बेनी वर्मा की सक्रियता चर्चा में

बेनी प्रसाद वर्मा
Image caption बेनी प्रसाद वर्मा के अंदाज़ कांग्रेस में भी पुराने लोगों को रास नहीं आए हैं

उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव को लेकर केन्द्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा की अति सक्रियता इन दिनों राज्य के राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय हो गई है.

वर्मा ने सोमवार को लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस कर इस्पात मंत्रालय की ओर से उत्तर प्रदेश के लिए कई परियोजनाएं घोषित कीं और मुख्यमंत्री मायावती पर राज्य के औद्योगिक विकास में सहयोग न देने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की आबादी बढ़कर 21 करोड़ हो गई है, लेकिन यहाँ रोजगार के नए अवसर नही हैं. औद्योगीकरण में राज्य सबसे पिछड़ा है, बेरोज़गारी बढ़ रही है.

वर्मा के अनुसार कृषि क्षेत्र में चार-पाँच फ़ीसदी से ज़्यादा विकास संभव नही है. औद्योगिक विकास से ही उत्तर प्रदेश की बेरोज़गारी दूर हो सकती है और समृद्धि आ सकती है.

इतनी भूमिका बनाने के बाद वर्मा ने कहा कि इस्पात मंत्रालय उत्तर प्रदेश में कुछ उद्योग लगाना चाहता है, लेकिन यहाँ की सरकार जमीन दिलाने में सहयोग नही कर रही है.

उन्होंने बताया कि स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) जगदीशपुर में 12 लाख टन क्षमता का इस्पात संयंत्र और 100 मेगावाट क्षमता का गैस आधारित बिजली घर लगाना चाहती है.

लखीमपुर खीरी और बाराबंकी में स्टील प्रोसेसिंग यूनिट लगाने का प्रस्ताव है. इनके अलावा हरदोई, मिर्जापुर, झांसी और गोंडा में रोलिंग मिल स्थापित कर टीएमटी बार्स उत्पादन की योजना है. गोंडा और जगदीशपुर में औद्योगिक प्रशिक्षण केन्द्र आईटीआई खोलने की योजना है.

वर्मा ने बताया कि इस्पात मंत्रालय बुंदेलखंड के झांसी और ललितपुर में भी कारखाने लगाना चाहता है.

मंत्रालय की योजनाएँ

बाराबंकी और गोंडा में हैंड पम्प, सोलर लाइट और स्कूलों में कमरे बनवाए जा रहे हैं. हाल ही की बाढ़ के दौरान बाराबंकी, गोंडा और बहराइच में भोजन और कपड़े का वितरण कराया गया.

वर्मा बाराबंकी के रहने वाले हैं और गोंडा से सांसद हैं. आस-पास के बहराइच, लखीमपुर खीरी, फ़ैजाबाद, बस्ती और सुल्तानपुर उनके कार्यक्षेत्र हैं.

पिछले लोकसभा चुनाव में इन क्षेत्रों में कांग्रेस की सफलता से कांग्रेस में उनकी साख बढ़ी है और हाल ही में उनका क़द बढ़ाकर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है.

वर्मा पुराने समाजवादी हैं और पिछड़ी कुर्मी बिरादरी से हैं. पिछड़ी जातियों में यादव के बाद कुर्मी सबसे प्रभावशाली जाति है. समझा जाता है इसीलिए कांग्रेस उन्हें इतना महत्व दे रही है.

कांग्रेस में किसी को पहले से मुख्यमंत्री घोषित नहीं किया जाता. फिर भी वर्मा ने मुख्यमंत्री मायावती की नक़ल करते हुए इस्पात मंत्रालय से टीवी न्यूज़ चैनलों और अख़बारों में विज्ञापन जारी करवाकर परोक्ष रूप से अपने को भावी मुख्यमंत्री के तौर पर प्रस्तुत कराया है.

प्रेस कांफ्रेंस में वर्मा ने दावा किया कि विधान सभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी की सीटें घटेंगी और भाजपा जितनी है उतनी रहेगी.

वर्मा का दावा है कि कांग्रेस के पक्ष में अप्रत्याशित नतीजे आएँगे. उनका कहना है कि केवल कांग्रेस पार्टी की सीटें बढेंगी और हो सकता है कि कांग्रेस सरकार बनाने की स्थिति में आ जाए.

अलग से बातचीत में वर्मा ने कहा कि इस बार कांग्रेस बड़ी संख्या में पिछड़े वर्गों के नेताओं को टिकट देगी. कांग्रेस हलकों में माना जाता है कि सोनिया गाँधी बेनी वर्मा को महत्त्व देती हैं, इसलिए आजकल टिकटार्थी भी उनको घेरे रहते हैं. मगर वर्मा को इतना महत्त्व मिलने से कई पुराने कांग्रेसी बहुत ख़ुश नही हैं.

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