट नहीं करेंगे.

तृणमुल कांग्रेस के नेता और केंद्रीय रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि हमने पिछली बार भी इस मुद्दे पर सरकार का विरोध किया था.

घटक दल नाराज़

दिनेश त्रिवेदी का कहना था, ''अगर हम बॉयकॉट करेंगे तो हम अपनी बात किस तरह से रख पाएगें. पट्रोल में बढ़ोतरी से आम जनता पर बोझ बढ़ेगा. समय आ गया है कि हमारे अर्थशास्त्रियों को बैठकर एक अलग मॉडल पर काम करना चाहिए."

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता डीपी त्रिपाठी का कहना था कि उनकी पेट्रोल के दामों में हुई बढ़ोत्तरी की आलोचना करती है और चाहती है कि सरकार इसे वापस ले.

डीपी त्रिपाठी का कहना था,"पेट्रोल के दामों में बढ़ोतरी से पहले हमसे चर्चा नहीं की गई. हम चाहते थे कि ऐसे मुद्दों की चर्चा समन्वय समिति में होनी चाहिए थी."

यूपीए के एक और सहयोगी डीएमके का कहना था, ''अगर सरकार रसोई गैस के दाम बढ़ाएगी तो इससे आम जनता पर भार पड़ेगा. हम नहीं चाहते कि सरकार रसोई गैस पर दोहरी दरें लगाए.''

डीएमके का कहना है कि सरकार को मंहगाई में कमी लानी चाहिए और पेट्रोल के दाम में बढोत्तरी नहीं करनी चाहिए.

शुक्रवार को पेट्रोल-डीज़ल की खुदरा बिक्री करने वाली सरकारी कंपनियों ने पेट्रोल की क़ीमतों में 3.14 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी की थी.

ये इस साल पेट्रोल के दाम में दूसरा सबसे बड़ा इज़ाफ़ा है.

विपक्षी भी नाख़ुश

विपक्षी दल भी पेट्रोल के दाम में की गई बढ़ोत्तरी से नाराज़ है.

मुख्य विपक्षी दल भाजपा का कहना है कि वे इस बढो़त्तरी के ख़िलाफ़ आंदोलन करेंगे.

भाजपा के प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर का कहना था, "सरकार के पास इस बढ़ोत्तरी करने का तार्किक कारण नहीं है. दुनिया में पेट्रोल के पदार्थों के दाम कम हो रहें हैं.ऐसे में इस बढ़ोत्तरी की कोई ज़रुरत नहीं थी. अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह की ये आर्थिक विफलता है."

भाजपा का कहना है कि 11 अक्तुबर से वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की अध्यक्षता में शुरु होने वाली रथ यात्रा के दौरान इस मुद्दे को भी उठाया जाएगा.

मार्क्सवादी क्मयुनिस्ट पार्टी के नेता निलोत्पल बसु का कहना है," सरकार को तेल कंपनियों पर फिर से अपना नियंत्रण स्थापित करना चाहिए और पेट्रोल के दाम को वापस लेना चाहिए. तेल के दाम बढ़ने पर अन्य वस्तुओं पर भी अप्रत्यक्ष तौर पर असर पड़ता है जिससे जनता पर बोझ पड़ेगा."

पिछले वित्त वर्ष 2010-11 में रसोई गैस पर सब्सिडी देने के कारण सरकार पर 23,746 करोड़ रुपए का बोझ था.

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