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'गरीबी से निराश नहीं'

  • 17 सितंबर 2011

चीन में हाल ही में संपन्न हुई एशियाई चैंपियंस ट्रॉफ़ी की विजयी भारतीय हॉकी टीम के युवराज वाल्मीकि सबसे कम उम्र के खिलाड़ी थे, लेकिन उनकी लगन, मेहनत, ज़िंदगी में तमाम मुश्कलों के बावजूद आगे बढ़ने की ज़िद दूसरों के लिए जैसे मिसाल है.

अपने पहले सीनियर अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में युवराज ने तीन मैचों में छह गोल किए. इनमें फ़ाईनल में पाकिस्तान के साथ महत्वपूर्ण भिड़ंत शामिल है.

मुंबई के मरीन लाईंस के 16X16 की एक छोटी सी जगह – जिसे मुंबई जैसे भीड़भाड़ और महंगे शहर में कमरा भी कहा जा सकता है – वहाँ युवराज अपने तीन भाई और माता-पिता के साथ रहते है.

पिछले 40 सालों से ये परिवार बिना बिजली और पानी की आपूर्ति के इस कमरे में रह रहा है. युवराज की उपलब्धि की बदौलत पिछले 40 सालों में पहली बार गुरुवार को इस कमरे में बिजली की रोशनी चमकी है.

युवराज वाल्मीकि से बात की बीबीसी संवाददाता विनीत खरे ने