भूकंप में मरने वालों की संख्या 40, राहत कार्य बाधित

  • 19 सितंबर 2011
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Image caption भूकंप से नेपाल में काफी तबाही हुई है.

भारत, नेपाल और चीन के कुछ इलाक़ों में आए भीषण भूकंप में अब तक कम से कम 40 लोग मारे गए हैं और डेढ़ सौ से अधिक लोग घायल हुए हैं.

भूकंप का केंद्र सिक्किम से कुछ दूर था और इसमें तिब्बत, बिहार, नेपाल और दिल्ली तक झटके महसूस किए गए.

सिक्किम में मरने वालों की संख्या 19 हो गई है जबकि बंगाल में पांच, नेपाल में सात लोगों के मरने की पुष्टि हुई है.

भारत सरकार ने कहा है कि सिक्किम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में सेना और इंडो तिब्बतन पुलिस बल के जवान भेजे गए हैं.

वो मदद के लिए चिल्लाता रहा....

गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ओंकार केडिया ने बताया कि दिल्ली और कोलकाता से राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन की दस टीमें भेजी गई हैं.

तस्वीरों में भूकंप

केडिया के अनुसार भारत के विभिन्न राज्यों में कम से कम 95 लोग घायल हुए हैं.

सरकारी आकड़ों में मरने वालों की संख्या 14 बताई जा रही है लेकिन अलग अलग राज्यों और देशों से मिल रही सूचना के अनुसार मरने वालों की संख्या 40 तक पहुंच गई है

माना जा रहा है कि दिन में जैसे जैसे नुकसान का पता चलेगा तो मरने वालों की संख्या अधिक हो सकती है.

सिक्किम की राजधानी गंगटोक के आसपास सबसे अधिक नुकसान हुआ है जहां रांगपो, डिकचू, सिंगताम और चुगतांग इलाक़े बुरी तरह प्रभावित हुए हैं.

अधिकारियों के अनुसार तीस्ता नदी के आसपास बसे गांवों सबसे अधिक प्रभावित हैं.

पश्चिम बंगाल से छह और बिहार से तीन लोगों के मरने की सूचना है.

नेपाल की राजधानी काठमांडू में ब्रितानी दूतावास की दीवार गिरने से तीन लोगों की मौत हुई है जबकि अन्य स्थानों पर भूंकप के कारण चार और लोग मरे हैं. नेपाल में घायलों की संख्या 70 तक पहुंच गई है.

चीन की समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार तिब्बत में सात लोगों की मौत हुई है और 22 लोग घायल हैं.

खतरनाक झटके

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Image caption भूकंप के कारण तिब्बत में भी सात लोग मारे गए हैं.

भूकंप की तीव्रता रिएक्टर पैमाने पर 6.8 मापी गई थी और इससे कई राज्य प्रभावित हुए हैं.

पुलिस का कहना है कि बारिश और भूस्खलन के कारण राहत एवं बचाव कार्य में मुश्किलें आ रही हैं.

रविवार की शाम को आए इस भूकंप का केंद्र सिक्किम से कुछ दूर था लेकिन इसके झटके उत्तरपूर्वी राज्यों, बिहार, राजधानी दिल्ली , पड़ोसी देशों नेपाल और बांग्लादेश तक महसूस किए गए.

रात हो जाने और ज़्यादातर जगह टेलीफ़ोन व्यवस्था ठप हो जाने की वजह से सुदूर इलाक़ों की ख़बरें अभी नहीं मिल सकी हैं.

सेना ने अपने 5000 जवानों को राहत कार्यों के लिए प्रभावित इलाक़ों में भेजा है. इसके अलावा इंडो तिब्बत पुलिस फोर्स के 700 जवान भी राहत कार्य में लगे हुए हैं.

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