क्रिकेटरों के युवराज को श्रद्धांजलि

  • 23 सितंबर 2011
पटौदी
Image caption पटौदी 70 साल के थे

भारतीय क्रिकेट टीम के इतिहास के सबसे युवा कप्तान मंसूर अली ख़ान पटौदी नहीं रहे. सभी अख़बारों ने पटौदी के निधन को प्रमुखता दी है और उनकी तस्वीरें भी छापी हैं.

क्रिकेटर और मीडिया पटौदी को एक करिश्माई खिलाड़ी बताते हैं, जिन्होंने भारतीय क्रिकेट को एक बेहतरीन टीम में तब्दील कर दिया था.

वे 21 साल की उम्र में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान बने थे.

प्यार से पटौदी को टाइगर बुलाया जाता था. वे समृद्व परिवार से आते थे, ठसकदार बल्लेबाज़ थे और फुर्तीले फ़ील्डर थे.

हिंदू अख़बार ने पटौदी को 'क्रिक्रेटरों का युवराज' कहा था.

मज़बूत टीम

अपने संपादकीय में अख़बार ने लिखा था,''पटौदी उस समय क्रिकेट टीम में शामिल हुए जब भारतीय टीम की हालत मज़बूत नहीं मानी जाती थी. पटौदी ने खिलाड़ियों की व्यक्तिगत प्रतिभा को निखारकर एक वर्ल्ड क्लास टीम को बनाया और अपने ज़बरदस्त आत्मविश्वास के ज़रिए टीम का नेतृत्व किया और खेल के रणनीतिक पहलुओं में बदलाव किए.''

हिंदुस्तान टाइम्स में क्रिकेट विश्लेषक प्रदीप मैगज़ीन ने लिखा है ,''अगर पटौदी नहीं होते तो भारतीय क्रिकेट टीम को एक आक्रमक, सशक्त इकाई बनने में बहुत समय लगता. ये टीम केवल जीतने के लिए खेलती थी.''

पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने पटौदी को पीढ़ी का सबसे करिश्माई क्रिकेटर की उपाधि दी है.

गावस्कर के मुताबिक,"केवल एक आँख से बल्लेबाज़ी करना और क़रीब 3000 रन बनना, टेस्ट क्रिकेट में आधे दर्जन शतक लगाना, बताता है कि वे कितने प्रतिभाशाली थे."

पाकिस्तान के पूर्व कप्तान इमरान ख़ान भी उन्हें इसी संवेदना से याद करते हैं.

स्पिन गेंदबाज़ी

वे कहते है, "जो भी बल्लेबाज़ होता है वो ही समझ सकता है कि एक आँख से खेलना कितना कठिन होता है, वो भी तेज़ गेंदबाज़ी के सामने. उन्होंने एक आँख होने के बावजूद जो मुक़ाम हासिल किया, वो बताता है कि अगर उनकी दो आँख होती तो किस तरह के खिलाड़ी बन सकते थे."

भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार खिलाड़ी सचिव तेंदुलकर उन्हें हीरो कहते हैं और उनकी मौत को क्रिकेट की दुनिया के लिए बड़ी क्षति बताते हैं.

पूर्व गेंदबाज़ बिशन सिंह बेदी और ईएएस प्रसन्ना ने सत्तर से अस्सी के दशक में पटौदी को स्पिन गेंदबाज़ी की धार देने के लिए सराहना की.

बेदी के अनुसार,"पटौदी का स्पिनर में बहुत ज़्यादा विश्वास था और हम सब में उन्हीं की कप्तानी में सफल हुए. उन जैसा लंबे समय तक कोई खिलाड़ी नहीं पाएँगे. भारतीय क्रिकेट के इतिहास का एक बड़ा अध्याय समाप्त हो गया है."

प्रसन्ना का कहना था कि पटौदी ने भारत में स्पिन चौकड़ी को तैयार किया जैसा वेस्टइंडीज़ की तेज़ चौकड़ी थी.

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