फ़लस्तीन को भारतीय समर्थन : प्रधानमंत्री

Image caption प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने फ़लस्तीनी नेता को चिट्ठी लिखी है

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास को एक चिट्ठी लिखकर ये आश्वासन दिया है कि भारत संयुक्त राष्ट्र में फ़लस्तीन की सदस्यता के उसके प्रस्ताव का पूरा समर्थन करता है.

प्रधानमंत्री ने अपनी चिट्ठी में लिखा है,''भारत ने हमेशा से फ़लस्तीनी नागरिकों के क़ानूनी अधिकारों की मांग और प्रतिष्ठा और आत्मनिर्भरता के साथ विकास का समर्थन किया है. मैं संयुक्त राष्ट्र में आपको पूरा समर्थन देने का भरोसा दिलाता हूं.''

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरदीप सिंह पुरी ने न्यूयॉर्क में भारतीय संवाददाताओं को प्रधानमंत्री की एक पन्ने की चिट्ठी पढ़कर सुनाई.

प्रधानमंत्री ने ये चिट्ठी 21 अगस्त के महमूद अब्बास की प्रधानमंत्री को लिखी चिट्टी के जवाब में लिखी है जिसमें उन्होंने फ़लस्तीन को संयुक्त राष्ट्र की पूर्ण सदस्यता दिए जाने की बात कही थी.

फ़लस्तीन से जुड़ाव

प्रधानमंत्री ने अपनी चिट्ठी में लिखा है, ''फ़लस्तीन के साथ भारत के रिश्ते ऐतिहासिक हैं और हमारे राष्ट्रीय लोकाचार से उनका गहरा जुड़ाव है. भारत फ़लस्तीनी लोगों के संप्रभू, स्वतंत्र और व्यावहारिक राष्ट्र के लिए किए जा रहे संघर्ष का समर्थन करता है और चाहता है कि पूर्वी येरुसलम उसकी राजधानी बने. भारत चाहता है कि फ़लस्तीन इस्राइल के साथ शांतिपूर्ण संबंध रखते हुए सुरक्षित और अविवादित सीमा के साथ अस्तित्व में आए जैसीकि अरब शांति वार्ता और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव में सहमति बनी थी.''

हरदीप सिंह पुरी ने इन दावों को ख़ारिज कर दिया कि भारत फ़लस्तीनियों की मांग का समर्थन नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि भारत पहला ग़ैर अरब मुल्क है जिसने फ़लस्तीनियों की अलग राष्ट्र की मांग का समर्थन किया था.

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Image caption फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास ने मनमोहन सिंह से समर्थन की मांग की थी

फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास संयुक्त राष्ट्र महासभा के 66वें अधिवेशन में हिस्सा लेने के लिए न्यूयॉर्क पहुंचे हैं और

सोमवार को उन्होंने महासचिव बान की मून को ये संदेश दिया कि शुक्रवार को वो संगठन की सदस्यता के लिए आवेदन करेंगे.

आवेदन

अब्बास ने कहा कि 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने के बाद वो फ़लस्तीनी राष्ट्र की सदस्यता के लिए आवेदन पेश करेंगे.

हरदीप पुरी ने कहा कि फ़लस्तीन को भारतीय समर्थन का अमरीका और इस्राइल से भारतीय रिश्ते से कोई लेना-देना नहीं है.

उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति ऐसी है जिसमें एक देश के साथ रिश्ते का असर दूसरे देश के साथ रिश्ते पर नहीं पड़ता है.

उन्होंने ये भी कहा कि फ़लस्तीन अगर संयुक्त राष्ट्र का सदस्य बन जाता है तो भारत उसके साथ सीधी बातचीत की दिशा में काम करेगा.

ऐसा अनुमान है कि फ़लस्तीन अपना आवेदन संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश करेगा और सुरक्षा परिषद में नहीं जाएगा क्योंकि वहां उसकी पेशकश को अमरीका द्वारा वीटो किए जाने की संभावना है.

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