यूएन बैठक के लिए मनमोहन न्यूयॉर्क में

मनमोहन सिंह
Image caption आतंकवाद और अफ़गानिस्तान मुद्दे पर भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बातों को गौर से सुना जाएगा

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह संयुक्त राष्ट्र की 66वीं आम सभा की बैठक में भाग लेने के लिए छह दिन की यात्रा पर न्यूयॉर्क में हैं.

अपनी इस यात्रा में वो ईरान, दक्षिणी सूडान और श्रीलंका के राष्ट्रपतियों और जापान और नेपाल के प्रधानमंत्रियों से मिलेंगे.

यात्रा से पूर्व अपने संदेश में मनमोहन सिंह ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की आम सभा ऐसे वक्त मिल रही है जब वैश्विक अर्शव्यवस्था आर्थिक मंदी और मुद्रास्फ़ीति के दबाव से जूझ रही है.

उन्होंने कहा, “पश्चिम एशिया, उत्तरी अफ़्रीका और खाड़ी के इलाकों में बड़े उलट-पलट हो रहे हैं और दुनिया के एक महत्वपूर्ण हिस्से में अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है.फ़लस्तीन का सवाल भी सुलझा नहीं है.”

प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य में आतंकवाद और दूसरी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मसलों की ओर ध्यान दिलाया.

सुरक्षा परिषद

19 वर्ष बाद इस साल जनवरी में भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य चुना गया था.

पूर्व विदेश सचिव कँवल सिब्बल के मुताबिक अब जबकि भारत सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य है, प्रधानमंत्री की हर बात को ध्यान से सुना जाएगा क्योंकि इससे इशारा मिलेगा कि भारत सुरक्षा परिषद की बैठकों में किस तरह वोटिंग करेगा.

इस बैठक में भारत सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य बनने की दावेदारी मज़बूत करने की भी कोशिश करेगा.

पिछले दिनों भारत औऱ चीन के बीच दक्षिणी चीनी समुद्र में तेल की खोज को लेकर वाकयुद्द होता रहा है. इस परिपेक्ष्य में भारत और जापान के प्रधानमंत्रियों के बीच बातचीत कितनी महत्वपूर्ण रहेगी?

सिब्बल कहते हैं कि इस मामले पर दोनो देशों के बीच बातचीत महत्वपूर्ण तो होगी ही, लेकिन परमाणु सहयोग पर नेताओं के बीच चर्चा होने की उम्मीद है.

सिब्बल के मुताबिक फ़ुकुशिमा दुर्घटना के बाद जापान में परमाणु ऊर्जा को लेकर शंकाएँ बढ़ी हैं और उन्होंने अपने कदम पीछे किए हैं.

सिब्बल के मुताबिक फ़लस्तीन मुद्दे पर मनमोहन सिंह का बयान ये संकेत देगा कि क्या भारत विश्व का नेतृत्व करना चाहता है या नहीं, या फिर भारत अभी भी अंदरूनी राजनीतिक के आधार पर विदेश नीति पर फ़ैसला लेगा.

फ़लस्तीनी प्रशासन के प्रमुख महमूद अब्बास कह चुके हैं कि वो संयुक्त राष्ट्र में अलग देश की मान्यता के लिए आवेदन करेंगे.

आतंकवाद और अफ़गानिस्तान मुद्दे पर भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बातों को गौर से सुना जाएगा.

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