मेरा उपवास किसी के ख़िलाफ़ नहीं: मोदी

  • 17 सितंबर 2011

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि उनका उपवास किसी के ख़िलाफ़ नहीं है. उन्होंने कहा कि ये सारा प्रयास सभी को जोड़ने के लिए है, प्रेम का माहौल आगे बढ़ाने के लिए है.

शनिवार की सुबह से तीन दिनों के सद्भावना मिशन के तहत उपवास पर बैठे नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में छह करोड़ गुजरातियों को संबोधित करते हुए कहा कि गुजरात के किसी भी नागरिक का सुख-दुख उनका भी सुख-दुख है.

उधऱ नरेंद्र मोदी के अनशन के जवाब में अनशन पर बैठे गुजरात में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शंकरसिंह वाघेला ने बीबीसी से बातचीत में मोदी के उपवास को 60 करोड़ का तमाशा बताया है.

वाघेला ने कहा, “गुजरात सरकार के मुख्यमंत्री को अनशन करने की ज़रूरत क्यों पड़ी, मैं ये समझ नहीं सकता. सरकारी पैसे से 50-60 करोड़ का खर्च करके एक तमाशा होता है. इस तरह उपवास नहीं होता है.”

लेकिन दूसरी ओर नरेंद्र मोदी का कहना था, ''किसी का सुख मेरा सुख है, किसी का दुख मेरा दुख है, किसी की पीड़ा मेरी पीड़ा है, किसी के सपने और आकांक्षा मेरे सपने हैं.''

उन्होंने कहा कि गुजरात का एक नागरिक भी अगर दुर्बल है तो गुजरात सबल नहीं हो सकता.

मोदी ने कांग्रेस का नाम लिए बग़ैर कहा कि उनका उपवास देश में पिछले 60 वर्षों में वोट-बैंक की जो राजनीति के ख़िलाफ़ है. उन्होंने कहा कि उनके सद्भभावना मिशन की सफलता का मतलब है वोट-बैंक की राजनीति का मृत्युदंड.

प्रेम का माहौल

उन्होंने कहा कि देश और दुनिया में गुजरात के विकास की चर्चा हो रही है.

राष्ट्रीय राजनीति में आने की इच्छा की ओर संकेत करते हुए कहा मोदी ने कहा, ''हमें आगे बढ़ना है, हम देश को कुछ देना चाहते हैं. हम चाहते हैं कि देश के पिछड़े राज्य गुजरात से मदद मांगें, हम देश के लिए कुछ करना चाहते हैं.''

मोदी ने कहा कि 2001 के भूकंप और 2002 के दंगों के बाद पूरी दुनिया ने मान लिया था कि दोबारा खड़ा नहीं हो सकता लेकिन गुजरात ने विकास की नई ऊचाईयों को छुआ है.

मोदी गुजरात विश्वविद्यालय के सभागार में अपने 62वें जन्मदिन के मौके पर गुजरात की शांति, एकता और सदभावना के लिए उपवास कर रहे हैं.

मोदी ने उपवास पर बैठने से पहले अपनी माँ से आशीर्वाद लिया. उनकी माँ ने उन्हें आशीर्वाद के रूप में रामचरित मानस भेंट की.

नरेंद्र मोदी के उपवास को समर्थन देने के लिए लालकृष्ण आडवाणी समेत भारतीय जनता पार्टी के सभी कद्दावर नेता वहाँ पहुंचे हुए हैं.

पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और एआईडीएमके के दो सांसद भी मोदी को समर्थन देने के लिए वहां पहुंचे.

साथ ही मुस्लिम समुदाय के काफ़ी लोग भी इसमें हिस्सेदार बने हैं.

उपवास पर जाने से नरेंद्र मोदी ने दो पत्र लिखे. पहला पत्र उन्होंने गुजरात की जनता के नाम लिखा और एक दिन पहले उन्होंने देश वासियों के नाम पत्र लिखा जिसमें उन्होने कहा कि प्रदेश में किसी का भी दर्द उनका दर्द है और सभी को न्याय दिलाना उनका कर्तव्य है.

नज़र प्रधानमंत्री पद पर

अहमदाबाद में टाइम्स ऑफ़ इंडिया अख़बार से जुड़े पत्रकार अजय उमठ मोदी के इस उपवास का विश्लेषण करते हुए कहते हैं कि उनका एजेंडा एकदम साफ़ है और नज़र प्रधानमंत्री पद पर हैं. अपने पत्र में उन्होने जिस तरह से देश की आम जनता से गुजरात दंगों पर खे़द जताया है उसमें उनकी कोशिश अपनी छवि को सुधारने की है और सर्वमान्य नेता के तौर पर उभरने की है.

ख़ास कर जिस तरह से उन्होनें प्रकाश सिंह बादल और घटक दलों के नेताओं को भी इसमें शामिल किया है उससे पता चलता है कि वो उनके बीच भी अपनी पकड़ मज़बूत करना चाहते हैं. नरेंद्र मोदी के उपवास का जवाब देने के लिए कांग्रेस नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला भी उपवास पर बैठे हैं.

शंकर सिंह वाघेला साबरमती आश्रम के बाहर उपवास पर बैठ गए हैं.

सत्याग्रह पर बैठे शंकर सिंह वाघेला का कहना है कि नरेन्द्र मोदी पंद्रह सवालों के जवाब दें.

वाघेला ने मोदी से गुजरात दंगों के अलावा पुलिस एनकाउंटर पर भी सवाल पूछे हैं.

दोनों के उपवास को देखते हुए बड़ी तादाद में पुलिस बंदोबस्त किया गया है और निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाये गए हैं.

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